हरियाणा में सरकार पटवार सर्किलों का रिस्ट्रक्चरिंग करेगी। इसको लेकर सरकार की ओर से भी जिलों के डीसी को ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत अब रकबे के आधार पर नहीं, कार्यभार और आबाादी के आधार पर पटवारी के क्षेत्र का निर्धारण होगा।
अब तक पटवार सर्किलों का गठन मुख्य रूप से भूमि क्षेत्र (AN) के आधार पर होता था। सरकार का कहना है कि तेजी से शहरीकरण, म्यूटेशन मामलों में वृद्धि, डिजिटल फसल सर्वे, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक कार्यों के कारण पटवारियों का कार्यभार काफी बढ़ गया है, इसलिए अब केवल जमीन के रकबे की बजाय कार्यभार आधारित मॉडल अपनाया जाएगा।
सामान्यतः एक पटवार सर्किल में लगभग 2000 एकड़ कृषि योग्य भूमि होगी। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यह सीमा 1500 से 2500 एकड़ तक हो सकती है।
प्रत्येक पटवार सर्किल में संबंधित राजस्व एस्टेट की अबादी देह भी शामिल होगी। 2025 के नए हरियाणा आबादी देह अधिनियम को ध्यान में रखकर सर्किल बनाए जाएंगे।
जिन क्षेत्रों में आबादी अधिक है और लोगों से संबंधित काम ज्यादा हैं, वहां छोटे पटवार सर्किल बनाए जा सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में कृषि भूमि का क्षेत्रफल 1500 एकड़ तक सीमित रखा जा सकता है। जहां आबादी कम है, वहां एक पटवारी के अधीन 2500 एकड़ तक भूमि रखी जा सकती है।

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