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by : pramod goyal

फरीदाबाद।  अभी तक आपने कर्मचारी वर्ग ही अपनी मांगो को लेकर आंदोलन करते देखे होंगे। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि अधिकारी भी कर्मचारी यूनियन की आड़ लेकर न केवल धरना -प्रर्दशन कर रहे है।  बल्कि भाजपा की ओछी राजनीती का शिकार हो रहे है। 

निगम एक्स ई एन डालचंद शर्मा और पार्षद दीपक यादव विवाद में एक्स ई एन डालचंद शर्मा ने कर्मी यूनियन के साथ मिलकर इतनी हवा दीऔर निगम प्रसाशन को पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने का दबाव बनवाया। कर्मचारी यूनियन भी न जाने क्यों अधिकारी का इस कदर समर्थन कर रही है। जबकि विवाद केवल इतना है कि एक्स ई एन डालचंद शर्मा भाजपा के अपने एक आका के कहने पर जनहित कार्यो में अड़ंगा लगा रहे थे। उन्हें आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है, केवल अपने राजनैतिक आका को खुश करना है।  पार्षद दीपक यादव भी उनके कार्यालय में स्वीकृत कार्यो को चालू न करवाने के लिए ही गए थे। लेकिन एक्सईएन सबके सामने पल्ला झाड़ते नजर आये। अधिकारी द्वारा यूनियन बाजी करके धरना - प्रदर्शन करना कहा तक उचित है और आला अधिकारी इस पर क्या कारवाही करेंगे।  यह सोचनीय विषय है। 


by : pramod goyal

बल्लभगढ़ में सड़कों पर गंदगी का अंबार, सीवर का भी बह रहा है पानी - क्या यहीं विकास है !  एक तरफ मोहना रोड पर बन रहे उपरगामी पूल के निर्माण में देरी के कारण इस सड़क पर जहां आम लोगों का चलना तक दूभर हो गया है , वही इस रोड पर दुकानदारो का काम काज भी सड़क दुर्दशा के चलते बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जून 2024 में शुरू हुए इस पुल के निर्माण के चलते दो वर्ष से अधिक हो गए है। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। दो साल से मोहना रोड पर जगह जगह गड्ढे और कीचड़ के कारण के चलते यहां पर वाहन तो क्या, लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। जबकि इस रोड पर कई बैंक है। 

ऐसा ही हालत  बल्लभगढ़ की दूसरी सड़कों की भी है , जहां गंदगी के अम्बार लगे हुए है और सीवर का गन्दा पानी सड़कों पर सवछंद विचरण कर रहा है। बरसात के दिनों में तो मिल्क प्लांट रोड पर नाली और सीवर बंद होने से कई कई फुट पानी भर जाता है।  जिसमे निकलकर जाना जोखिम से भरा कार्य नहीं है। इसके अलावा सड़को पर आवारा पशुओ का आतंक कम नहीं हुआ है।  उधर,  सरकार बार बार आवारा पशुओ पर लगाम लगाने के लिए नए नए कानून बनाने का ढिढोरा पीट रही है।  शहर की इन समसयाओ प् जनप्रतिनिधियों का मौन रहना भी चिंता का विषय है।  अगर पार्षद इन समस्याओ का निराकरण के आवाज भी उठाते है, तो निगम अधिकारी स्वीकृत कार्यों में अड़ंगा लगा देते है। 


by : pramod goyal

फरीदाबाद। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंदर और प्रभारी संजय दत्त के सामने ही कांग्रेस नेता न केवल एक दूसरे पर दोषारोपण  करते नजर आये, बल्कि अपनी हार का ठीकरा फोड़ने के लिए कांग्रेस की महिला उम्मीदवार रही नेत्री ने कांग्रेस के अन्य नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कुत्ता जैसे शब्द का प्रयोग किया।  इसके बाद तो कांग्रेस की बैठक में हंगमा हो गया और दूसरे कांग्रेस नेताओं ने इस कांग्रेस नेत्री को जमकर खरी खोटी सुनाई। बैठक सार्वजानिक स्थान पर न होने के कारण भी कई पुराने नेताओं इससे दूरी बनाकर रखी।  पंजाबियो की उपेक्षा का मुद्दा भी मीटिंग उठाया गया। 

