फरीदाबाद से होकर गुजरने वाली आगरा और गुरुग्राम नहर कभी सिंचाई के मुख्य साधनों में गिना जाता था, लेकिन अब ये 'डेथ कॉरिडोर' बनती जा रही है। बीते चार वर्षों में इन दोनों नहरों में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कभी आत्महत्या, कभी हादसा और कभी संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
लगभग हर सप्ताह नहर में कूदने या डूबने का कोई नया मामला सामने आ रहा है, जिससे पुलिस और प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2022 से अब तक आगरा और गुरुग्राम नहर में डूबने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में सेक्टर-17 पुल से एक डॉक्टर ने कथित तौर पर पारिवारिक विवाद के बाद नहर में छलांग लगा दी थी।
वहीं 12 और 16 जुलाई को भी नहर में कूदने और डूबने से तीन लोगों की मौत हुई। इससे पहले भी 2022, 2023, 2024 और 2025 में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

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