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दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की सांस्कृतिक संध्या में हरियाणवी नृत्य और कवि सम्मेलन ने खूब बांधा समां

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 18 March 2026 0 comments
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 फरीदाबाद,18 मार्च 2026 - जे.सीबोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयवाईएमसीएफरीदाबा के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘डिजिटल युग में मीडियासमाज और सार्वजनिक विमर्श’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें संगीतमय यो प्रस्तुतिहरियाण


वी लोकनृत्य और कवि सम्मेलन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विवेकानंद सभागार में आयोजित सांस्कृतिक संध्या का विधिवत शुभारंभ मीडिया विद्यार्थी एकलव्य लिक द्वारा गणेश वंदना की भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति से हुआ। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो.राजीव कुमार और कुलसचिव प्रो.अजय रंगा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में पहुंचे कवि विनीत त्रिपाठीयुवा कवि राजपाल और युवा कवि अभिप्राय त्रिपाठी 'नीरवको स्मृति चिन्ह एवं पटका पहनाकर सम्मानित किया गया।
श्री गणेश वंदना के उपरांत निरमयम क्लब द्वारा अदभुत संतुलन की मनमोहक बानगी से भरपूर संगीतमय योग प्रस्तुति देख सभी आश्चर्यचकित हुए। उसके बाद नटराजन क्लब द्वारा "मत छेड़ बलम मेरे चूंदड़ नै.." गीत पर की हरियाणवी लोकनृत्य की मनभावन प्रस्तुति दी। इसके उपरांत आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों के काव्य पाठ में वीर-प्रेम-हास्य-व्यंग्य रस से भरपूर चुटकलों ने वातावरण को नाव मुक्त बना दिया।
कवि विनीत पांडे ने आम जनमानस की दिनचर्या के घटनाक्रम को हास्य-व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत रते हुए खूब हंसाया। उन्होंने ति-पत्नी पर सुनाया... "वो खुद को अमेरिका मुझे ईरान मझती है"; युवाओं की स्थिति को बयां करते हुए  कहा... "वोटर भी जो अभी ना बने है वो प्रे के आस में हैं रोगी" युवा कवि अभिप्राय त्रिपाठी नीरवने 'जे-ज़ीके लिए सुनाया ... "हिम्मत  हारिये -हिम्मत  हारियेमेहनत संवारियेबेचैनियां बहुत हैं बेचैनियां बहुत हैंमन को बुहारियेयुवा कवि राजपा ने वीर रस की कविता ..."भारत मां का हित हो जिसमें मान जरूरी होता हैमाटी की खातिर दिल में सम्मान जरूरी होता है। आए संकट कोई मातृभूमि पर बात ध्यान में रख लेनाकिंतु परंतु से बलिदा जरूरी होता है।उसके बाद उन्होंने प्रेम रस से सराबोर अपनी शेरो-शायरी "जो मिला उसे संभालोकद्र करो उसकी ये टूट कर चाहने वाला दोबारा नहीं मिलतासे उपस्थित श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

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