हरियाणा में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर मजबूत करने के लिए आला कमान ने अरसे बाद जिला व ब्लॉक स्तर कांग्रेस संघटन का गठन किया और कांग्रेस के सभी घटकों पुनर्गठन किया।  ताकि चुनावों में भाजपा का ब्लॉक स्तर पर मुकाबला किया जा सके। लेकिन इस पुनर्गठन में न केवल समाज के दूसरे वर्गों विशेषकर पंजाबी समाज की अनदेखी की गई, बल्कि वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े नेताओं को भी दरकिनार कर दिया गया। जिससे जमीनी स्तर पर कांग्रेस संघठन को मजबूत करने का पार्टी का सपना अभी अधूरा ही माना जायेगा। 

कांग्रेस को अगर भाजपा की तरह पार्टी का जिला से लेकर ब्लॉक लेवल पर मजबूत आधार बनाना है तो समाज के सभी अंगों को साथ लेकर चलना पड़ेगा। 


by : pramod goyal

 क्या फरीदाबाद में यूथ कांग्रेस का कोई संघठन है और अगर है तो उसके पदाधिकारी कौन है।  क्योंकि आज तक उन्हें किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होते नहीं देखा गया है।  जबकि पूरे देश में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे यूथ कांग्रेस के कर्यकर्ता ही सबसे आगे रहते है


।  लेकिन ऐसा फरीदाबाद में नहीं है।  यहां यूथ कांग्रेस ने न तो अपने दम पर कोई प्रोटेस्ट किया है और न ही कांग्रेस के अन्य प्रोटेस्टो में नजर आये है। 

फरीदाबाद में ऐसे भी कई कांग्रेसी नेता है, तो बड़े आन्दोलनो में भाग लेने से पहले ही अपने आप को हाउस अरेस्ट करवा देते है।  ताकि प्रचार भी हो जाये और पुलिस के डंडों से भी बचे रहे।  सड़को पर उतरने की बजाय ऐसे नेता केवल जुबानी खर्च से ही काम चला देते है। जबकि प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले नेता और कार्यकर्त्ता न तो पुलिस के हाथ लगते है और न ही दिखावा करते है। 

by : pramod goyal

 पेपर लीक के आरोपों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को NEET (UG) 2026 परीक्षा रद्द कर दी है। यह परीक्षा 3 मई को हुई थी। 22.79 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

NTA डीजी अभिषेक सिंह ने कहा- इस गड़बड़ी के लिए हम जिम्मेदार हैं।


परीक्षा दोबारा कराई जाएगी, 6-8 दिन में नई तारीख का ऐलान होगा।

उधर, केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच CBI को सौंप दी है। एजेंसी ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। NTA ने बताया कि भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।

वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दिल्ली में इस मामले में मीडिया ने सवाल पूछा तो वह बिना कुछ बोले निकल गए।

by : pramod goyal

फरीदाबाद।  जवाहर कॉलोनी, एयरफोर्स रोड के निवासी नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।  गलियों में गंदा सीवर का पानी स्वछंद विचरण कर रहा है।  जिसके चलते यहां रहने वाले बछ महिला और पुरुषों का घरों से निकलना भी दूभर हो गया। ऊपर से बीमारियों का खतरा अलग से बना हुआ है। 

जवाहर कॉलोनी की गलियों में सीवरयुक्त इस गंदे पानी का जमाव अपने आप नहीं हुआ है, बल्कि यह प्रसाशन  निकम्मेपन का परिणाम है। नाली और नालों  खुदाई करके छोड़ दी गई है।  जिसे बनाने का काम तीव्र गति से नहीं हो रहा है।  जिसके कारण नाली और नाले भी टूट गए है और गन्दा पानी सड़कों पर जमा हो गया है। एक गली के टूटे नाले का निर्माण पूरा होता नहीं कि दूसरी गली की नाली को भी तोड़ दिया जाता है। कुल मिलकर सरकार में विकास केवल तोड़फोड़ को ही मान लिया गया है। 


by : pramod goyal

 क्या आज हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल खट्टर वास्तव में भाजपा के राजनीतिक चाणक्य साबित हो रहे हैं? घटनाओं की श्रृंखला को देखें तो यह सवाल अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि एक कठोर सच्चाई बनता जा रहा है।

