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by : pramod goyal

 फरीदाबाद जिले में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने इस बार व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। शहर में जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करीब 23.70 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एक महीने के भीतर सभी प्रमुख और छोटे नालों के साथ-साथ सीवर लाइनों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि मानसून के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा के मुताबिक, सफाई कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फरीदाबाद में करीब 65 छोटे-बड़े नाले हैं, जिनकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है। इनमें गौछी ड्रेन सबसे अहम है, जिसकी सफाई में अधिक समय और संसाधन लगते हैं। इस बार विशेष निगरानी में इसका कार्य कराया जाएगा।

प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती बरती जा रही है। मेयर और निगम कमिश्नर खुद रोजाना अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट ले रहे हैं, ताकि काम में किसी तरह की लापरवाही न हो। इसके अलावा वर्षा जल निकासी को बेहतर बनाने के लिए करीब एक करोड़ रुपए की लागत से नई ड्रेनेज लाइनें भी बनाई जाएगी।


by : pramod goyal

 फरीदाबाद- थाना सारन की टीम ने 6 अप्रैल को सट्टा खाई करने वाले 2 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर ₹3800 बरामद किये हैं।



पुलिस प्रवक्ता अनुसार थाना सारन की टीम को गुप्त सुत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि सारन पार्क में सट्टा खाई की जा रही है, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुये टीम द्वारा रेड की कार्यवाही की गई तथा प्रभाकर कुमार वासी संजय कॉलोनी व हनी कुमार वासी न्यू जनता कॉलोनी फरीदाबाद को सट्टा खाई करते हुए ₹3800 सहित काबू किया गया। दोनों आरोपितों के विरुद्ध थाना सारन में जुआ अधिनियम की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज कर माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उनकी जमानत मंजूर हुई है।
by : pramod goyal


 हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने आज महाराजा अग्रसेन एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए छात्राओं को संबोधित किया। अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज का यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है जहां से जिम्मेदारियों नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की वास्तविक यात्रा आरंभ होती है।

उन्होंने कहा कि छात्राओं के हाथ में आई डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम माता पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन का साकार रूप है। यह वह आधारशिला है जिस पर वे अपने उज्ज्वल भविष्य के साथ साथ देश के विकास की नई इमारत खड़ी करेंगी।

मंत्री विपुल गोयल ने महाराजा अग्रसेन के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक रुपया एक ईंट का सिद्धांत आज भी सामाजिक समरसता समानता और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की नीतियों में इन्हीं मूल्यों की झलक दिखाई देती है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
उन्होंने नारी शिक्षा के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब एक महिला शिक्षित होती है तो वह केवल अपने जीवन को नहीं बदलती बल्कि पूरे परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं चाहे वह विज्ञान और तकनीक हो रक्षा सेवाएं हों प्रशासनिक क्षेत्र हो या उद्यमिता का क्षेत्र।

मंत्री विपुल गोयल आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2014-15 में जहां लगभग 1.57 करोड़ बेटियां उच्च शिक्षा में थीं वहीं आज यह संख्या बढ़कर लगभग 2.07 करोड़ से अधिक हो चुकी है जो करीब 32 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। STEM क्षेत्रों में महिलाओं की लगभग 43 प्रतिशत भागीदारी यह प्रमाणित करती है कि भारत की बेटियां अब केवल भागीदारी नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। स्कूल शिक्षा में भी बेटियों का नामांकन लगातार बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर में कमी आई है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का भारत है जहां डिजिटल क्रांति स्टार्टअप संस्कृति और नई शिक्षा नीति ने युवाओं को नई दिशा दी है। गांवों से निकलकर स्टार्टअप्स का उभरना और वैश्विक मंच पर भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि देश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है।

इस अवसर पर मंत्री विपुल गोयल ने नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की आधी आबादी को समान अवसर और सम्मान देने की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसके माध्यम से संसद और विधानसभा

ओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है जिससे आने वाले समय में निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि जब शिक्षित बेटियां नीति निर्माण और नेतृत्व के केंद्र में पहुंचेंगी तो देश की दिशा और गति दोनों में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। यह अधिनियम भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी संतुलित और मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

मंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत उन्हें केवल शिक्षा का अवसर नहीं दे रहा बल्कि नेतृत्व करने और बदलाव लाने का अवसर भी दे रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान कौशल और आत्मविश्वास का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें।
उन्होंने युवाओं से कहा कि देश को आज केवल राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रनीति की आवश्यकता है। Nation First Party Next Self Last का मूल मंत्र अपनाकर ही हम एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मंत्री विपुल गोयल ने यह भी कहा कि सफलता के साथ संस्कारों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जहां भी जाएं अपनी जड़ों अपने मूल्यों और अपने सामाजिक दायित्व को कभी न भूलें। सच्ची सफलता वही है जिसमें समाज के प्रति समर्पण और सेवा का भाव समाहित हो।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि छात्राओं की इस उपलब्धि के पीछे उनका त्याग समर्पण और मार्गदर्शन ही सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान संस्कार और संकल्प के बल पर आत्मनिर्भर सशक्त और गौरवशाली भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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 फरीदाबाद, 7 अप्रैल 2026 -  जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “आत्मनिर्भर भारत के लिए स्मार्ट एवं सस्टेनेबल कृषि: प्रौद्योगिकियां, नीतियां एवं प्रथाएं” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आज शुभारंभ हो गया।


इस कार्यक्रम में देश भर के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों तथा छात्रों ने भाग लिया और तकनीकी नवाचार तथा सतत प्रथाओं के माध्यम से कृषि के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। गणमान्य अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। डीन इंस्टीटूशन तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुनिश वशिष्ठ ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि कृषि राष्ट्र की रीढ़ है तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आईओटी और नवीकरणीय ऊर्जा को पारंपरिक कृषि प्रथाओं के साथ एकीकृत करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने बल दिया कि सेमिनार का उद्देश्य शोध और वास्तविक दुनिया के कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाटना है, ताकि नवाचार जमीनी स्तर तक पहुंच सकें।

संयोजक डॉ. मंजू कुमारी ने सेमिनार की थीम तथा उद्देश्यों को प्रस्तुत किया तथा जलवायु परिवर्तन, संसाधन कमी और मिट्टी की गिरती स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने में

अंतर-अनुशासनात्मक सहयोग की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डाला।


मुख्य अतिथि डॉ. बाबन कुमार बंसोड़ (मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईओ चंडीगढ़) ने विचारपूर्ण मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादक तो है, लेकिन डेटा-आधारित निर्णय लेने की कमी के कारण अकुशल है। उन्होंने सेंसर-आधारित निगरानी, मल्टी-पैरामीटर विश्लेषण तथा व्यावहारिक फील्ड-लेवल समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया तथा शोधकर्ताओं से अपील की कि वे प्रकाशनों से आगे बढ़कर स्केलेबल और किसान-अनुकूल नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करें। इस अवसर डीन शैक्षणिक मामले प्रो अतुल मिश्रा और डीएसडब्ल्यू प्रो प्रदीप डिमरी भी उपस्थित रहे।

वरिष्ठ संकाय सदस्यों सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी सभा को संबोधित किया और विभाग की इस पहल की सराहना की, जो प्रौद्योगिकी को भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक से जोड़ती है। सेमिनार में छात्रों, शोधकर्ताओं तथा शिक्षाविदों की उत्साही भागीदारी देखी गई।
उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. ललित राय द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें सभी गणमान्य व्यक्तियों, आयोजकों तथा प्रतिभागियों के योगदान को स्वीकार किया गया तथा कहा गया कि यह सेमिनार केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नवाचार और स्थिरता की दिशा में सहयोगी यात्रा की शुरुआत है।
सेमिनार अगले दो दिनों तक तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों तथा चर्चाओं के साथ जारी रहेगा, जिसका उद्देश्य भारत की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
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 फरीदाबाद: पुलिस उपायुक्त अपराध, राजेश कुमार मोहन के दिशा निर्देश पर कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद पुलिस की साइबर सेल टीम ने तकनीकी सहायता से गुम हुये 149 मोबाइल फोन ढूंढ निकाले हैं। 7 अप्रैल को अमन यादव, सहायक पुलिस आयुक्त, अपराध ने पुलिस लाइन फरीदाबाद में तलाश किये 149 मोबाइल फोन उनके असल मालिकों को वापस लौटाया है।


