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आर डब्ल्यू ए ‌ प्रोग्रेसिव सेक्टर 2 फरीदाबाद ने‌ भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 14 April 2026 0 comments
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 फरीदाबाद 14 अप्रैल आर डब्ल्यू ए ‌ प्रोग्रेसिव रजिस्टर नंबर 02044‌ सेक्टर 2 फरीदाबाद  ने‌ आज ‌ संविधान के ‌ निर्माता बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई ।‌ सेक्टर 2 के सभी ‌ वरिष्ठ नागरिकों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके ‌ पुष्पांजलि अर्पित की । इस ‌ कार्यक्रम की अध्यक्षता चैयरमेन  हो राम जी दरोगा  ने की । जबकि सभा का संचालन महासचिव ‌ वीरें


द्र सिंह डंगवाल ने किया। ‌ इस अवसर पर आर डब्ल्यू ए के ‌ प्रधान जगदीश  अधाना, कोषाध्यक्ष एस पी ‌ त्यागी, ‌ वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शर्मा, ‌   के अलावा ओम प्रकाश, ‌  हरिओम गुप्ता, ‌ योगेंद्र मिश्रा, ‌ देवेंद्रसिंह, ‌ नकुल शर्मा, ‌ पवन ओमप्रकाश  ‌ बैंक मैनेजर रिटायर  उपस्थित रहे।   महासचिव  ने बताया ‌कि ‌ भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और समानता के प्रतीक बाबा साहेब की जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है। यह दिन हमें उनके द्वारा समाज में शिक्षा, न्याय और समानता के लिए किए गए संघर्षो की याद करने का अवसर देता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महूं छावनी क्षेत्र में हुआ था उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा महाराष्ट्र के सतारा में और माध्यमिक शिक्षा मुंबई के एलफिस्टन हाई स्कूल से पूरी की थी। उनकी कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए बड़ौदा के महाराजा सायाजी राव गायकवाड़ तृतीय ने उन्हें 1913 में अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजा था। वहां से कानून की शिक्षा प्राप्त करके बाबा साहब भारत आए। उनके पास 32 डिग्रियां थी।  उनको 31 मार्च 1990 को‌ ‌ 

मरणोउपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया था। भारतीय संविधान को लिखने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे थे। यह ऐतिहासिक ‌ ‌‌ शुरुआत 9 दिसंबर 1946 को शुरू हुई थी। 26 नवंबर 1949 को पूरी हुई। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को इसको लागू किया गया। उन्हें 1947 में संविधान मसौदे समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे। उन्हीं की देन है। कि हमारे देश में दुनियां का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। हमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के द्वारा बताए गए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। ‌ उनका नारा था। शिक्षित बनो, संगठित रहो, और संघर्ष करो।

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