पहले बडकल क्षेत्र से एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दिलवाया गया जिसकी कोई बड़ी राजनीतिक पहचान नहीं थी, फिर भी उसे जीत दिलाई गई। उसके बाद  एक पंजाबी नेता को राज्यसभा तक पहुँचाने की रणनीति भी सफल रही। यह दर्शाता है कि भाजपा पंजाबी वर्ग को साधने की राजनीति योजनाबद्ध ढंग से कर रही है।
इसके विपरीत Indian National Congress हरियाणा में बार-बार ऐसी भूल करती दिखाई देती है जो अपने ही जनाधार को कमजोर करती है। हरियाणा लोकसभा से  कांग्रेस के दलित समाज से दो अत्यंत प्रभावशाली लोकसभा नेता मौजूद हैं, जिन्होंने वर्षों तक समाज का नेतृत्व किया है, फिर भी निर्णयों में वह संतुलन दिखाई नहीं देता जिसकी राजनीति को आवश्यकता है। वे लगातार अध्यक्ष भी रहे
सबसे आश्चर्यजनक दृश्य तो विधानसभा में देखने को मिला।



जब लगभग 1500 करोड़ रुपये की परियोजना—सैनिक कॉलोनी से लेकर एक महत्वपूर्ण पुल के निर्माण की—घोषणा हुई, तब बड़खल के विधायक जिस प्रकार केवल पंजाबियों के नाम पर ढोल-नगाड़े बजाकर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रहे थे, वह अपने आप में सोचने का विषय है। क्या वे फरीदाबाद के कांग्रेस के मठाधीश को पूरी तरह ध्वस्त करने की योजना की खुशी मना रहा है यह अब मठाधीशों को सोचना है
यह प्रतीकात्मक प्रसंग भी याद आता है जब मनोहर लाल खट्टर मिठाई का डिब्बा लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास आए और कहा—
“ये राज्यसभा की जीत के लड्डू हैं।”
और उत्तर मिला— “मैं तो राजनीतिज्ञ आदमी हूँ।”
यह केवल एक हल्का संवाद नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक चाल की घोषणा थी जिसमें विरोधी मुस्कुरा रहा था और हम उसकी गहराई समझ नहीं पाए।
आज जब राहुल गांधी देशभर में जिसकी जितनी जाती उतनी भागीदारी संघर्ष, विचार और लोकतंत्र की राजनीति को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, तब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या प्रदेश स्तर पर पंजाबियों पर इतना जुल्म क्यों गुटबाज़ी और तथाकथित “प्राइवेट लिमिटेड” मानसिकता उनके उस संघर्ष को भीतर से कमजोर नहीं कर रही?
भाजपा बार-बार कहती है कि 2047 तक कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा।
प्रश्न यह है—क्या हम अपनी ही गलतियों से इस कथन को सत्य साबित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं?
समय अभी भी है।
जरूरत है गंभीर आत्ममंथन, व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व और दूरदर्शी राजनीतिक निर्णयों की।
क्योंकि इतिहास बहुत निर्मम होता है—
वह यह अवश्य लिखता है कि किसने संघर्ष को मजबूत किया और किसने उसे भीतर से कमजोर किया कांग्रेस को प्यार करने वाला पंजाबी जब किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में जाते हैं तो उनसे पूछा जाता है की पंजाबियों की यह जो दुर्दशा कांग्रेस में है उसके लिए कौन जिम्मेवार है कांग्रेस के रणनीतिकार या कांग्रेस का आला कमान जहां नेहरू जी ने सब कुछ फरीदाबाद को दिया खासकर पंजाबी समुदाय को बसाया क्या यह रणनीतिकार नेहरू जी की भी खिलाफ हैअब क्या करें कांग्रेस के पंजाबी नेता आप क्या करें यह सवाल अब उनसे है क्या भाजपा ही उनकी दिए सर्वश्रेष्ठ पार्टी होगी यह तो उन पंजाबी नेताओं को सोचना है
by : pramod goyal

 फरीदाबाद - गर्मी शुरू हुई नहीं, अभी से रुला रही है सेक्टर - 2  में बिजली की समस्या।  भीषण गर्मी में तो बिजली की आँख मिचौली अक्सर देखने को मिलती है।  लेकिन अभी पूरी तरह से गर्मी का प्रकोप शुरू भी नहीं हुआ कि बिजली की समस्या ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया। 

सेक्टर - 2 जैसे पाश सेक्टर में हर एक घंटे बाद बिजली का गुल हो जाना आम बात हो गई है।  अगर सेक्टरों में बिजली की उपलब्धता का यह हाल है तो कॉलोनी में क्या होगा। सर्दी के मौसम में इस तर्क के साथ बिजली की कटौती कर दी जाती है कि बिजली की नई लाइन डाली जा रही है और ट्रांसफार्मर बदले जा रहे है। लेकिन गर्मी शुरू होते ही बिजली का वही आलम रहता है। बिजली की समस्या से दो - चार हो रहे लोगों की परेशानी से न तो जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार है ना ही अधिकारियों को।  बस हर बार किसी न किसी


