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फरीदाबाद। माथे पर सिंदूर और गले में मंगलसूत्र... सामने पति भी जिंदा खड़ा है। फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में तरुण की मौत हो चुकी है।
अब वही तरुण अपने जिंदा होने का सबूत लेकर छह महीने से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन परिवार पहचान पत्र में दर्ज ‘
मौत’ उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में जिंदगी नहीं दिला पा रही।
समाधान की उम्मीद में सोमवार को प्रीति और तरुण फिर जिला स्तरीय समाधान शिविर पहुंचे। घंटों इंतजार के बाद जब नंबर आया तो शिविर का समय ही खत्म हो गया। अधिकारियों ने उन्हें एक बार फिर 11 नंबर कमरे में भेज दिया। वहां काउंटर खाली पड़ा था। आखिरकार मायूस दंपती को घर लौटना पड़ा।
प्रीति के मुताबिक, करीब छह महीने पहले उन्हें पता चला कि परिवार पहचान पत्र में उनके पति तरुण को मृत दिखा दिया गया है। इसके बाद से दोनों इस गलती को ठीक कराने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

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