पुलिस प्रवक्ता अनुसार साइबर सेल फरीदाबाद की टीम ने CEIR पोर्टल के माध्यम से गुमशुदा 149  मोबाइल फ़ोन को ट्रेस करने का सराहनीय कार्य किया है। तलाश किये गये मोबाइल फोन को अमन यादव, सहायक पुलिस आयुक्त अपराध द्वारा उनके असल मालिकों के हवाले किया गया है। मोबाइल फ़ोन वापिस प्राप्त होने पर  लोगों ने फरीदाबाद पुलिस का धन्यवाद किया। फरीदाबाद पुलिस द्वारा पूर्व में भी गुम हुए मोबाइल फोन उनके मालिकों तक पहुंचाया गया है। 

उन्होंने आगे बताया कि जब भी किसी का मोबाइल फोन गुम होता है तो https://www.ceir.gov.in/Home/index.jsp पर जरूर शिकायत करें ताकि गुमशुदा फोन को तलाश किया जा सके।


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 फरीदाबाद- फरीदाबाद पुलिस द्वारा आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ तस्करों पर भी लगातार कार्यवाही की जा रही है। 7 अप्रैल को AVTS-1 सिकरौना फरीदाबाद की टीम ने प्रतिबंधित पेंटाज़ोसाइन के 21 इंजेक्शन सहित एक आरोपी को आसियाना फ्लैट सेक्टर-62 के पास से गिरफ्तार किया है। 


पुलिस प्रवक्ता अनुसार 6 अप्रैल को क्राईम ब्रां

च AVTS की टीम ने अपने गुप्त सुत्रों की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए संदीप वासी गाँव उसरी, जिला आजमगढ़ उत्तर प्रदेश हाल सेक्टर 65, फरीदाबाद को 21 इंजेक्शन पेंटाज़ोसाइन सहित गिरफ्तार किया है। जिसके विरुद्ध आदर्श नगर थाना में एनडीपीएस की धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

पूछताछ में सामने आया कि वह 40 इंजेक्शन, 4000 रुपये में आजमगढ से खरीद कर लाया था, जिसमें से कुछ बेच दिये थे। उसने D.Pharm की पढाई कर रखी है। जिसको मानीनय न्यायलय में पेश कर 2 दिन पुलिस रिमांड पर लिया है।   
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 असम पुलिस की टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर पहुंची है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी की FIR के बाद यह कार्रवाई की गई है। पवन घर पर नहीं है। असम पुलिस उनसे पूछताछ के लिए इंतजार कर रही है। दिल्ली पुलिस भी साथ में मौजूद है।

दरअसल दो दिन पहले पवन ने असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाया था कि उनके पास मिस्र, एंटीगा-बरबूडा और UAE के पासपोर्ट हैं। हिमंता और उनकी पत्नी ने आरोपों को गलत बताया था।

दिल्ली में छापेमारी पर सीएम सरमा ने आज कहा कि वह कल गुवाहाटी से भाग गए। मुझे मीडिया के जरिए पता चला है कि पुलिस दिल्ली में उनके घर गई थी, लेकिन वह हैदराबाद भाग गए हैं। कानून अपना काम करेगा।

हिमंता की पत्नी ने सोमवार को FIR भी कराई थी। असम में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। आज शाम 5 बजे प्रचार थम जाएगा।


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 फरीदाबाद, 07 अप्रैल 2026: जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मेटासागा प्राइवेट लिमिटेड ने प्रतिष्ठित डेयर टू ड्रीम 5.0 इनोवेशन कांटेस्ट में स्टार्टअप और एमएसई (माइक्रो एवं स्मॉल एंटरप्राइज) श्रेणी में दूसरा पुरस्कार प्राप्त करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।


यह प्रतियोगिता भारत सरकार के रक्षा अनु

संधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) योजना के अंतर्गत आयोजित की गई थी। यह राष्ट्रीय स्तर का इनोवेशन चैलेंज उन अभूतपूर्व विचारों और प्रौद्योगिकियों को पहचानता है जिनकी रक्षा तथा सामरिक क्षेत्रों में संभावित अनुप्रयोग हो सकते हैं।


विश्वविद्यालय में आईपीआर, इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन/स्टार्ट-अप डिवीजन के प्रभारी प्रो. संजीव गोयल ने बताया कि मेटासागा पूरे देश के अनेक इनोवेटिव स्टार्टअप्स में से चुना गया। यह उपलब्धि जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में विकसित उच्च गुणवत्ता वाले इनोवेशन और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है।