बहाने बिजली के दाम जरूर बड़ा दिए जाते है। 

by : pramod goyal

 विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आत्ममंथन अनिवार्य हो गया है। हरियाणा में अपनी ही गलतियों के कारण सत्ता से दूर हुई कांग्रेस की दिशा क्या है—यह प्रश्न अब आम कार्यकर्ता से लेकर मतदाता तक के मन में है।


लगभग 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जिलाअध्यक्ष की नियुक्ति हुई, उसके करीब 6 महीने बाद कार्यकारिणी बनी और फिर 6 विधानसभाओं पर काम करने वाले 30–31 लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उस प्रमुख पंजाबी बिरादरी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखता, जिसकी भूमिका तीन विधानसभाओं में निर्णायक है और शेष तीन में जीत-हार का संतुलन तय करती है।
फिर सवाल उठता है कि फरीदाबाद की बल्लभगढ़ विधानसभा से जुड़े एक व्यक्ति को पहले पद देना, जो  फिर उसे हटाकर किसी अन्य  व्यक्ति को वही जिम्मेदारी सौंपना।    पारदर्शिता और राजनीतिक दृष्टि पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उस व्यक्ति को नियुक्त क्यों किया गया और हटाया क्यों गया।  यह सवाल उठाना जरूरी है। 
आज आमजन के मन में यह स्पष्ट प्रश्न है कि क्या फरीदाबाद की राजनीति वाकई कांग्रेस के लिए सही दिशा में चल रही है ? जनता तो चाहती थी और चाहती है कि कांग्रेस की सरकार बने, लेकिन यदि ऐसा नहीं हो सका तो उसके कारण बाहर नहीं, भीतर तलाशने होंगे। सच्चाई यह है कि कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह बाहरी नहीं, बल्कि आपसी फूट और आंतरिक असंतुलन रहा है।
ईश्वर करे कि कांग्रेस के नेता और संगठन इस सच्चाई को समय रहते समझें—क्योंकि आत्मचिंतन के बिना न दिशा सुधरती है, न जनविश्वास लौटता है।
by : pramod goyal

 फरीदाबाद। यह निर्विवाद तथ्य है कि फरीदाबाद की छह विधानसभा सीटों में से पाँच पर कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। इसके अनेक कारण हो सकते हैं, किंतु उनमें से एक प्रमुख और अनदेखा न किया जा सकने वाला कारण पंजाबी समाज की निरंतर उपेक्षा भी रहा है। इनमें से कई सीटों पर तो पंजाबियों का बड़ा बहुमत है और कई सीटों पर वह चुनाव को बदलने की क्षमता रखते हैं

फरीदाबाद में न तो विधानसभा पिछले कहीं चुनावों में और न ही नगर निगम चुनावों में पंजाबी समाज को वह प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ, जिसका वह लंबे समय से हकदार रहा है।  विशेष रूप से फरीदाबाद जिले की  विधानसभा में पांच सीट हारने के बावजूद, जब कांग्रेस ने पहली बार नगर निगम चुनाव अपने चुनाव-चिह्न पर लड़ा, तब भी मेयर पद हेतु पंजाबी समाज से किसी प्रतिनिधि को अवसर प्रदान नहीं किया गया।
इसके उपरांत यह व्यापक आशा की जा रही थी कि कम से कम जिला कांग्रेस अध्यक्ष  पद पर पंजाबी समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व अवश्य मिलेगा। यहाँ तक कि परिस्थितियों की कठोरता को देखते हुए जिले को शहरी एवं ग्रामीण दो भागों में विभाजित कर, किसी एक भाग में पंजाबी समाज से अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की संभावना भी व्यक्त की गई। इसी क्रम में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक-पृथक साक्षात्कार आयोजित किए गए, किंतु एक ही अध्यक्ष बनाया गया और इस बिरादरी का जिसे दो विधानसभा टिकट भी प्राप्त हुई थी। 
जब जिला कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ, तब भी पंजाबी समाज की भागीदारी नाममात्र रही। यह और भी आश्चर्यजनक रहा कि इसमें भी एक ही सामाजिक वर्ग का स्पष्ट वर्चस्व देखने को मिला। यहाँ तक कि एक ऐसे व्यक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया, जिसने नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का टिकट लेने से स्वयं इनकार कर दिया था और इस निर्णय से संबंधित समाचार पत्रों की कटिंग को अपने सोशल मीडिया माध्यमों पर साझा किया था।
इन समस्त घटनाक्रमों के बीच फरीदाबाद के एक सांसद एवं मंत्री द्वारा दिया गया यह कथन कि “कांग्रेस का 70 प्रतिशत हिस्सा उनकी जेब में है”, अब केवल बयान न रहकर जमीनी सच्चाई का आभास कराने लगा है।
वर्तमान में यह भी गंभीर चर्चा का विषय है कि उपेक्षित एवं आहत पंजाबी कांग्रेस नेताओं से उनकी ही बिरादरी के भाजपा नेता निरंतर संपर्क साध रहे हैं और उन्हें यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस में उनके लिए न तो सम्मान है और न ही भविष्य, जबकि भाजपा में उन्हें पर्याप्त मान-सम्मान एवं अवसर प्राप्त हो सकता है।
यदि समय रहते इस स्थिति पर गंभीर आत्ममंथन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में फरीदाबाद की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। 



