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पंजाबी समाज की लगातार उपेक्षा फरीदाबाद में कर सकती है कांग्रेस का बंटाधार

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 11 February 2026 0 comments
pramod goyal
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 फरीदाबाद। यह निर्विवाद तथ्य है कि फरीदाबाद की छह विधानसभा सीटों में से पाँच पर कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। इसके अनेक कारण हो सकते हैं, किंतु उनमें से एक प्रमुख और अनदेखा न किया जा सकने वाला कारण पंजाबी समाज की निरंतर उपेक्षा भी रहा है। इनमें से कई सीटों पर तो पंजाबियों का बड़ा बहुमत है और कई सीटों पर वह चुनाव को बदलने की क्षमता रखते हैं

फरीदाबाद में न तो विधानसभा पिछले कहीं चुनावों में और न ही नगर निगम चुनावों में पंजाबी समाज को वह प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ, जिसका वह लंबे समय से हकदार रहा है।  विशेष रूप से फरीदाबाद जिले की  विधानसभा में पांच सीट हारने के बावजूद, जब कांग्रेस ने पहली बार नगर निगम चुनाव अपने चुनाव-चिह्न पर लड़ा, तब भी मेयर पद हेतु पंजाबी समाज से किसी प्रतिनिधि को अवसर प्रदान नहीं किया गया।
इसके उपरांत यह व्यापक आशा की जा रही थी कि कम से कम जिला कांग्रेस अध्यक्ष  पद पर पंजाबी समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व अवश्य मिलेगा। यहाँ तक कि परिस्थितियों की कठोरता को देखते हुए जिले को शहरी एवं ग्रामीण दो भागों में विभाजित कर, किसी एक भाग में पंजाबी समाज से अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की संभावना भी व्यक्त की गई। इसी क्रम में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक-पृथक साक्षात्कार आयोजित किए गए, किंतु एक ही अध्यक्ष बनाया गया और इस बिरादरी का जिसे दो विधानसभा टिकट भी प्राप्त हुई थी। 
जब जिला कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ, तब भी पंजाबी समाज की भागीदारी नाममात्र रही। यह और भी आश्चर्यजनक रहा कि इसमें भी एक ही सामाजिक वर्ग का स्पष्ट वर्चस्व देखने को मिला। यहाँ तक कि एक ऐसे व्यक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया, जिसने नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का टिकट लेने से स्वयं इनकार कर दिया था और इस निर्णय से संबंधित समाचार पत्रों की कटिंग को अपने सोशल मीडिया माध्यमों पर साझा किया था।
इन समस्त घटनाक्रमों के बीच फरीदाबाद के एक सांसद एवं मंत्री द्वारा दिया गया यह कथन कि “कांग्रेस का 70 प्रतिशत हिस्सा उनकी जेब में है”, अब केवल बयान न रहकर जमीनी सच्चाई का आभास कराने लगा है।
वर्तमान में यह भी गंभीर चर्चा का विषय है कि उपेक्षित एवं आहत पंजाबी कांग्रेस नेताओं से उनकी ही बिरादरी के भाजपा नेता निरंतर संपर्क साध रहे हैं और उन्हें यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस में उनके लिए न तो सम्मान है और न ही भविष्य, जबकि भाजपा में उन्हें पर्याप्त मान-सम्मान एवं अवसर प्राप्त हो सकता है।
यदि समय रहते इस स्थिति पर गंभीर आत्ममंथन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में फरीदाबाद की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। 



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