जे.सी. बोस टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, बुनियादी ढांचा, फंडिंग सहायता तथा उद्योग-अकादमिक संबंधों के माध्यम से पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पुरस्कार विश्वविद्यालय की नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्रीय महत्व की प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने मेटासागा टीम तथा जे.सी. बोस टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां  विश्वविद्यालय में इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित करने के विजन को और मजबूत करती हैं, जो आत्मनिर्भर भारत तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देता है।
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 फरीदाबाद जिले के सिविल अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक छह महीने में जन्मी प्रीमेच्योर बच्ची को ऑक्सीजन देने में कथित लापरवाही बरती गई। बच्ची के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की इमरजेंसी में रखा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली मिला और दूसरे सिलेंडर की व्यवस्था करने में करीब 20 से 25 मिनट का समय लग गया।

इस दौरान अस्पताल का कोई कर्मचारी मदद के लिए सामने नहीं आया।

नगला डबुआ के रंजीत ने बताया कि उनकी चाची की करीब चार से आठ दिन पहले ही छह महीने में प्रीमेच्योर बच्ची हुई थी। बच्ची के जन्म के बाद उसे तुरंत इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, क्योंकि वह पूरी तरह विकसित नहीं थी और उसे विशेष देखभाल की जरूरत थी, लेकिन निजी अस्पताल में इलाज का खर्च काफी ज्यादा होने के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता चला गया।

रंजीत ने बताया कि निजी अस्पताल में कुछ दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टरों ने बच्ची और उसकी मां को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिवार ने वहां भी इलाज शुरू करवाया, लेकिन वहां का खर्च भी काफी अधिक था। ऐसे में मजबूरी में परिवार ने बच्ची की मां को तो डिस्चार्ज करवा लिया, लेकिन बच्ची को अस्पताल में रखने के लिए भी भारी रकम मांगी जा रही थी, जिसे परिवार के लिए वहन करना मुश्किल हो गया।

इसी दौरान किसी परिचित से उन्हें जानकारी मिली कि फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में प्रीमेच्योर बच्चों के लिए विशेष केयर सेंटर की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद परिवार ने बच्ची को सिविल अस्पताल ले जाने का फैसला किया। सोमवार की शाम के समय निजी अस्पताल की एंबुलेंस से बच्ची को सिविल अस्पताल लाया गया।

परिजनों के अनुसार जब वे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे, तो बच्ची को पहली मंजिल पर स्थित वार्ड में ले जाने के लिए छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ी।

अस्पताल स्टाफ ने इमरजेंसी से एक छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर लाकर दिया, लेकिन जब उसे बच्ची को लगाने की कोशिश की गई, तो पता चला कि सिलेंडर में ऑक्सीजन ही नहीं है और वह पूरी तरह खाली है। इस स्थिति से परिजन घबरा गए। उन्होंने तुरंत अस्पताल स्टाफ से दूसरा सिलेंडर लाने के लिए कहा, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई।

रंजीत का आरोप है कि छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए करीब 20 से 25 मिनट तक इमरजेंसी गेट पर ही इंतजार करना पड़ा। इस दौरान जब स्टोर रूम से सिलेंडर लाने की बात कही गई, तो वहां ताला लगा हुआ था और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। परिजनों का कहना है कि इस दौरान अस्पताल का कोई भी कर्मचारी सक्रिय रूप से मदद के लिए सामने नहीं आया।

आखिरकार जिस निजी अस्पताल की एंबुलेंस से बच्ची को सिविल अस्पताल लाया गया था, उसी एंबुलेंस के स्टाफ ने तुरंत पहल की।

एंबुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर को निकाला और बच्ची को लगाया। इसके बाद उसी सिलेंडर के सहारे बच्ची को पहली मंजिल तक ले जाया गया। रंजीत ने कहा कि निजी अस्पताल के एंबुलेंस स्टाफ ने समय पर मदद करके बड़ी इंसानियत दिखाई, जिसके लिए परिवार उनका आभारी है। उन्होंने कहा कि अगर एंबुलेंस स्टाफ मदद नहीं करता तो बच्ची की हालत और भी गंभीर हो सकती थी।