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क्या आज हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल खट्टर वास्तव में भाजपा के राजनीतिक चाणक्य साबित हो रहे हैं? घटनाओं की श्रृंखला को देखें तो यह सवाल अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि एक कठोर सच्चाई बनता जा रहा है।
पहले बडकल क्षेत्र से एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दिलवाया गया जिसकी कोई बड़ी राजनीतिक पहचान नहीं थी, फिर भी उसे जीत दिलाई गई। उसके बाद एक पंजाबी नेता को राज्यसभा तक पहुँचाने की रणनीति भी सफल रही। यह दर्शाता है कि भाजपा पंजाबी वर्ग को साधने की राजनीति योजनाबद्ध ढंग से कर रही है।
इसके विपरीत Indian National Congress हरियाणा में बार-बार ऐसी भूल करती दिखाई देती है जो अपने ही जनाधार को कमजोर करती है। हरियाणा लोकसभा से कांग्रेस के दलित समाज से दो अत्यंत प्रभावशाली लोकसभा नेता मौजूद हैं, जिन्होंने वर्षों तक समाज का नेतृत्व किया है, फिर भी निर्णयों में वह संतुलन दिखाई नहीं देता जिसकी राजनीति को आवश्यकता है। वे लगातार अध्यक्ष भी रहे
जब लगभग 1500 करोड़ रुपये की परियोजना—सैनिक कॉलोनी से लेकर एक महत्वपूर्ण पुल के निर्माण की—घोषणा हुई, तब बड़खल के विधायक जिस प्रकार केवल पंजाबियों के नाम पर ढोल-नगाड़े बजाकर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रहे थे, वह अपने आप में सोचने का विषय है। क्या वे फरीदाबाद के कांग्रेस के मठाधीश को पूरी तरह ध्वस्त करने की योजना की खुशी मना रहा है यह अब मठाधीशों को सोचना है
यह प्रतीकात्मक प्रसंग भी याद आता है जब मनोहर लाल खट्टर मिठाई का डिब्बा लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास आए और कहा—
“ये राज्यसभा की जीत के लड्डू हैं।”
और उत्तर मिला— “मैं तो राजनीतिज्ञ आदमी हूँ।”
यह केवल एक हल्का संवाद नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक चाल की घोषणा थी जिसमें विरोधी मुस्कुरा रहा था और हम उसकी गहराई समझ नहीं पाए।
आज जब राहुल गांधी देशभर में जिसकी जितनी जाती उतनी भागीदारी संघर्ष, विचार और लोकतंत्र की राजनीति को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, तब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या प्रदेश स्तर पर पंजाबियों पर इतना जुल्म क्यों गुटबाज़ी और तथाकथित “प्राइवेट लिमिटेड” मानसिकता उनके उस संघर्ष को भीतर से कमजोर नहीं कर रही?
भाजपा बार-बार कहती है कि 2047 तक कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा।
प्रश्न यह है—क्या हम अपनी ही गलतियों से इस कथन को सत्य साबित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं?
समय अभी भी है।
जरूरत है गंभीर आत्ममंथन, व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व और दूरदर्शी राजनीतिक निर्णयों की।
क्योंकि इतिहास बहुत निर्मम होता है—
वह यह अवश्य लिखता है कि किसने संघर्ष को मजबूत किया और किसने उसे भीतर से कमजोर किया कांग्रेस को प्यार करने वाला पंजाबी जब किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में जाते हैं तो उनसे पूछा जाता है की पंजाबियों की यह जो दुर्दशा कांग्रेस में है उसके लिए कौन जिम्मेवार है कांग्रेस के रणनीतिकार या कांग्रेस का आला कमान जहां नेहरू जी ने सब कुछ फरीदाबाद को दिया खासकर पंजाबी समुदाय को बसाया क्या यह रणनीतिकार नेहरू जी की भी खिलाफ हैअब क्या करें कांग्रेस के पंजाबी नेता आप क्या करें यह सवाल अब उनसे है क्या भाजपा ही उनकी दिए सर्वश्रेष्ठ पार्टी होगी यह तो उन पंजाबी नेताओं को सोचना है

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