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by : pramod goyal

 फरीदाबाद  ( ) 22 जुलाई। संयुक्त किसान मोर्चा के आवाहन पर पलवल व फरीदाबाद के किसानों ने प्रधान महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के मुफ्त व्यापार समझौते के विरोध में फरीदाबाद के सांसद श्री कृष्णपाल गुर्जर जी के कार्यालय सेक्टर 28 फरीदाबाद में सांसद जी की अनुपस्थिति में उनके निजी सचिव श्री सतवीर नागर जी को ज्ञापन दिया। जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी रूपराम तेवतिया, दरियाव सिंह, नवल सिंह, सत्यपाल नरवत, ताराचंद, रमेश चंद्र, समयराम, चरण सिंह डागर, उपकार सिंह आदि शामिल थे। किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान व नवल सिंह नरवत ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जो मुफ्त व्यापार समझौता अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ किया गया है। उससे भारत का किसान चिंतित है और आक्रोषित है। जब अमेरिका का गेहूं, दूध,  दाले व अन्य


उत्पादक सामान सस्ते दामों पर भारत में उपलब्ध होगा तो भारत के किसानों का महंगा अनाज व अन्य उत्पादक सामग्री जनता क्यों खरीदेगी। अमेरिका में 1.88 मिलियन (18 लाख 80 हजार) किसान हैं जबकि भारत में 14.65 करोड़ किसान हैं। अमेरिका में 2% कार्य बल कृषि पर निर्भर है और भारत में 48 % कार्य बल और 65% आबादी कृषि और संबंध क्षेत्र पर निर्भर है। अमेरिका में औसत खेत का आकार 469 एकड़ है जबकि 2000 एकड़ से अधिक आकार वाले खेत कुल भूमि के 61% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और भारत में औसत जोत का आकार लगभग 2.67 एकड़ है और 86% किसान 5 एकड़ से कम भूमि के मालिक हैं। अमेरिका में प्रति व्यक्ति सब्सिडी लगभग 2156000 रुपए है। जबकि भारत में प्रति व्यक्ति सब्सिडी मात्र 34000 रुपए है। भारत का किसान अमेरिका के मुकाबले प्रति स्पर्धा में कहीं भी नहीं टिकता। भारत में पहले ही किसान कर्ज के कारण एवं खेती में नुकसान के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में मुफ्त व्यापार लागू होने के बाद तो भारत के किसानों का सत्यानाश हो जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ज्ञापन के माध्यम से सरकार से अनुरोध करता है कि इस अमेरिका कॉर्पोरेट के दवाब में समझौते पर पुनर्विचार करके इसे रद्द करे। ताकि किसानों की आजीविका सुचारु रूप से चलती रहे। संयुक्त किसान मोर्चा ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों पर बर्बरता पूर्वक किए गए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। ओर हरियाणा सरकार द्वारा गुरूग्राम व नूँह में बिजली सप्लाई को अडानी व इलेवन नामक पूंजीपतियों को देने का, स्मार्ट मीटर लगाने व कृषि के लिए अलग से एग्री डिस्कॉम बनाने का विरोध करता है।

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 हरियाणा में ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर रोक, हाईकोर्ट में जनहित याचिका के बाद सरकार सख्त हो गई है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के दखल के बाद हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था पर आखिरकार रोक लग गई है। इसको लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

यह जनहित याचिका डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ने अपने अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया के माध्यम से दायर की थी। याचिका में हरियाणा की मंडियों में प्रचलित ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत बंद करने की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह 30 दिनों के भीतर शिकायत पर स्पष्ट और ठोस आदेश जारी करे। कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बुधवार, 1 अप्रैल को राज्य सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए।

सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी आढ़ती किसान को ‘कच्ची पर्ची’ जारी नहीं करेगा। इसके स्थान पर फसल खरीद के बाद अनिवार्य रूप से ‘जे-फॉर्म’ ही किसान को दिया जाएगा, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।


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 फरीदाबाद के गांव अनंंगपुर में जमीन के पैसे के लेन-देन को लेकर किसान के द्वारा सुसाइड करने के मामले में परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाही ना करने का आरोप लगाया है। मृतक के बेटे का कहना है कि आरोपी उनको जान से मारने की धमकी दे रहे है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

गांव अनंगपुर के रहने वाले जयपाल भड़ाना (52) ने 27 दिसंबर को जंगल में जाकर फांसी लगातार सुसाइड कर लिया था। जयपाल के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। जिसमें उसने भाजपा पार्षद गजेंद्र भड़ाना के भाई देवेन्द्र पर जमीन के पैसे ना देने का आरोप लगाया था। 2016 में अपनी एक बीघा जमीन देवेंद्र नामक व्यक्ति को बेची थी। सौदे के समय देवेंद्र ने कुछ रकम मौके पर दी थी, जबकि शेष रकम बाद में देने का वादा किया गया था।

