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भिवानी,26 मई।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने कर्मचारियों, पेंशनरों, शिक्षकों, संविदा कर्मियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, सार्वजनिक सेवाओं, शिक्षा तथा संविधान की मूल भावना की रक्षा का व्यापक जनआंदोलन बनेगा। देशभर में व्यापक अभियान चलाने के बाद 12 दिसम्बर को रामलीला मैदान दिल्ली में ऐतिहासिक रैली होगी। जिसमें निर्णायक आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने यह ऐलान मंगलवार को जाट धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में किया। उन्होंने सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के चल रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया और कहा कि हरियाणा सरकार के सामने एचकेआरएन व अन्य सभी प्रकार के ठेका व पार्ट टाइम कर्मियों को पक्का करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। सरकार की नीयत में खोट के कारण ठेका कर्मी पक्के नही हो हो पा रहें हैं। उन्होंने एचकेआरएन के 58 साल तक ठेका कर्मियों को कच्चा रखने की पक्की गारंटी बताया। उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि ऐसा होने से मंहगाई को पंख लग गए हैं और आसमां छूने लगी है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने ही निर्धारित न्यूनतम वेतन लागू करवाने में विफल रही है। उन्होंने राज्य में चल रही ग्रामीण सफाई कर्मियों की हड़ताल का भी समर्थन किया। पत्रकार वार्ता लांबा के साथ हरियाणा रोड़वेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान नरेंद्र दनौद, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के महासचिव रत्न जिंदल, एसकेएस के जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य,जिला सचिव धर्मबीर भाटी,ब्लॉक प्रधान अशोक गोयत,राज्य सचिव अशोक पिलानिया,राज्य सचिव पुरुषोत्तम दानव,सत्यवीर स्वामी,देवेंद्र श्योरान,फायर ब्रिगेड के जिला प्रधान अजय श्योरान,सचिव नरेन्द्र आदि मौजूद थे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष लांबा ने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगों में संविदा, आउटसोर्स एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण, रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्तियां, समान कार्य के लिए समान वेतन, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, पांच हजार रुपए अंतरिम राहत,श्रम संहिताओं की वापसी, एनईपी व टैट की अनिवार्यता वापस,नीजीकरण पर रोक, समयबद्ध वेतन पुनरीक्षण, लंबित डीए / डीआर जारी करने तथा व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
लांबा ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्मचारियों और पेंशनरों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी कर रही है। सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं, संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण बढ़ा है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र और जनसेवाओं को कमजोर करने वाली नीतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, “देश की प्रशासनिक और विकासात्मक व्यवस्था कर्मचारियों के कंधों पर चलती है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि उन्हीं कर्मचारियों के अधिकारों और भविष्य को लगातार असुरक्षित बनाया जा रहा है। हमारा संघर्ष केवल वेतन और सेवा शर्तों का नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र और जन सेवाओं को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के तहत 12 दिसम्बर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल राष्ट्रीय रैली आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें देशभर से लाखों कर्मचारी, शिक्षक, पेंशनर और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। महासंघ का मानना है कि यह रैली कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि इस राष्ट्रीय रैली की सफलता सुनिश्चित
करने के लिए पूरे देश में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत राज्यों और जिलों में चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
करने के लिए पूरे देश में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत राज्यों और जिलों में चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान निम्न प्रकार चलेगा
• 30 जून 2026 तक कार्यालयों और विद्यालयों में बैनर, होर्डिंग और पोस्टर लगाकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
• विभिन्न भाषाओं में प्रचार सामग्री और पुस्तिकाओं का वितरण किया जाएगा।
• मई 2026 में राज्य स्तरीय कमेटियों की बैठकें आयोजित होंगी।
• जुलाई 2026 में जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राष्ट्रीय नेतृत्व भाग लेगा।
• अगस्त–सितम्बर 2026 में गेट मीटिंग और क्षेत्रीय सभाओं के माध्यम से कर्मचारियों के बीच व्यापक संपर्क अभियान चलाया जाएगा।
• अक्टूबर–नवंबर 2026 में संस्थान स्तर पर व्यापक जनअभियान और लामबंदी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


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