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फरीदाबाद 15 अप्रैल - फरीदाबाद में मजदूर आंदोलन पर दमनकारी नीतियों को अपनाने के विरोध में कल 16 अप्रैल को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू के सैकड़ो श्रमिक जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर, और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने संयुक्त रूप से दी। उन्होंने बताया कि न्यूनतम वेतन में वृद्धि करने डबल ओवर टाइम देने मजदूरों को कारखाने में सुरक्षा प्रदान करने सहित अन्य मांगों को लेकर जब श्रमिक आंदोलन करते है। तब मालिक उनकी मांगों का समाधान नहीं करते हैं। कारखाने में लगातार 10
से लेकर 14 घंटे तक काम करना पड़ता है। काम के दौरान दुर्घटनाएं होती हैं। लेकिन उन्हें कोई मुआवजा तक नहीं मिलता। जब से खाड़ी का युद्ध शुरू हुआ है। तब से उन्हें रसोई गैस नहीं मिल रही है। पहले 5 किलो का सिलेंडर 1500 में भर जाता था। अब चार से पांच हजार रुपए में गैस भरी जाती है। जिन घरों में मजदूर किराए पर रहते हैं। मालिकों ने उनका किराया बढ़ा दिया। महंगाई बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। सीजनल सब्जियां महंगी हो रही है। इन हालातो में जब मजदूर वेतन में बढ़ोतरी की मांग करता है। और आंदोलन पर उतरता है। तब फैक्ट्री के मालिक प्रशासन से मिलकर मजदूरों का दमन और उत्पीड़न तथा लाठीचार्ज तक करवा देते हैं। फरीदाबाद में सेक्टर 37 में मदरसन फैक्ट्री के श्रमिकों ने 13 -14 अप्रैल को हरियाणा सरकार द्वारा 8 अप्रैल को 15220 की न्यूनतम वेतन में की गई बढ़ोतरी को ना काफी बताया। उनका कहना था। कि उनको फिलहाल 18000 से अधिक वेतन मिलता है। नेताओं ने बताया कि हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। जहां लाखों की संख्या में मजदूर हैं। कायदे से एनसीआर का वेतन एक जैसा होना चाहिए। दिल्ली में 18000 रुपए से ऊपर न्यूनतम वेतन है। जबकि हरियाणा में यह मार्च तक केवल 11274 था। नियम अनुसार हरियाणा में 2020 में वेतन रिवाइज होना चाहिए था। जो भाजपा की सरकार ने नहीं किया। सीटू और अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा किए गए आंदोलन के चलते पिछले साल 2025 में न्यूनतम में वेतन में वृद्धि करने के लिए कमेटी बनाई गई। जिसमें मजदूरों ,मालिकों व सरकार के प्रतिनिधि थे ।इस कमेटी की 9 बैठक हुई। उन बैठक में कमेटी ने ₹30000 न्यूनतम वेतन की मांग की थी। लेकिन कमेटी ने 29 दिसंबर 2025 की पानीपत की बैठक में 23196 का । सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया। परंतु सरकार ने स्वीकार नहीं किया। और 2 मार्च के बजट भाषण में 15220 रूपए न्यूनतम वेतन देने की घोषणा कर दी गई और इसका कोई नोटिफिकेशन भी नहीं किया। महंगाई की मार झेल रहे मजदूरों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में मानेसर में ऑटोमोबाइल कंपनियां, गारमेंट्स सहित 10 दोनों कंपनियों के हजारों मजदूरों ने शांतिपूर्वक आंदोलन किया। तब सरकार ने इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में बहुत सारे कारखाने हैं। जहां मजदूरों को पहले घोषित न्यूनतम वेतन नहीं मिलता। उनका ई एस आई और पी एफ नहीं काटा जाता है। उन्हें त्योहारों पर छुट्टियां नहीं मिलती हैं। फैक्ट्री के अंदर शौचालय नहीं है। महिला कर्मियों के लिए अलग से शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है। कैंटीन है। लेकिन ठेका और कैजुअल । श्रमिकों कंपनी परिसर में बनी कैंटीन में खाने की सुविधा नहीं दी जाती है। आने जाने के लिए यातायात भट्ट नहीं मिलता है। काम करते हुए दुर्घटना होने पर मुआवजा प्रदान नहीं किया जाता है। अधिकांश कारखाने में श्रमिकों को आई कार्ड और अपॉइंटमेंट लेटर भी नहीं दिए गए हैं। इन्हीं मांगों को लेकर मदरसन फैक्ट्री, विनायक आयुर्वेदिक फैक्ट्री सेक्टर 31 और 24 - 25 सेक्टर के श्रमिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। जिला सचिव ने बताया कि कल 14 अप्रैल को मदर्सन ग्रुप के संघर्षरत वर्करों पर दमनात्मक कार्रवाई की गई है। सीटू इसका डटकर विरोध करती है। कल सरकार को न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने मानेसर में गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा करने, डबल ओवर टाइम करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, लेबर कोड्स को रद्द करने करने की मांगो को जोरदार ढंग से उठाया जाएगा। कल के प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए आज भारत गैयर लिमिटेड , बदरपुर बॉर्डर पर ऑटो रिक्शा यूनियन ने अपने श्रमिकों को हैंड बिल वितरित किए। इस मौके पर बीजीएल के प्रधान रवि, सचिव मनोज, कोषाध्यक्ष प्रेम, ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान भोपाल सिंह विशेष रूप से उपस्थितरहे।

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