लेकिन लंबे समय तक न तो पैसे मिले और न ही जमीन वापस हुई। जब पिता अपनी जमीन पर दोबारा कब्जा लेने पहुंचे तो जग्गे, दिनेश और विकल नामक व्यक्तियों ने उनके साथ झगड़ा किया और दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। मृतक ने मरने से पहले एक 20 मिनट का वीडियो भी बनाया था जिसमें उसने इन सभी लोगों को मौत का जिम्मेदार ठहराया था।

सूरजकुंड थाना पुलिस ने मृतक के बेटे निखिल की शिकायत पर देवेन्द्र भड़ाना, उसके भाई भाजपा पार्षद गजेंद्र भड़ाना जयपाल उर्फ जग्गे, विकल, दिनेश उर्फ डीके के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।


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 फरीदाबाद में किसान अब एग्री स्टैक पोर्टल के माध्यम से एक क्लिक में जमीन की पूरी जानकारी हासिल कर पाएंगे। इसके लिए किसानों को पोर्टल पर अपनी जमीन का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पोर्टल पर किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी। 22 दिसंबर, यानी कल से इसके लिए विभिन्न गांव में कैंप लगाने शुरू किए जाएंगे।

डीसी आयुष सिन्हा ने बताया कि कैंप में किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी। जिसमें उसकी जमीन से जुड़ी सभी जानकारियों को भरा जाएगा। इसके बाद किसान को एक आईडी मिलेगी,जिस पर जाकर किसान से जुड़ी पूरी जमीन की जानकारी किसान को एक ही बार में मिल जाएगी। इसे लेकर 22 दिसंबर से कैंप लगाना शुरू कर दिया जायेगा और 24 दिसंबर कर ये कैंप लगाए जाएंगे।

जिला के गांव मौजाबाद, बुढ़ैना, बल्लभगढ़ के प्रह्लादपुर माजरा डीग, बहबलपुर, तिगांव के फज्जूपुर माजरा नीमका, शिकारगाह, दयालपुर के बुखारपुर, फज्जूपुर खादर, मोहना के साहुपुरा, नेरावली, गौछी के कबूलपुर बंगार, गौछी, धौज के अल्वापुर, कुरैशीपुर तथा बड़खल के खेड़ी गुजरान, नंगला गुजरान में कैंप आयोजित होंगे। कैंप का आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे कर किया जाएगा।


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 फरीदाबाद । किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद के महासचिव सत्यपाल नरवत ने किसानों की मीटिंग में लिए फैसले के निर्णयानुसार हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण फरीदाबाद की प्रशासक महोदय को आंदोलन का नोटिस दिया गया है। जिसमें लिखा है कि अगर प्रशासक महोदय ने 3 नवंबर तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो 4 नवंबर को नहरपार के किसान भारी संख्या में इकट्ठा होकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्यालय के समक्ष धरना में प्रदर्शन करेंगे।


नोटिस में कहा गया है अगर धरने प्रदर्शन के कारण किसी प्रकार की शांति भंग होती है अथवा सरकारी कार्य में बाधा पड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से प्रशासक महोदय की होगी। समिति के प्रधान जगबीर नागर एवं महासचिव सत्यपाल नरवत ने बताया कि किसानों ने अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासक महोदय को दिनांक 29.08. 2025 को दिया था। उस समय प्रशासक महोदय ने 15 दिन में किसानों को बुलाकर मांगों का समाधान करके मीटिंग में बता दिया जाएगा। लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद भी प्रशासक महोदय ने न तो किसानों को बुलाया और न ही मांगों का समाधान किया। जिस कारण किसानों में भारी आक्रोश है और किसानों को प्रताड़ित करने के लिए इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आ रहे हैं। किसानों की जो मुख्य मांगे हैं उनमें सुप्रीम कोर्ट के मुआवजे का बकाया ब्याज, कुछ किसानों का सेशन कोर्ट के मुआवजे का ब्याज, प्रति वर्ष मिलने वाली रॉयल्टी, जमीन अधिग्रहण के बाद बची हुई जमीन के लिए रास्ता, किसानों द्वारा प्लाटों की पूरी पेमेंट जमा करने पर भी कब्जा नहीं मिला आदि। किसान शांतिपूर्वक बातचीत के माध्यम से मांगों का समाधान चाहते हैं। लेकिन अधिकारी किसानों को आंदोलन करने पर मजबूर कर रहे हैं।

