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फरीदाबाद में दिखी हिन्दू समाज की एकता और सामाजिक समरसता की मिसाल

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 8 March 2026 0 comments
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 फरीदाबाद, 8 मार्च 2026। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर फरीदाबाद के विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को आयोजित भव्य एवं विराट हिन्दू सम्मेलनों में हिंदू समाज की एकता और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। दयानंद नगर, सरस्वती बस्ती–सूर्य नगर, सेक्टर-11 तथा अशोका एंक्लेव सेक्टर-35 सहित कई स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों में हजारों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मातृशक्ति द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्राएं और विभिन्न क्षेत्रों में निकली शोभा यात्राएं इन आयोजनों का प्रमुख आकर्षण रहीं, जिससे पूरे शहर में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का वातावरण देखने को मिला।


दयानंद नगर में कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ

दयानंद नगर, सेक्टर 7A, 7C एवं 8 में एकता पार्क, पीपलेश्वर महादेव मंदिर पार्क और जनकल्याण मंदिर धर्मशाला में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन की शुरुआत सुबह 8:30 बजे मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा से हुई। इसके बाद सामूहिक हवन, मंच कार्यक्रम और वक्ताओं के उद्बोधन हुए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री रासबिहारी जी (विश्व हिन्दू परिषद) ने कहा कि
“हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता है। जब समाज संगठित होकर अपने संस्कार और परंपराओं को आगे बढ़ाता है, तब राष्ट्र भी मजबूत बनता है।”

डॉ. प्रदीप जी (महानगर सहकार्यवाह, फरीदाबाद पूर्व) ने कहा कि
“आज के समय में परिवार और समाज में संस्कारों को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना ही समाज की वास्तविक शक्ति है।”

श्री विजय जी (त्रिक्षेत्र संगठन मंत्री, संस्कार भारती) ने कहा कि
“भारतीय संस्कृति और कला समाज को जोड़ने का माध्यम हैं। जब संस्कृति मजबूत होती है तो समाज में एकता और सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आता है।”

महंत श्री मुनिराज जी महाराज (ब्रज धाम सिद्ध पीठाधीश्वर) ने कहा कि
“सनातन संस्कृति केवल आस्था नहीं बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति है, जो समाज में सद्भाव और नैतिकता को मजबूत करती है।”

सरस्वती बस्ती–सूर्य नगर में भी हुआ सम्मेलन

जगदम्बा गार्डन, सरस्वती बस्ती–सूर्य नगर में भी विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और वक्ताओं के उद्बोधन हुए।
मुख्य अतिथि आचार्य अरुण कृष्ण जी महाराज, संस्थापक श्री कृष्ण सनातन सेवा ट्रस्ट, ने कहा कि
“हिंदू समाज को संगठित और जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है। हमें अपने बच्चों को धर्म, संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जोड़ना होगा ताकि समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत बन सकें।”

सेक्टर-11 में विशाल हिन्दू सम्मेलन

राधा कृष्ण मंदिर, सर छोटूराम पार्क सेक्टर-11 में आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन की शुरुआत सुबह 9:45 बजे सामूहिक हवन से हुई। इसके बाद मातृशक्ति द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई और मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर श्री राधे राधे भैया जी महाराज ने कहा कि
“हिंदुओं को जोड़ने की शुरुआत घर से करनी होगी। संबंधों की मर्यादा और परिवार के संस्कार ही भारतीय संस्कृति की पहचान हैं।”

मुख्य वक्ता डॉ. पवन मलिक ने कहा कि
“राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए परिवर्तन की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से करनी होगी। समाज सेवा के कार्यों में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।”

इस अवसर पर ब्रहमकुमारी बहन ज्योति, मोनिका गुप्ता, डॉ. बालकिशन गुप्ता, अनुराग अग्रवाल, सरदार गुरुसरण सिंह, हर्ष गिल और देवेंद्र मान ने भी अपने विचार रखते हुए हिंदू समाज की एकजुटता और समाज परिवर्तन के लिए ‘पंच परिवर्तन’ के संकल्प की प्रेरणा दी।

अशोका एंक्लेव में शोभा यात्रा के साथ सम्मेलन

अशोका एंक्लेव सेक्टर-35 के सेंट्रल पार्क में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन की शुरुआत शोभा यात्रा से हुई, जिसमें क्षेत्र के लोगों ने जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं जीवन दीप आश्रम के स्वामी श्री यतींद्रानंद गिरि जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात अतिथियों के सम्मान और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ।


अपने संबोधन में स्वामी यतींद्रानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि
“इस सृष्टि में धर्म एक ही है, पूजा पद्धतियां अलग-अलग हो सकती हैं। संगठित हिंदू ही इस देश को पुनः विश्वगुरु के स्थान पर स्थापित कर सकता है।”

उन्होंने हिंदू समाज को शास्त्र (ज्ञान और धर्मग्रंथों की शिक्षा) और शस्त्र (आत्मरक्षा और साहस) दोनों के महत्व को समझते हुए संगठित रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर मानव मंदिर मिशन की संचालिका समता श्री माता जी ने कहा कि
“हिंदुओं को जोड़ने की शुरुआत घर से करनी होगी। संबंधों की मर्यादा निभाना ही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन

सभी स्थानों पर आयोजित सम्मेलनों में सांस्कृतिक गीत, भजन, राष्ट्रगीत और समाज जागरूकता से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रमों में उपस्थित लोगों ने हिंदू समाज की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का संकल्प लिया।

कार्यक्रमों का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और श्रद्धालुओं ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि इन आयोजनों में हिंदू समाज की एकता और सामाजिक समरसता की सच्ची झलक देखने को मिली, जो समाज को एक नई दिशा देने वाला संदेश है।

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