by : pramod goyal

 फरीदाबाद। ABMPL, CMD पुस्पेंद्र मौर्या को फरीदाबाद पुलिस ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयर पोर्ट से गिरफ्तार कर लिया है।  पुस्पेंद्र मौर्या 7 दिन के पुलिस रिमांड पर है। 

ABMPLकंपनी के खिलाफ फतेहबाद के दो दर्जन लोगों ने धोखाधड़ी ने निवेश के नाम पर पैसे ऐठने का मामला फरीदाबाद में दर्ज कराया है।  पुलिस ने CMD पुस्पेंद्र मौर्या के आलावा पुलिस ने इस कंपनी के निदेशक उनके भाई सत्यप्रकाश मौर्या, पत्नी नीलम के अलावा कंपनी के प्रमोटर और इससे जुड़े अन्य लोगो के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। 

फरीदाबाद की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज मुकदमे में शिकायत कर्ताओं ने कहा कि उन्हें कंपनी में निवेश करने और अच्छा रिटर्न देने के किये फरीदाबाद के पुरी बिज़नेस हब में कंपनी के ऑफिस में बुलया गया और कुछ प्रोमोटरों ने उन्हें CMD पुष्पेंद्र मौर्या से मिलवाया।  पुष्पेंद्र मौर्या ने करोडो की राशि निवेश करने के बदले उन्हें कुछ चेक भी दिए।  कुछ दिन बाद कम्पनी के कर्त्ता धर्ता कम्पनी कार्यालय बंद करके फरार हो गए।  उन्हें उनके न तो पैसे लौटाए गए और न ही कोई वायदा किया गया। 

पुष्पेंद्र मौर्या के गिरफ्तारी के बाद अब इसकी ठगी का शिकार फरीदाबाद के लोगों ने भी ABMPLकंपनी और इसके प्रमोटर लीडर के खिलाफ पुलिस कारवाही का मन बना लिया है।  जिसके लिए सभी पीड़ित निवेशकों के एक बैठक जल्द बुलाई गई है। 



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फरीदाबाद। पुष्पेंद्र मौर्या एंड कंपनी द्वारा निवेशकों को पहले ABMPL के नाम पर लूटा, अब STCPRO के नाम पर लूट का धंधा चल रहा है।  मोटे ब्याज का लालच देकर लोगों को बड़े लीडरों  माध्यम से फसाया जाता है।  लाखों - करोडो का निवेश कराने बाद ये लोग अपना बोरिया - बिस्तर समेट कर नए रूप में नजर आने लगते है।  पुराने निवेशकों का पैसा ना लौटकर नए निवेशकों को फ़साने का जाल बुनने लगते है। इस कार्य में पुष्पेंद्र मौर्या के कुछ नजदीकी लोग लीडर पूरी भूमिका निभाते है।  

