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नूंह,21 जुलाई।
नूंह व गुरुग्राम में वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस के खिलाफ सोमवार को नूंह डिवीजन के समक्ष हजारों बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा व मजदूरों के प्रतिनिधियों और बिजली उपभोक्ताओं की एक विशाल संयुक्त रैली आयोजित की गई। जिसमें समानांतर लाइसेंस,एग्री डिस्कॉम व स्मार्ट मीटरिंग का जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन के सेकेट्री को संबोधित ज्ञापन कार्यकारी अभियंता कुलदीप यादव को सौंपा गया, जिसमें समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में आयोग द्वारा गठित तथाकथित विशेषज्ञ समिति को भी तत्काल भंग करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह समिति मनमाने एवं असंवैधानिक तरीके से गठित की गई है तथा इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक मामले में निष्पक्ष निर्णय लेने की आवश्यक विश्वसनीयता और निष्पक्षता से वंचित है। समानांतर लाइसेंस के खिलाफ मंगलवार को गुरुग्राम में बिजली कर्मियों और उपभोक्ताओं का विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संधर्ष मंच की 13 सदस्यीय
जिला कमेटी का गठन किया गया। उल्लेखनीय है कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नूंह व गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाईसेंस देने की याचिका हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन दायर की है। जिसका बिजली कर्मचारियों व इंजीनियर्स के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा व उपभोक्ता विरोध कर रहे हैं।
सोमवार को नूंह डिवीजन में आयोजित रैली/ प्रदर्शन को मुख्य रूप से ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के उपाध्यक्ष सुभाष लाम्बा, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविन्द्र घणघस, ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी,एचएसईबी वर्कर यूनियन के मुख्य संगठनकर्ता विनोद शर्मा,व डिप्टी जरनल सेकेट्री विजय हुड्डा, पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन (एससी / एसटी) के राज्य प्रधान बिजेंद्र बराड़ व बिजेंद्र भाटिया, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुमित दलाल व जोगेन्दर नैन आदि नेताओं ने संबोधित किया। प्रोग्राम की अध्यक्षता राजेश शर्मा व सुबोध जाखड़ आदि ने की। संचालन ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के उप प्रधान जितेन्द्र तेवतिया ने किया। इस अवसर पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि निजी कंपनियों को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था कमजोर होगी, आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी तथा अंततः बिजली क्षेत्र के निजीकरण
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए के ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे व इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि यदि निजी कंपनियों को सार्वजनिक वितरण नेटवर्क का उपयोग करते
हुए केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति दी गई तो इससे राज्य के सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे और किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है, इसे निजी लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि विद्युत अधिनियम किसी भी उपभोक्ता के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता तथा सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर एकाधिक वितरण लाइसेंसधारियों की व्यवस्था सार्वभौमिक एवं समान विद्युत आपूर्ति के सिद्धांतों के विपरीत है। रैली में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा। उन्होंने पुनः दोहराया कि वह सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की रक्षा तथा सभी उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा। प्रदर्शन में बिजली कर्मियों के नेता सुदाम पाल,सरोज दहिया, संजीव ढांडा व सामून खां,सुनील चौहान, करतार सिंह जागलान, कृष्ण कुमार,लेखराज, उस्मान, योगराज दीक्षित, राजेश कुमार, महेंद्र सिंह,इजाहर, सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव जय कुमार दहिया, राकेश कुमार आदि मौजूद थे।
हुए केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति दी गई तो इससे राज्य के सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे और किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है, इसे निजी लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि विद्युत अधिनियम किसी भी उपभोक्ता के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता तथा सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर एकाधिक वितरण लाइसेंसधारियों की व्यवस्था सार्वभौमिक एवं समान विद्युत आपूर्ति के सिद्धांतों के विपरीत है। रैली में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा। उन्होंने पुनः दोहराया कि वह सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की रक्षा तथा सभी उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा। प्रदर्शन में बिजली कर्मियों के नेता सुदाम पाल,सरोज दहिया, संजीव ढांडा व सामून खां,सुनील चौहान, करतार सिंह जागलान, कृष्ण कुमार,लेखराज, उस्मान, योगराज दीक्षित, राजेश कुमार, महेंद्र सिंह,इजाहर, सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव जय कुमार दहिया, राकेश कुमार आदि मौजूद थे।

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