पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़
ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की घरेलू और व्यावसायिक रसोई गैस आपूर्ति पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने उपभोक्ताओं के बीच घबराहट बढ़ा दी है। यही कारण है कि रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी दोनों अचानक से बढ़ गई है। एक तरफ आम लोग घंटों लाइनों में खड़े हैं, तो दूसरी तरफ उद्योग-धंधे ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं.
उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में स्थिति काफी तनावपूर्ण है, जहां आम लोग और छोटे कारोबारी दोनों ही गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं। दिल्ली के कई हिस्सों में गैस संकट के चलते 'ब्लैक मार्केटिंग' का खुला खेल चल रहा है। जो घरेलू सिलेंडर सामान्य तौर पर 1000 रुपये के आसपास मिलता है, उसे 'दो घंटे में तुरंत डिलीवरी' का लालच देकर 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शादियों के इस सीजन में कैटरिंग संचालकों को गैस न मिलने के कारण मेन्यू में 30 से 40 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि, दिल्ली के कुछ क्षेत्रों, जैसे चिल्ला (पूर्वी दिल्ली) के गोदामों में स्थिति सामान्य बनी हुई है, जहां 5 से 7 मिनट के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा में कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत के कारण 3500 रुपये खर्च करने पर भी गैस नहीं मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में 10 रुपये की चाय 20 रुपये में और 10 रुपये का समोसा 14 रुपये में बिक रहा है। वाराणसी (काशी) की स्थिति और भी गंभीर है, जहां कमर्शियल सप्लाई ठप होने के कारण प्रसिद्ध 'होटल रीजेंसी', पातालपुरी मठ और अपना घर आश्रम जैसे स्थानों पर भोजन बनाने के लिए छतों पर मिट्टी और लकड़ी के चूल्हे बना दिए गए हैं।

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