पुष्पेंद्र मौर्या और उसके भाई सत्यप्रकाश मौर्या ने फरीदाबाद के सेक्टर -81 के पूरी बिजनेस हब में तीन फ्लूरो पर  ABMPL यानि अखंड भारत मल्टी ट्रेड के नाम से एक कंपनी की शुरुआत की।  जिसके बारे में प्रचार किया गया कि यह कंपनी भारत सरकार की कॉरपरेट मंत्रालय से पंजीकृत है और इसकी टर्न ओवर करोड़ो में है। लोगों का विश्वास जीतने के लिए कम्पनी का प्रचार प्रसार कुछ इस तरह लीडरों किया कि जैसे यह स्थाई कम्पनी है और कही भागने वाली नहीं है। लेकिन जैसे ही ABMPLपर लोगो के करोड़ो की राशि आ गई, कुछ दिन बाद ही पुष्पेंद्र एन्ड कंपनी के लोग यहां से अपना काम धंधा समेट कर भाग गए।  लेकिन यह बात कुछ लीडरों को मालूम थी।  पर उन्होंने निवेशकों को बताया नहीं। बल्कि झांसा देते रहे कि सबका पैसा जरूर मिलेगा।  कुछ अंतराल के बाद पुष्पेंद्र मौर्या एंड कंपनी एक बार फिर नए अवतार में नजर आये।  इस बार उन्होंने ऐसी ही एक और नई कंपनी STCPRO बना दी।  लेकिन यहां भी उन्होंने निवेशकों केवल कुछ दिन ही पेआउट दिया और फिर पहले की तरह ही निवेशको को ठग लिया गया। 


by : pramod goyal

फरीदाबाद। पैसा निवेश करने के नाम पर करोड़ो की धोखाधड़ी करने वाले  पुष्पेंद्र पर आखिर कब कसा जायेगा शिकंजा ?  जिसे लेकर निवेश करने वाले अब इस फ्रॉड के खिलाफ चौतरफा कारवाही की रणनीति बना रहे है। धोखाधड़ी का शिकार लोगों को अभी तक पूरा पैसा वापिस दिलाने का झांसा देकर भ्रम फैला रहे पुपेन्द्र के नजदीकी और बड़े लीडर कहलाने वाले भी अब क़ानूनी शिकंजे में फस सकते है। 

कभी अखंड भारत, ए बी एम पी एल तो कभी stc pro के नाम पर पैसा निवेश कराकर अच्छे रिटर्न का दावा करने वाले पुपेन्द्र मौर्या, इसमें हिस्सेदार उसका भाई सत्यप्रकाश मौर्या और पत्नी ने एक माह से भी काम समय में अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया।  दोनों कम्पनियो ने कुछ दिन रिटर्न देकर न केवल पैसा देना बंद कर दिया , बल्कि नए रूप में दूसरे लोगो को ठगने के लिए नई कंपनी STC PRO बना ली। पुराने लोगो का पैसा न लौटकर नए लोगो को ठगने की इस तरकीब में पुष्पेंद्र का साथ कुछ अन्य लोग भी दे रहे है, जिसका खुलासा अगले लेख में करेंगे। 

बहराल अब ठगे गए लोगों ने ऐसे धोखेबाजो के खिलाफ धोखाधड़ी की चौतरफा कारवाही का मन बना लिया है। 


by : pramod goyal

फरीदाबाद। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी आज फरीदाबाद पहुंचे आये और फरीदाबाद में पानी - पानी हो गया। बरसात के कारण पूरा फरीदाबाद जलमग्न नजर आया। शहरी इलाके हो या फिर पाश कहलाये जाने वाले सेक्टर सभी में सड़कों पर कई कई फुट पानी भर गया और आम लोग इसमें फसे रहे। बरसात में धुली भाजपा की विभाजन विभीषिका सभा, मंत्री विधायक मंच पर पब्लिक नदारद

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनहोर लाल खट्टर यहां विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आये हुए थे। ऐसा नहीं है कि मुख्य्मंत्री पहली बार फरीदाबाद आये है।  लेकिन इस बार वे भारी बरसात के बीच यहां पहुंचे और अपनी आँखों से देखा कि बरसात के समय फरीदाबाद का क्या हाल है। एक तो पानी निकासी न होने से सभी सड़के जलमग्न हो जाती है और ऊपर से विकास के नाम पर काफी दिनों पहले खोदी गई सड़कों की मुरमत्त न होने से सड़के गड्डो में  तब्दील हो गई है। जो नित नए हादसों को न्यौता दे रही है। बल्लभगढ़ हो या फिर एन आई टी या फिर सेक्टर हो सभी जगह हाल बुरा है। 