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फरीदाबाद ( ) 12 अक्टूबर! किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद की मीटिंग प्रधान जगबीर सिंह की अध्यक्षता में राजमहल गार्डन सेक्टर 78 फरीदपुर में संपन्न हुई। मीटिंग का संचालन समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत ने किया मीटिंग में किसानों ने

अपनी अपनी समस्या बताई एवं विचार रखें। अधिकतर किसान इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आने से परेशान थे। जिसमें किसानों से पैसे के आय और व्यय के बारे में पूछा गया है। जबकि इस बारे में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण विभाग से पूछना चाहिए। किसानों की जमीन अधिग्रहण मुआवजा का पैसा है और एक नंबर का पैसा है ब्याज पर टी.डी.एस. काटा है। इनकम टैक्स स्टेटमेंट भी किसानों ने भरी है। किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत ने बताया कि किसानों की मांगों का ज्ञापन दिनांक 29.08.2025 को जिसमें प्रतिवर्ष मिलने वाली रॉयल्टी, सुप्रीम कोर्ट के मुआवजे का बकाया ब्याज, कुछ किसानों का सेशन कोर्ट ल के मुआवजे का ब्याज, अधिग्रहण से बची हुई जमीन के लिए रास्ता, कुछ किसानों को पेमेंट करने के बाद भी प्लाटों का कब्जा नहीं देना आदि का हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण फरीदाबाद की प्रशासक महोदय श्रीमती अनुपमा अंजुली को दिया था। जिस पर उन्होंने किसानों को 15 दिन बाद बुलाकर मीटिंग करने को कहा था। लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद भी किसानों को मीटिंग के लिए नहीं बुलाया गया और न ही किसानों की पेमेंट कराई गई। जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। मीटिंग में किसानों ने फैसला लिया है कि प्रशासक महोदय को एक-दो दिन में नोटिस देकर 10 15 दिन का समय दिया जाएगा। अगर इस दौरान किसानों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो त्योहारों के बाद प्रशासक महोदय के कार्यालय पर धरना व प्रदर्शन किया जाएगा और इनकम टैक्स नोटिस के बारे में भी किसान संघर्ष समिति इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों से बात करेगी। मीटिंग में फरीदपुर से परमानंद कौशिक, ब्रह्मानंद, धर्मपाल वकील, खेड़ी कलां से जगदीश, प्रकाश, चंद्र सिंह, नीमका से उम्मेद सिंह, ज्ञानी सिंह, भातोला से किरणपाल, चतर सिंह,लख्मीचंद, बडोली से धीरज कुमार, चंद्रसेन, बिजेंद्र, मेहरचंद, वजीरपुर से सुनील गौड़, रिवाजपुर से विजयपाल चौहान, बुढ़ैना से बाबू चंदीला, पलवली से राजकुमार, उदय सिंह नंबरदार खेड़ी खुर्द, सरजीत, महेंद्र आदि ने भाग लिया।

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 पंचकूला: हरियाणा में अब यदि किसानों का ट्रांसफार्मर चोरी हुआ या किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुआ तो मरम्मत या प्रतिस्थापन की पूरी जिम्मेदारी बिजली वितरण कंपनी की होगी।

किसानों से कोई खर्च नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई किसान अपने ट्यूबवेल को 70 मीटर के भीतर अपनी ही जमीन पर स्थानांत


रित करना चाहता है तो इसका भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए हरियाणा राज्य विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने बिजली आपूर्ति संहिता में छठा संशोधन किया है। आयोग के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने बताया कि यह संशोधन राजपत्र में प्रकाशित होते ही पूरे राज्य में लागू हो गया है।

अभी तक यदि किसी किसान के निजी ट्रांसफार्मर में चोरी या खराबी के कारण मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती थी तो उसकी लागत का एक बड़ा हिस्सा किसान को स्वयं उठाना पड़ता था। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता था।


