हरियाणा के हकों को लेकर लोकसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से 5 सवाल किए हैं। उन्होंने कहा है कि वे प्रदेश के लोगों को बताना चाहते हैं कि हरियाणा वासियों को मारने का काम केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश की सरकार हरियाणा के हकों पर गूंगी हो जा रही है। केंद्र से डरती है या फिर अपने आकाओं को खुश करने में लगे हुए हैं।
उन्होंने इसके 5 उदाहरण देते हुए कहा कि पहला उदाहरण पानी और राजधानी को लेकर है। SYL के फैसले को लेकर सरकार पैरवी नहीं कर रही है। राजधानी का पता है लेकिन चंडीगढ़ में विधानसभा भी नहीं बना सकते हैं। दूसरा उदाहरण सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर हरियाणा से बाहर चले गए एयरपोर्ट महम में आना था नोएडा चला गया।
हरियाणा में पिछले 11 सालों से बीजेपी की सरकार है, लेकिन अभी तक यहां मेट्रो नहीं आ पाई। दूरदर्शन भी हिसार से बाहर कर दिया गया है। नौकरी ग्रुप A और B में ज्यादातर बाहर के बच्चों को लगाया जा रहा है। HPSC के चेयरमैन भी बाहर के लगाए जा रहे हैं।
चंडीगढ़ में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा, देश में सबसे ज्यादा GST टैक्स कलेक्शन टोल कलेक्शन हरियाणा से हो रही है उसकी एवज में बजट में हरियाणा को कम रखा जाता है। पांचवां उदाहरण खेल है, कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा का चयन करना चाहिए था, लेकिन सहभागिता से ही हरियाणा को रखना चाहिए था। हमारे मुख्यमंत्री कभी कहते हैं कि बिहार से गहरा नाता है कभी पंजाब में सक्रिय हो जातें हैं लेकिन हरियाणा के लोगों के हकों कि बात नहीं करते। 2006 से ओलिंपिक में गए 25 प्रतिशत खिलाड़ी गए और 50 प्रतिशत मेडल हरियाणा को मिले।
गायक पंजाब के माने जाते हैं, खेल के विषय में हरियाणा का नाम आता हैं। दिल्ली में जब कॉमनवेल्थ गेम्स हुए तब बहुत विकास हुआ। आज तो न्याय संगत रूप से हरियाणा को कंसीडर करना चाहिए था। खेलों के बजट हरियाणा को सबसे कम मिला है। खेल स्टेडियम की क्या हालात हैं जो हमारे खिलाड़ियों कि जानलेवा हो रहें हैं। 2019 के बाद खेल स्टेडियम को नहीं देखा गया। 2036 में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ओलिंपिक में मेजबानी करेगा। आज हम कहते हैं कि हरियाणा को भी कंसीडर करना चाहिए।

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