by : pramod goyal

 फरीदाबाद। चुनाव के समय बड़े बड़े वायदे और दावे करने वाले विपक्षी नेता एक दम पिक्चर से गायब ही हो गए है ऐसा लगता है कि  बल्लभगढ़ के नेताओं को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार ही नहीं है। शहर के विधायक और पूर्व मंत्री की तो बात ही अलग है, लेकिन विपक्षी नेताओं पराग शर्मा, शारदा राठौर, राव राम कुमार, रविंदर फौजदार और गिरीश भारद्वाज विधानसभा चुनाव से पहले जनता के साथ न केवल उनकी समस्याओं को लेकर खड़े थे, बल्कि उनके लिए शासन - प्रशासन से लड़ाई भी लड़ी थी। लेकिन आज ये सभी नेता नदारद है। जबकि बल्लभगढ़ की जनता मोहना एलिवेटेड पुल के नाम पर सड़क की खुदाई और चौड़ीकरण को लेकर परेशान है, वही बिजली की भारी - भरकम बिलों ने आम लोगों को महंगाई के इस दौर में एक और झटका दिया है। 

नालों की सफाई का मामला हो या फिर गंदगी और आवारा पशुओं का सड़को पर सवछंद विचरण सभी मुद्दो पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी ने सिद्ध कर दिया है कि वे केवल चुनावी बरसात के समय टर - टर्राने वाले मेढक ही है। 


by : pramod goyal

 बल्लभगढ़। मोहना रोड पर एलेवटिड पुल बनने से दुकानदार ही नहीं, राहगीर भी परेशान है।  एक तो पुल बनाने के नाम पर काफी दिनों से सड़क को न केवल खोदकर डाल दिया गया है, बल्कि सड़क के दोनों अवरोध लगाकर इसे बंद कर दिया गया है। जिससे दुकानदार परेशान है कि उनकी दुकानों पर ग्राहक नहीं आ पा रहे है। टूटी सड़क से राहगीरों को भी परेशानी हो रही है। 

उधर पुल के नाम पर सड़क चौड़ी करने के लिए कभी बाएं और तो कभी दाई और की दुकानों को तोड़ने के फरमान से दोनों तरफ के दुकानदार सहमे हुए है। पीडब्लूडी विभाग को पता ही नहीं है।  उनकी सड़क कहा और कितनी चौड़ी है। पहले पुरानी सड़क को आधार बनाकर पिलर की खुदाई शुरू कर दी गई, अब विभाग के कर्मी राजनैतिक दबाब में सड़क की नाप तोल करने में जुटे है। 

एक तो मोहना रोड पर  बनने से न तो स्थानीय बल्लभगढ़ वासियों को कोई लाभ है और न ही ग्रामीणों को इसका कोई फायदा होगा।  क्योंकि पुल राष्ट्रीय राजमार्ग को दोनों और से नहीं जोड़ेगा। इसका प्रयोग करने वालों काफी घूम कर जाना पड़ेगा।  ऊपर से पुल बनाने के नाम पर शहर के एक मात्र पार्क को भी उजाड़ दिया गया है। 


by : pramod goyal

फरीदाबाद।  हरियाणा में चाहे दवा की दुकान मिले या न मिले ले


किन जगह जगह आपको पूरे हरियाणा में शराब के ठेके अवश्य मिल जायेंगे और वह भी आलीशान। इतना ही नहीं जहां लोगों का कोरोना में घरों निकलना मुश्किल था, वही हरियाणा में ठेकों से शराब धड़ल्ले से बेचीं जा रही थी।  पहले शराब ठेकों खुले में नीलामी होती थी, अब दरें बढ़ाकर उन्ही पुराने मठाधीशो को शराब ठेके आबंटन कर दिए जाते है। 

एक तरफ सरकार नशा को प्रोत्साहित किया जाता है दूसरी तरफ हरियाणा में नशा मुक्त अभियान चलाया जा रहा है लोगों से नशा छोडने की अपील की जा रही है।  यह कैसा नशा मुक्त अभियान है। अगर सरकार को हरियाणा नशा मुक्त बनाना है तो हरियाणा में फिर से शराब बंदी लागू कर दें। 

by : pramod goyal

फरीदाबाद के मंत्री और विधायकों के लिए भी अपने -अपने उम्मीदवारों को जिताने की अग्नि परीक्षा है। मंत्रियों और विधायकों की सिफारिश पर दी गई भाजपा सिम्बल पर पार्षद उम्मीदवारी की टिकट ने पार्टी में ही विद्रोह जैसा माहौल बना दिया। काफी मान मनोवल के बाद भाजपा से बागी हुए कुछ निर्दलीयों ने तो अपना