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 फरीदाबाद ( )  3 जून -


किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद के द्वारा 4 जून को  हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक महोदय के कार्यालय पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया था। लेकिन प्रशासक महोदय ने किसान संघर्ष समिति के महासचिव को पत्र लिखकर 3 जून को 12:00 बजे किसानों को मीटिंग के लिए बुला लिया। मीटिंग में प्रशासक महोदय श्री साहिल गुप्ता, संपदा अधिकारी, नायब तहसीलदार और भूमि अर्जन अधिकारी का स्टाफ था तथा किसान संघर्ष समिति की तरफ से प्रधान जगबीर सिंह, महासचिव सत्यपाल नरवत, लीलू चंदीला, अरुण त्यागी, धीरज, बाबूराम, सुभाष, गजराज, प्रकाश नरवत, भूप सिंह, धर्मपाल, राजकुमार, परमानंद, चंद्र एडवोकेट, जितेंद्र एवं अन्य किसान सम्मिलित थे। मीटिंग में किसानों के चेहरों पर गुस्सा साफ झलक रहा था। किसानों को उनका अपना पैसा कई सालों से नहीं दिया जा रहा है। अधिकारी तारीख पे तारीख दिए जा रहे हैं और आज की मीटिंग में भी प्रशासक महोदय ने मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय मांगा है। समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत ने बताया कि किसानों को प्रतिवर्ष मिलने वाली रॉयल्टी के कुछ पैसे (ऊंट के मुंह में जीरे के समान) कुछ किसानों के खातों में डाले हैं तथा अन्य मांगे जैसे मुआवजा, सेशन कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के मुआवजे का ब्याज, किसानों की अधिग्रहण की से बची हुई जमीन के लिए रास्ता एवं खेड़ी कलां गांव के तीन किसान मामचंद, सोहन पाल व दीपचंद को परचेज आफ पॉलिसी के तहत प्लांट के लिए 15 दिन का समय मांगा है। जिस पर किसानों ने गुस्से में कहां की आप समय भले ही 15 की दिन की बजाए 20 दिन ले लो लेकिन तारीख पर तारीख न दे। किसानों ने प्रशासक महोदय से पूछा कि जिन किसानों ने शुरू में रॉयल्टी के लिए फॉर्म नहीं भरा और उनको रॉयल्टी का लाभ नहीं मिल रहा है तो उनको रॉयल्टी कैसे मिलेगी तथा जिन किसानों के प्लाट अलॉट हो गए थे और पेमेंट ना होने के कारण डीएक्टिवेट कर दिए गए वे प्लाट एक्टिव हो सकते हैं क्या। इस पर प्रशासक महोदय ने कहा कि आप लिखकर दर्खास्त दे दें। हम मुख्यालय पंचकूला स्वीकृति के लिए भेज देंगे। समिति के प्रधान जगबीर नगर ने कहा कि हमारी मांगों को पूरा नहीं किया तो किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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 फरीदाबाद ( ) 31 मई। किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद की मीटिंग गांव भतोला में लीलू चंदीला के निवास पर प्रधान जगबीर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत द्वारा संचालित मीटिंग में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया। कि दिनांक 4 जून 2025 बुधवार को नहरपार के किसानों की मुआवजे संबंधित मांगों को लेकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण फरीदाबाद के प्रशासक महोदय एवं भूमि अर्जन अधिकारी के कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। 

समिति के प्रधान जगबीर सिंह व महासचिव सत्यपाल नरवत ने बताया कि नहरपार 19 गांवों की जमीन सरकार ने मास्टर रोड के लिए अधिग्रहण की थी।  जिसका अवार्ड 2010 में सुनाया गया था। फर्स्ट अवार्ड उठाने के बाद किसान सेशन कोर्ट गए। सेशन कोर्ट का बड़ा हुआ मुआवजा सरकार ने आधा-आधा करके दिया। लेकिन उसका ब्याज आज तक नहीं दिया गया। जिसको 12 साल हो गए। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट द्वारा बढ़ाया गया मुआवजा दे दिया गया । लेकिन 2 महीने का ब्याज नहीं दिया गया। जिसको 3 साल हो गए हैं किसानों को प्रतिवर्ष मिलने वाली रॉयल्टी 4 साल से नहीं दी गई है। यह सारी रकम एक अरब से अधिक होगी। जिस पर सरकार किसानों को ब्याज भी नहीं देगी। किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है इन मांगों को लेकर समिति के पदाधिकारी और किसान लगातार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं कई बार प्रशासक महोदय एवं भूमि अर्जन अधिकारी से मीटिंग कर चुके हैं। लेकिन थोथे आश्वासन मिलते हैं। जिसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश है प्लाटो को लेकर भी किसानों को गुमराह किया जा रहा है। पहले मास्टर रोड के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के लिए प्लाट दिए गए थे अब मना कर रहे हैं। जिन किसानों के प्लाटो की पेमेंट ना होने के कारण डीएक्टिव कर दिए थे। वे किसान पेनल्टी सहित पेमेंट देने को तैयार हैं लेकिन उनको प्लाट नहीं दे रहे है। अधिग्रहण के बाद बची हुई जमीन के लिए किसानों को रास्ता नहीं दिया जा रहा हैं। सरकार ने जमीन रोड के लिए अधिग्रहण की थी लेकिन ग्रीन बेल्ट के साथ बची हुई जमीन पर कमर्शियल बूथ काटे जा रहे हैं जो कि गलत है किसानों को भी उसका लाभ दिया जाना चाहिए। खेड़ी कलां गांव के किसान मामचंद, सोहनपाल व दीपचंद को परचेज ऑफ पॉलिसी के तहत प्लॉट नहीं दिए गए। 
मीटिंग में प्रकाशचंद, करतार सिंह, सुभाष चंदीला, राजवीर, चंद्रसिंह, धीरज, हरपाल यादव, परमानंद कौशिक, मनोज, धनराज, धर्मपाल एडवोकेट, अरुण त्यागी, रोहतास यादव, अजीत, चतरसिंह, सिंहराज, धर्मपाल खटाना, गजराज नागर आदि उपस्थित हुए।  



