हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की जांच में 6 अलग-अलग घरों से लिए गए पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। इन सैंपलों में ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है और गंभीर मामलों में जानलेवा
भी साबित हो सकता है।
विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि जिन 6 सैंपलों में बैक्टीरिया मिला, वे घरों के निजी जमीनी टैंकों (कुंडों) से लिए गए थे। विभाग ने एहतियातन इन टैंकों की सफाई करवा दी है। ये सैंपल 6 फरवरी को लिए गए थे। गांव के 110 घरों से लिए गए सैंपलों में से 57 में क्लोरीन की मात्रा कम पाई गई। इसके बाद विभाग ने 18 फरवरी तक 190 ऑर्थोटोलिडीन (OT) टेस्ट कराकर क्लोरीन की जांच की। जांच में सभी सैंपलों में क्लोरीन की उपलब्धता पाई गई।
लोगों के बीमार होने के मामलों में बढ़ोतरी के बाद विभाग ने गांव में कुल 386 सैंपल लिए। इनमें से 176 सैंपल बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के लिए भेजे गए। अब तक 76 सैंपलों की रिपोर्ट आ चुकी है, जिनमें से 9 प्रतिशत (6 सैंपल) में बैक्टीरिया मिला है। शेष 210 सैंपल अभी लैब में जांच के लिए भेजे जाने बाकी हैं। 176 में से शेष 100 सैंपलों की बैक्ट्रोलोजिकल रिपोर्ट लैब से आना शेष है। विभाग ने जो पानी की आपूर्ति हो रही है, उसके भी अमोनिया टेस्ट के 14 व हेवी मेटल के छह सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है।

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