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ठेका कर्मियों को रेगुलर करने में कोई कानून अड़चन नहीं, सरकार की नीयत में खोट : सुभाष लांबा

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 23 April 2026 0 comments
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 चंडीगढ़,23 अप्रैल।


अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा बुधवार को अग्निशमन विभाग के पंचकूला में बैठे हड़ताली कर्मचारियों के चंडीगढ़ पंचकूला में चल रहे धरने पर पहुंचे और हड़ताल तथा मांगों का पुरजोर समर्थन किया। धरने पर पंजाब

सबोर्डिनेट सर्विस फेडरेशन वैज्ञानिक के नेता चरणजीत सिंह सिद्धू,सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान विजय पाल व नगरपालिका कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जोगिंदर सिंह भी पहुंचे और हड़ताल का समर्थन किया। धरने पर अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान आंनद कुमार, रोशन लाल, दलजीत, सत्यापन, मोहित मलिक व अनिल कुमार आदि पदाधिकारी मौजूद थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए सरकार के हड़ताल को लेकर बरतें जा रहे घोर उदासीनता पूर्ण रवैए की घोर निन्दा की।  उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल से राज्य में लगभग शत-प्रतिशत अग्निशमन विभाग के के कर्मचारी अपनी अत्यंत जायज़ मांगों जैसे अग्निकांड में अकाल मृत्यु का शिकार हुए दोनों कर्मियों की शहीद का दर्जा और मृतक आश्रितों को नौकरी और एक एक करोड़ आर्थिक सहायता और ठेका कर्मियों को रेगुलर करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि भीष्म गर्मी का सीजन होने का कारण आगजनी की घटनाओं की बढ़ोत्तरी के बावजूद सरकार हड़ताल को समाप्त करवाने को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। जिसके कारण हड़ताल लंबी खिंचती जा रही है।

लांबा ने हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ठेका कर्मचारियों को रेगुलर करने में काई कानूनी अड़चन नहीं है, सरकार की नीयत में खोट है, जिसके कारण लाखों ठेका कर्मचारी पक्के नही हो पा रहे हैं। उन्होंने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों, विश्वविद्यालयों और केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कीमों में कार्यरत सभी कर्मचारियों को एकजुट होकर रेगुलराइजेशन के लिए निर्णायक आंदोलन का निर्माण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के निरंतर किए आंदोलन के कारण ही 16 व 18 जून,2014 को पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सरकार द्वारा बनाई गई थी। लेकिन सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने पालिसियों के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर केस की मजबूत पैरवी नहीं की गई। जिसके कारण सन् 2018 उक्त पालिसी हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने पालिसी रद्द होने के कारण प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने के लिए दबाव बनाया और सरकार विधानसभा में बिल लाने को तैयार हुई थी, लेकिन अंतिम समय में सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर किया। अब 17 अप्रैल को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी दोनों रेगुलराइजेशन पालिसियों को वैध बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार 23 व 31 दिसंबर, 2025 को माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को यह कहकर टाल रही थी ‌कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही इस बारे फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब ठेका कर्मचारियों को पक्का करने में कोई भी कानूनी अड़चन नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी कोई अड़चन नहीं थी, केवल सरकार की नीयत में खोट होने के कारण लाखों ठेका कर्मचारी रेगुलर होने से वंचित हैं।

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