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 हरियाणा में गेहूं का फसल का नुकसान होने के बाद किसानों को एक और बड़ा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक, उन किसानों को फसलों का मुआवजा नहीं दिया जाएगा, जिनमें बिजली शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगी है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बिजली के शार्ट सर्किट से जलने वाली फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दायरे में नहीं आती है। बता दें कि अभी तक प्रदेश के 15 जिलों में 814 एकड़ में लहराती खड़ी फसल 


आग लगने की वजह से बर्बाद हो चुकी हैं। इसके चलते 300 से ज्यादा किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। 

गर्मी के महीनों में अक्सर फसलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। कृषि विभाग के मुताबिक, इस साल प्रदेश में ज्यादातर किसानों की फसल में आग लगने की बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट रही है, जो उनके खेतों से होकर गुजरने वाली बिजली की लाइनों से वजह से हुआ है। किसानों को इस नुकसान के लिए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है, हालांकि अभी तक सरकार की ओर से किसी तरह के पैकेज या राशि का ऐलान नहीं किया गया है। बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सभी जिलों के डीसी को निर्देश दिया था कि आग की घटनाओं से किसानों के नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए।

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 संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन पॉलिटिकल) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 131 दिन बाद आमरण अनशन खत्म कर दिया है। रविवार को फतेहगढ़ साहिब की सरहिंद अनाज मंडी में किसान महापंचायत में उन्होंने इसका ऐलान किया। एक दिन पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डल्लेवाल से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा था कि 4 मई को किसानों से चंडीगढ़ में मीटिंग करेंगे।

महापंचायत में डल्लेवाल ने कहा, "अरविंद केजरीवाल को बचाने के लिए AAP सरकार ने आंदोलन खत्म कराया। किसानों की मांग पर आमरण अनशन खत्म किया है। काफी समय से किसान मुझसे अनशन तोड़ने की अपील कर रहे थे।"

डल्लेवाल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत अन्य मांगों को लेकर 26 नवंबर 2024 को अनशन शुरू किया था। 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल, सरवण सिंह पंधेर समेत अन्य किसानों को हिरासत में लेकर खनौरी और शंभू बॉर्डर खाली करा लिए थे। पुलिस ने डल्लेवाल को पटियाला के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। 3 अप्रैल को उन्हें अस्पताल से छुट्‌टी मिली थी।


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 पंजाब में किसानों की गिरफ्तारी और हिरासत में लेने का असर हरियाणा में भी देखने को मिल रहा है। आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है। हरियाणा के सोनीपत जिले में खरखौदा में किसानों ने भारतीय नौजवान किसान यूनियन के अध्यक्ष बेदी के नेतृत्व में पंजाब के सीएम का पुतला फूंका। बता दें कि पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान 13 महीने से धरने पर बैठे थे। सरकार से 7वीं बार वार्ता विफल होने पर पंजाब पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत बड़े किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया था और दोनों जगहों से किसानों के पक्के मोर्चे को उखाड़ दिया था। अब दोनों हाईवे वाहनों के लिए खोल दिए गए हैं।


किसानों ने पंजाब सरकार की कार्रवाई और किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूंका। किसानों ने मांग की कि गिरफ्तार किए गए किसान नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए और किसानों की बकाया मांगों को पूरा किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और अन्य किसानों को जबरन गिरफ्तार किया गया, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। डल्लेवाल को एंबुलेंस समेत पुलिस ले गई। आमरण अनशन की वजह से उनकी सेहत बेहद नाजुक है। किसान शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। इसी के विरोध में किसानों ने भगवंत मान का पुतला फूंककर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। भारतीय नौजवान किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र उर्फ काला ने चेतावनी दी कि यह पंजाब सरकार का विश्वासघात है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल पर यदि कोई आंच आती है तो इसका खामियाजा पंजाब सरकार को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की इस कार्रवाई के विरोध में पूरे देश में रोष प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 

