गुरुग्राम में 190 करोड़ रुपए के कथित जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शमशाद सैफी को कोर्ट सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) मनीष कुमार की कोर्ट ने पाया कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस विभाग आरोपी के खिलाफ कोर्ट में ठोस सबूत या गवाह पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल विभाग के दावों या गिरफ्तारी के आधार पर किसी व्यक्ति पर आरोप तय नहीं किए जा सकते। यह मामला गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस (जीडीडीआई) की गुरुग्राम जोनल यूनिट द्वारा दर्ज कराया गया था। विभाग ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी मोहम्मद शमशाद सैफी पर आरोप लगाया था कि वह देशभर में फर्जी और गैर-मौजूद कंपनियां बनाने के सिंडिकेट में शामिल था।
शिकायत के अनुसार, मैसर्स टेक्नो इलेक्ट्रिकल एंड सेल्स और मैसर्स लता सेल्स जैसी फर्जी फर्म बनाई गईं, जिनका उद्देश्य बिना किसी माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के केवल गुड्स-लेस इनवॉइस (फर्जी बिल) जारी करना था।
इन जाली बिलों के माध्यम से विभिन्न संस्थाओं को लगभग 190 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) अवैध रूप से ट्रांसफर कर सरकार को भारी वित्तीय चपत लगाने का आरोप था।
इस मामले में आरोपी को 9 अक्टूबर 2020 को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि विभाग ने शुरुआत में जितने गंभीर दावे किए थे, वह उन्हें कानूनी रूप से साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।

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