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फरीदाबाद, 2 जुलाई। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा है कि देशभर में बढ़ती महंगाई और आवास की लगातार बढ़ती लागत ने सरकारी कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता (एचआरए) स
हित सभी भत्तों का पुनरीक्षण वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और वास्तविक जीवन-यापन की लागत के आधार पर करना चाहिए।
श्री लांबा ने कहा कि महासंघ द्वारा आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को प्रस्तुत ज्ञापन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि वर्तमान एचआरए व्यवस्था अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है। महानगरों, बड़े शहरों और यहां तक कि छोटे शहरों में भी मकानों के किराए में पिछले वर्षों के दौरान अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जबकि कर्मचारियों को मिलने वाला एचआरए वास्तविक किराया व्यय की भरपाई करने में असमर्थ है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव निम्न एवं मध्यम वेतन वर्ग के कर्मचारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि महासंघ ने आयोग से मांग की है कि 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में एचआरए मूल वेतन का 40 प्रतिशत, 5 लाख से 50 लाख आबादी वाले शहरों में 35 प्रतिशत तथा 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 30 प्रतिशत निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही एचआरए को महंगाई भत्ते (डीए) से जोड़ा जाए तथा शहरों के वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा की जाए, ताकि कर्मचारियों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप वास्तविक राहत मिलती रहे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि महंगाई भत्ते की वर्तमान गणना प्रणाली में भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। डीए की गणना ऐसी प्रणाली से होनी चाहिए जो वास्तविक बाजार मूल्य वृद्धि को प्रतिबिंबित करे। महासंघ ने सुझाव दिया है कि 12 माह के औसत के स्थान पर 3 या 6 माह की औसत अवधि के आधार पर डीए निर्धारित किया जाए तथा 'पॉइंट-टू-पॉइंट' गणना प्रणाली अपनाई जाए, जिससे कर्मचारियों को महंगाई की समय पर और पूर्ण भरपाई मिल सके। साथ ही जब डीए 25 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचे तो उसे मूल वेतन एवं पेंशन में विलय करने पर भी विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि परिवहन भत्ता, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता भी वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गए हैं। ईंधन, सार्वजनिक परिवहन, होटल और यात्रा व्यय में कई गुना वृद्धि हो चुकी है, जबकि भत्तों की दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। महासंघ ने इन भत्तों में पर्याप्त वृद्धि करने तथा उन्हें महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है ताकि भविष्य में उनका स्वतः संशोधन होता रहे।
श्री लांबा ने कहा कि बच्चों की शिक्षा भत्ता, छात्रावास अनुदान, जोखिम भत्ता, रात्रि ड्यूटी भत्ता, धुलाई भत्ता, प्रतिनियुक्ति भत्ता, ओवरटाइम भत्ता तथा अन्य सेवा संबंधी भत्तों का भी व्यापक पुनरीक्षण किया जाना चाहिए। बच्चों की शिक्षा भत्ता को उच्च शिक्षा तक विस्तारित करते हुए प्रति बच्चा ₹10,000 प्रतिमाह किया जाए तथा इसे महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए। इसी प्रकार कठिन एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों को उचित प्रतिपूरक भत्ते दिए जाने चाहिए।

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