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 चंडीगढ़: हरियाणा के किसानों पर मोटा कर्जा है। प्रदेश में 27 लाख 71 हजार 676 ऐसे किसान हैं, जो आज के दिन कर्जदार हैं। इन किसानों के ऊपर विभिन्न बैंकों को 60 हजार 60 करोड़ रुपये से अधिक का कर्जा है। डबवाली से इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल के सवाल के जवाब में सरकार ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह आं


कड़ा रखा।

बैंकों की ओर से किसानों को 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण लिया जाता है। इसमें से 4 प्रतिशत ब्याज हरियाणा सरकार तथा तीन प्रतिशत ब्याज केंद्र सरकार की ओर से वहन किया जाता है। यानी किसानों को बिना ब्याज के लोन की सुविधा दी जा रही है। इनेलो विधायक ने सरकार से पिछले 11 वर्षों में किसानों के कर्ज को कम करने के लिए किए गए उपायों पर भी सवाल दागे। उन्होंने कहा कि किसानों को कर्ज के बोझ के तले लाने में सबसे बड़ी भूमिका सरकार की है।

इस मुद्दे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने यह भी कहा कि सरकार किसानों की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। कर्ज को लेकर सीएम ने कहा कि किसान फसली ऋण लेते भी हैं और देते भी हैं। यह नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को ट्रैक्टर-ट्राली सहित कृषि से जुड़े दूसरे उपकरणों के लिए भी लोन की सुविधा दी हुई है।

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 पुलिस के शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसान आंदोलन हटाने पर पंजाब में बवाल मचा हुआ है। किसान हाईवेज पर उतर आए हैं। अब तक 4 जगहों पर पुलिस और किसानों के बीच झड़प हो चुकी है।

वहीं शंभू और खनौरी बॉर्डर पर 13 महीने से की गई बैरिकेडिंग हटाई जा रही है। शंभू बॉर्डर का पंजाब से हरियाणा जाने वाला हिस्सा खोल दिया गया है। DIG हरमनबीर गिल ने कहा कि लोग यहां से जा सकते हैं। अब अंबाला से राजपुरा जाने वाली साइड खोली जा रही है।

इधर, पुलिस ने किसान नेता जगजीत डल्लेवाल को पंजाब में आर्मी के कंट्रोल वाले जालंधर कैंट के PWD रेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया है। उनसे मिलने आए किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान धक्कामुक्की भी हुई। बुधवार दोपहर हिरासत में लेने के बाद पहले उन्हें जालंधर सिटी के PIMS अस्पताल ले जाया गया था।


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 हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत हरियाणा के किसानों को कृषि बीमा के भुगतान में 90 फीसदी की गिरावट आई है। पीएमएफबीवाई के तहत वर्ष 2022-23 में प्रदेश के किसानों को 2,496.89 करोड़ का भुगतान हुआ, वहीं 2023-24 में 224.43 करोड़ रह गया है। लोकसभा में सांसद दीपेंद्र हुड्डा की तरफ से 4 फरवरी 2025 को पूछे गए सवाल पर सरकार की तरफ से कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने जवाब में आंकड़े बताए हैं।

देशभर में किसानों को किए गए दावों के भुगतान में 2022-23 के 18,211.73 करोड़ से घटकर 2023-24 में 15,504.87 करोड़ हुई है। हरियाणा के अलावा राजस्थान 4,141.98 करोड़ (2022-23) से घटकर 2,066.02 करोड़ (2023-24), ओडिशा 568.01 करोड़ (2022-23) से घटकर 209.03 करोड़ (2023-24), मध्य प्रदेश 1,027.48 करोड़ (2022-23) से घटकर 565.28 करोड़ (2023-24) रह गया है।

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि फसल नुकसान की गणना करने वाली समिति में किसानों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर क्लेम निपटारे में मनमानी कर रही हैं, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश के किसानों से बीमा कंपनियां प्रीमियम तो काट लेती हैं, लेकिन मुआवजे की जगह किसानों को दर-दर की ठोकर खानी पड़ती है।


by : pramod goyal

 फरीदाबाद  4  जनवरी ! किसान संघर्ष समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत ने बजट को किसानों के लिए निराशाजनक बताया है ! वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने टोटल बजट पच्चास लाख 52 हजार 384 करोड़ का 3.38% किसानों के लिए दिया है ! जो की पिछले साल से 27000 करोड रुपए अधिक हैं !  पिछले साल 1 लाख 25 हजार करोड़ बजट दिया था पर अबकी बार एक लाख 52 हजार करोड़ का बजट दिया है ! जबकि भारत की आधी से अधिक आबादी कृषि प


