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कांग्रेस आज उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आत्ममंथन अनिवार्य है

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 21 February 2026 0 comments
pramod goyal
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 विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आत्ममंथन अनिवार्य हो गया है। हरियाणा में अपनी ही गलतियों के कारण सत्ता से दूर हुई कांग्रेस की दिशा क्या है—यह प्रश्न अब आम कार्यकर्ता से लेकर मतदाता तक के मन में है।


लगभग 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जिलाअध्यक्ष की नियुक्ति हुई, उसके करीब 6 महीने बाद कार्यकारिणी बनी और फिर 6 विधानसभाओं पर काम करने वाले 30–31 लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उस प्रमुख पंजाबी बिरादरी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखता, जिसकी भूमिका तीन विधानसभाओं में निर्णायक है और शेष तीन में जीत-हार का संतुलन तय करती है।
फिर सवाल उठता है कि फरीदाबाद की बल्लभगढ़ विधानसभा से जुड़े एक व्यक्ति को पहले पद देना, जो  फिर उसे हटाकर किसी अन्य  व्यक्ति को वही जिम्मेदारी सौंपना।    पारदर्शिता और राजनीतिक दृष्टि पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उस व्यक्ति को नियुक्त क्यों किया गया और हटाया क्यों गया।  यह सवाल उठाना जरूरी है। 
आज आमजन के मन में यह स्पष्ट प्रश्न है कि क्या फरीदाबाद की राजनीति वाकई कांग्रेस के लिए सही दिशा में चल रही है ? जनता तो चाहती थी और चाहती है कि कांग्रेस की सरकार बने, लेकिन यदि ऐसा नहीं हो सका तो उसके कारण बाहर नहीं, भीतर तलाशने होंगे। सच्चाई यह है कि कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह बाहरी नहीं, बल्कि आपसी फूट और आंतरिक असंतुलन रहा है।
ईश्वर करे कि कांग्रेस के नेता और संगठन इस सच्चाई को समय रहते समझें—क्योंकि आत्मचिंतन के बिना न दिशा सुधरती है, न जनविश्वास लौटता है।

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