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जालंधर ,18 अक्टूबर।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने पुरानी पेंशन बहाली, 8वें पे कमीशन की सिफारिशें निर्धारित समय पर देने, ठेका संविदा, आउटसोर्स, एनएचएम कर्मियों को रेगुलर करने बकाया डीए / डीआर का भुगतान करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर 12 दिसंबर को रामलीला मैदान दिल्ली में राष्ट्रीय कर्मचारी आक्रोश रैली करने का ऐलान किया है। रैली की तैयारियों को लेकर रविवार को पंजाब सबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन (वैज्ञानिक) के बैनर तले देशभक्त यादगार हॉल जालंधर में जोनल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा भी पहुंचे और संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे राज्य अध्यक्ष गगनदीप सिंह भुल्लर ने कहा कि आक्रोश रैली में पंजाब से हजारों की संख्या में कर्मचारी दिल्ली पहुंचेंगे। जरनल सेकेट्री एनडी तिवारी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवप्रीत सिंह बल्ली ने कहा कि रैली की तैयारियों को लेकर 25 अक्टूबर को बठिंडा और 14 नवंबर को चंडीगढ़ में कर्मचारियों की जोनल मीटिंग होगी और उसके बाद सभी विभागों के कर्मचारियों से सीधा संपर्क करने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। बैठक में पंजाब पेंशनर्स एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष सुरजीत सिंह गगड़ा में मौजूद थे। सम्मेलन में पंजाब सरकार के खिलाफ सांझा मोर्चा द्वारा 21-22 के सामूहिक अवकाश में बढ़-चढ़कर शामिल होने का फैसला किया।
कर्मचारियों को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने दावा किया कि आक्रोश रैली ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व सफलता। रैली को लेकर सभी राज्यों में तैयारियां जोर पकड़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। पुरानी पेंशन बहाली, ठेका-संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को निर्धारित समय में लागू करने और सरकारी विभागों में खाली पड़े करोड़ों पदों को स्थायी भर्ती से भरने सहित ज्वलंत मांगों को लेकर कर्मचारी अब निर्णायक संघर्ष की तैयारी में हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने पर प्रतिबंधित करने के फैसले की घोर निन्दा की और फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए एक्ट, एनपीएस और यूपीएस को रद्द कर पुरानी पेंशन बहाल करना, जनवरी 2026 से मूल वेतन का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम 5 हजार रुपये अंतरिम राहत देना, ठेका-संविदा प्रथा पर रोक लगाकर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करना, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण एवं सरकारी विभागों की डाउन साइजिंग रोकना और 18 माह के बकाया डीए / डीआर का ब्याज सहित भुगतान करना प्रमुख मांगें हैं।
श्री लांबा ने कहा कि रैली में पेंशन वैलीडेशन एक्ट रद्द करने, पेंशनर्स को 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पर मूल पेंशन में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी देने, कर्मचारियों-पेंशनर्स एवं उनके आश्रितों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा ट्रेड यूनियन एवं लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमलों को बंद करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन और ज्ञापनों के बावजूद सरकारें कर्मचारियों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी कर रही हैं। अब देशभर के कर्मचारी 12 दिसंबर को दिल्ली में एकजुट होकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएंगे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान की रैली से आगामी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की दिशा भी तय की जाएगी।
जोनल सम्मेलन को राज्य कमेटी और विभिन्न विभागीय संगठनों के वरिष्ठ नेता गुलजार खान, विकास कुमार,सोम सिंह, अमरेंद्र मान, गुरविंदर कौर, चरणजीत सिंह सिद्धू, कमलजीत सिंह आदि ने संबोधित किया।

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