र निर्भर है और खेती पर बजट को और अधिक बढ़ाना चाहिए था यह बजट ऊँट के मुहु में जीरे वाली बात है ! खेती ही एकमात्र ऐसा साधन है जो जनता को भूखा नहीं मरने देगी ! ऐसा हम सभी ने कोरोना काल में अपनी आंखों से देखा है ! सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की है उससे किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला उल्टा कर्ज बढ़ेगा ! अगर कर्ज एक मुस्त साल में वापिस जमा नहीं कराया तो ब्याज ज्यादा देना पड़ेगा और किसान कर्ज जमा नहीं कर पाते  और वह ब्याज लगकर बढ़ता जाता है और अंत में किसान की जमीन कुर्की के आदेश आ जाते हैं ! अगर सरकार को किसानों का भला करना ही है तो लोन पर ब्याज 1 % कर देते और फसलों की खरीद के लिए MSP की गारंटी का कानून बनाते  ! दूसरा किसानों के पुराने कर्ज माफ किए जाएं और स्वामी नाथन रिपोर्ट C- 2 + 50 की तर्ज पर पूर्ण रूप से लागू की जाती ! किसान लोन को 7 % ब्याज लगा कर जमा करा देते है लेकिन 3 % का ब्याज वापिस उनके खाते में नहीं आता ! किसानों की गेहूं की फसल तो MSP पर खरीदी जाती है लेकिन सरसों, दाले, मक्का, कपास आदि को MSP पर नहीं खरीदी जाती ! सरकार 141000 करोड़ के खाद्यान और 31774 करोड़ की दाले बाहर के देशों से मंगवाती है! जिसकी वजह से किसानों के खाद्यान्न तेल एवं दाले MSP पर बिक पाते ! उल्टा कम रेट पर बेचने को किसान मजबूर होते है! हरियाणा सरकार ने अभी कुछ दिन पहले छोटे व्यापारियों के 2500 करोड रुपए के लोन माफ़ कर दिए और केंद्र सरकार ने पूंजीपतियों के टैक्स के अरबों रूपये माफ कर दिए और लोन की रकम को बट्टे खाते में डाल दिया !  इसी तरह पूरे देश के किसानों के एक बार कर्ज माफ किए जाने चाहिए थे ! ताकि किसानों की आत्महत्या रोकी जा सके और किसानों को लंबे आंदोलन न करने पड़े। किसान नेता सत्यपाल नरवत ने बताया कि कृषि यंत्रों पर जी.एस.टी. 18% ली जाती है जो की घटाकर 5% की जानी चाहिए थी और कृषि उपकरणों, खाद एवं बीज पर तथा कीटनाशक दवाइयां पर सब्सिडी को बढ़ाया जाना चाहिए था, सम्मान निधि को बढ़ाना चाहिए था  तथा किसानों के बच्चों की शिक्षा व चिकित्शा मुफ्त की जाती ! जो कि बजट में नहीं में नहीं लिया गया ! 

प्रधानमंत्री धन्य-धन्य योजना की घोषणा सरकार ने बजट में की है जो की धरातल पर अमल में लाना बड़ा कठिन लगता है सिर्फ़ एक राज्य बिहार को फायदा पहुंचने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया गया है।
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 टोहाना शहर के हिसार रोड स्थित पक्का किसान मोर्चा स्थल पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं द्वारा नई कृषि व्यापार नीति के की प्रतियों को जलाया गया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई तथा नई कृषि व्यापार नीति के खिलाफ रोष जताया गया। किसान नेताओं ने कहा कि आगामी 26 जनवरी को देश भर में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा।



जिला प्रधान लाभ सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा नई कृषि व्यापार नीति को लाया जा रहा है। इसके विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है और नई कृषि व्यापार नीति की प्रतियों को जलाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तीन कृषि कानून को अब नए तरीके से लागू करने का प्रयास किया जा रहा है जिसका विरोध जारी है। पत्रकारों से बातचीत में लाभ सिंह हरि ने कहा कि आगामी 26 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और आज खनौरी बॉर्डर पर किसान मोर्चा की बैठक होनी है। 
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 फरीदाबाद ( )  22 दिसंबर -  किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद के किसानों ने प्रधान जगबीर सिंह के नेतृत्व में आज किसानों की मुआवजे संबंधित छ: सूत्रीय मांग पत्र खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री  (राज्य स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेश नागर जी को उनके निवास स्थान पर दिया। मंत्री जी ने ज्ञापन लेने के बाद किसानों को उनकी मांगों को पूरा करवाने का आश्वासन दिया और तुरंत हरि