नामंकन वापिस ले लिया।  लेकिन फिर काफी उम्मीदवार मैदान में डटे रहे।  इतना ही नहीं टिकट की बाट जोह रहे कई भाजपा नेताओं ने नाराज होकर खुले आम निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया।  जिससे कई वार्डों में भाजपा का चुनावी गणित बिगड़ गया। भाजपा ने भी थोक के भाव ऐसे बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से बहार का रास्ता दिखा दिया। लेकिन कभी विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों के लिए जोर दार समर्थन व प्रचार करने वाले इन बागी नेताओं ने इस बार उन्हें ही सबक सिखाने के लिए न केवल घोषित भाजपा उम्मीदवार को नकार दिया, बल्कि उनके विरुद्ध चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार का खुलकर साथ दिया। 

ऐसे में फरीदाबाद के मंत्री और विधायकों के सामने अपने अपने वार्डो के उम्मीदवारों को जिताना एक चेलेंज है। हालंकि इन विधायकों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी है। लेकिन अंदरखाने उन्हें डर सता कि कही बाजी उलटी न पड़ जाये। 

by : pramod goyal

 फरीदाबाद।  फरीदाबाद नगर निगम के 46 वार्ड पार्षदों और पहली बार मेयर का कल 2 मार्च को सीधा चुनाव होगा। जिसे लेकर सभी उम्मीदवार अपनी तैयारी पूरी कर चुके है।  निगम चुनाव में पहली बार भाजपा और कांग्रेस ने पार्टी सिंबल अपने उम्मीदवार उतारे है। लेकिन इसके साथ ही दोनों राजनैतिक दलों के सामने बागियों की समस्या सामने आ गई। इस समय भाजपा के 9 और कांग्रेस के 2 बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे है। 

भाजपा ने हरियाणा निकाय चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हुआ है।  फरीदाबाद में केंद्रीय मंत्री से लेकर हरियाणा केबिनेट के तीनो मंत्री के अलावा मुख्यमंत्री नायब सैनी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली और दिल्ली के सांसद और भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी को निकाय चुनाव प्रचार में झोंक दिया गया। जबकि कांग्रेस की ओर से केवल सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने ही केवल एक दिन प्रचार किया। स्थानीय मंत्री और विधायकों ने खुद पार्षद उम्मीदवार बनकर प्रचार किया। लेकिन इस सबके के बावजूद दोनों राजनैतिक दलों के उम्मीदवारों पर निर्दलीय उम्मीदवार भारी पड़ते नजर आ रहे है। इसका सबसे बड़ा कारण निर्दलीय उम्मीदवारों का लोकप्रिय होना है।  इसलिए कहा जा सकता है कि फरीदाबाद निगम चुनाव में निर्दलीय


उम्मीदवार भाजपा की जीत का गणित कहीं बिगाड़ न दें। 

by : pramod goyal

फरीदाबाद। जैसे जैसे निगम चुनाव की तारीख नजर आ रही है, वैसे ही सभी उम्मीदवारों ने प्रचार में पूरी ताकत झोक दी है। डोर टू डोर कम्पैन करने के साथ उम्मीदवार नुक्कड़ सभाएं करके भी मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे है।  निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनैतिक दलों पार्टी सिंबल अपने प्रतियाशियों को उतारा है तो अधिकांश निर्दलीय उम्मीदवार उनका खेल बिगाड़ने में लगे है।  बल्लभगढ़ नगर निगम का वार्ड 42 पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित है।  शहरी वार्ड होने के बावजूद इसे पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित करने के पीछे की राजनीती यहाँ के लोगों रास नहीं आ रही है और वे सत्ताधारी दल को शिकस्त देने के मूड में है। इस वार्ड में मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार योगेंद्र उर्फ़ बुद्दा सैनी और निर्दलीय दीपक यादव के बीच है। निर्दलीय उम्मीदवार दीपक यादव पहली बार इस वार्ड से चुनाव लड़ रहे है। हालांकि उन्हें स्थानीय लोगों का साथ तो मिल रहा है।  लेकिन अगर अंतिम समय में विधायक और पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा अगर वार्ड 42 में प्रभावित कर गए तो दीपक यादव का हवाई जहाज कहीं हवा में ही नहीं रह जाये,


इसका खतरा है। उधर, भाजपा उम्मीदवार योगेंद्र उर्फ बुद्दा सैनी भी इस वार्ड के लिए बिलकुल नए है।  उन्हें प्रचार के लिए पार्टी के कार्यकर्त्ता तक नहीं मिल रहे है। इस लिए यह तो चुनाव परिणाम ही बातयेगा कि कमल खिलेगा  या फिर हवाई जहाज लैंड करेगा !