फरीदाबाद ( ) 22 जुलाई। संयुक्त किसान मोर्चा के आवाहन पर पलवल व फरीदाबाद के किसानों ने प्रधान महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के मुफ्त व्यापार समझौते के विरोध में फरीदाबाद के सांसद श्री कृष्णपाल गुर्जर जी के कार्यालय सेक्टर 28 फरीदाबाद में सांसद जी की अनुपस्थिति में उनके निजी सचिव श्री सतवीर नागर जी को ज्ञापन दिया। जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी रूपराम तेवतिया, दरियाव सिंह, नवल सिंह, सत्यपाल नरवत, ताराचंद, रमेश चंद्र, समयराम, चरण सिंह डागर, उपकार सिंह आदि शामिल थे। किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान व नवल सिंह नरवत ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जो मुफ्त व्यापार समझौता अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ किया गया है। उससे भारत का किसान चिंतित है और आक्रोषित है। जब अमेरिका का गेहूं, दूध, दाले व अन्य
उत्पादक सामान सस्ते दामों पर भारत में उपलब्ध होगा तो भारत के किसानों का महंगा अनाज व अन्य उत्पादक सामग्री जनता क्यों खरीदेगी। अमेरिका में 1.88 मिलियन (18 लाख 80 हजार) किसान हैं जबकि भारत में 14.65 करोड़ किसान हैं। अमेरिका में 2% कार्य बल कृषि पर निर्भर है और भारत में 48 % कार्य बल और 65% आबादी कृषि और संबंध क्षेत्र पर निर्भर है। अमेरिका में औसत खेत का आकार 469 एकड़ है जबकि 2000 एकड़ से अधिक आकार वाले खेत कुल भूमि के 61% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और भारत में औसत जोत का आकार लगभग 2.67 एकड़ है और 86% किसान 5 एकड़ से कम भूमि के मालिक हैं। अमेरिका में प्रति व्यक्ति सब्सिडी लगभग 2156000 रुपए है। जबकि भारत में प्रति व्यक्ति सब्सिडी मात्र 34000 रुपए है। भारत का किसान अमेरिका के मुकाबले प्रति स्पर्धा में कहीं भी नहीं टिकता। भारत में पहले ही किसान कर्ज के कारण एवं खेती में नुकसान के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में मुफ्त व्यापार लागू होने के बाद तो भारत के किसानों का सत्यानाश हो जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ज्ञापन के माध्यम से सरकार से अनुरोध करता है कि इस अमेरिका कॉर्पोरेट के दवाब में समझौते पर पुनर्विचार करके इसे रद्द करे। ताकि किसानों की आजीविका सुचारु रूप से चलती रहे। संयुक्त किसान मोर्चा ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों पर बर्बरता पूर्वक किए गए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। ओर हरियाणा सरकार द्वारा गुरूग्राम व नूँह में बिजली सप्लाई को अडानी व इलेवन नामक पूंजीपतियों को देने का, स्मार्ट मीटर लगाने व कृषि के लिए अलग से एग्री डिस्कॉम बनाने का विरोध करता है।

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