याणा शहरी विकास प्राधिकरण फरीदाबाद के प्रशासक श्री मीना जी से फोन पर बात की। जिसमें किसानों को प्रशासक महोदय ने 26 दिसंबर को सुबह 11:00 बजे अपने कार्यालय सेक्टर 12 फरीदाबाद बुलाया है। समिति के महासचिव सत्यपाल नरवत ने बताया कि कुछ किसानों का सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बकाया मुआवजा तथा किसानों का ब्याज बकाया है सेशन कोर्ट का भी 2013 से कुछ किसानों का मुआवजा एवं ब्याज बकाया है प्रतिवर्ष प्रति एकड़ मिलने वाली रॉयल्टी 4 साल से नहीं मिली है जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण होने के बाद बची हुई जमीन के लिए रास्ता नहीं बचा उनको रास्ता देना है कुछ किसानों को पॉलिसी के तहत प्लाट दिए गए थे उनको भी पोजीशन नहीं दी गई तथा खेड़ी कलां गांव के तीन किसान मामचंद, सोहनपाल व दीपचंद को परचेज आफ पॉलिसी के प्लाट देने थे जो कि नहीं दिए गए। जबकि उनकी जमीन सरकार ने अपने नाम कर ली। ज्ञापन देने वालों में हरिचंद, लीलू चंदीला, किरणपाल, रतन एडवोकेट, बलजीत सिंह, महेंद्र, चंद्रसिंह, वेदपाल, बिजेंदर, पवन नरवत, राजकुमार, धर्मपाल एडवोकेट, भूपसिंह, हरपाल सिंह, धीरज चंदीला, बाबूराम, परमानंद, गजराज, धर्मपाल नीमका आदि किसानों ने भाग लिया।

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 आज खाप प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ में किसानों के समर्थन के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान सतरोल खाप के प्रतिनिधि सतीश ने पत्रकारों से बात की और सभी किसान संगठनों से एकजुट होकर किसानों का समर्थन करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर 2024 को हिसार में महापंचायत होने वाली है और इसके लिए सभी किसान, सभी खापों और सामाजिक संगठनों को निमंत्रित हैं। किसान आंदोलन के लिए आगे क्या किया जाएगा, इसको लेकर महापंचायत में रणनीति बनाई जाएगी और किसान संगठनों के बीच के मनमुटाव को भी खत्म करने की कोशिश की जाएगी। 

सतरोल खाप के प्रतिनिधि सतीश ने किसान आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ये आंदोलन किसी एक किसान का आंदोलन नहीं है, ये सारे किसानों का आंदोलन है। उन्होंने बताया कि पिछली बार आंदोलन के दौरान हरियाणा में तीन धरने चले थे। 102 खापों ने इस आंदोलन का समर्थन किया था और इसके लिए 11 सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी। हरियाणा में चुनाव के दौरान के दौरान इस आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।


हम चाहते हैं कि एक बार फिर सभी किसान संगठन आंदोलन में एक हों। खाप पंचायतें किसानों के हित के लिए साथ खड़ी हैं। हमें केंद्र सरकार से एमएसपी की गारंटी चाहिए। खापों की 11 सदस्य वाली कमेटी किसानों के आंदोलन में उनका समर्थन कर रही है। देश के सभी किसान संगठनों को भी एक साथ आना चाहिए।

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 नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को किसान आंदोलन पर सुनवाई की. अदालत ने कहा कि किसानों के लिए हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं. वे सीधे अपने सुझाव या मांगें लेकर हमारे पास आ सकते हैं या अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने खनौरी बॉर्डर पर आमरण अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तबीयत पर भी पंजाब सरकार से जवाब मांगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "राज्य सरकार को अच्छा नहीं होगा अगर डल्लेवाल को कुछ होता है और आरोप लगते हैं. उन्हें सभी मेडिकल सुविधाएं मिलती रहें, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे." इस बीच पंजाब के अटॉर्नी जनरल गुरमिंदर सिंह ने डल्लेवाल के साथ बातचीत की है. गुरमिंदर सिंह ने कहा, "उन्होंने अपने मेडिकल टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया है. उनके सभी जरूरी अंग सही तरह से काम कर रहे हैं."