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फ़रीदाबाद 31 जनवरी - आगामी 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के मध्य नजर कल 1 फरवरी को जॉइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल फरीदाबाद की कन्वेंशन ओपन एयर थियेटर सेक्टर 12 में होगी। इस कन्वेंशन में इंटक, एटक,एच एम एस , सीटू , सर्व कर्मचारी संघ, बैंक, एवं आई सी टी यू के
सक्रिय कार्यकर्ता भाग लेंगे। कन्वेंशन में हड़ताल को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। अभी तक जॉइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल अनेक फैक्ट्रियों के अलावा डाक विभाग, आयकर, केंद्रीय भूजल तथा रेलवे में
हड़ताल को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क अभियान चला चुकी है। कल की कन्वेंशन में हड़ताल के लिए प्रचार प्रसार को तेज करने और हैंड बिल वितरित करने की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। काउं
सिल के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल,ने बताया कि यह हड़ताल केंद्र सरकार के द्वारा श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करने के विरोध में की जा रही है। केंद्र की सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को बदलकर चार श्रम संहिताएं बना दी। जिसमें श्रमिकों के साथ मैनेजमेंट के द्वारा अन्याय करने के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकार को छीना जा रहा है। इन श्रम संहिताओं में वर्करों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती और कंपनी प्रबंधकों को मजदूर के शोषण करने की खुली छूट मिल जाएगी। काम के घंटे में बढ़ोतरी होगी। जबकि सामाजिक सुरक्षा की गारंटी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूर या कर्मचारी की परिभाषा को सीमित करके यह संहितायें मजदूरों के एक बड़े हिस्से खास कर महिला मजदूरों घरेलू कामगारों, गिग वर्करों और प्लेटफार्म मजदूरों सहायक नर्सो, अप्रेंटिस, घर से काम करने वाले मजदूरों ,योजना मजदूरों, आशा, आंगनवाड़ी, मिड डे मील, मनरेगा मजदूरों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा कि इस हड़ताल में संयुक्त किसान मोर्चा और खेत मजदूर यूनियन के अलावा छात्र, नौजवान, मनरेगा मजदूर भी भाग लेंगे।
सिल के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल,ने बताया कि यह हड़ताल केंद्र सरकार के द्वारा श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करने के विरोध में की जा रही है। केंद्र की सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को बदलकर चार श्रम संहिताएं बना दी। जिसमें श्रमिकों के साथ मैनेजमेंट के द्वारा अन्याय करने के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकार को छीना जा रहा है। इन श्रम संहिताओं में वर्करों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती और कंपनी प्रबंधकों को मजदूर के शोषण करने की खुली छूट मिल जाएगी। काम के घंटे में बढ़ोतरी होगी। जबकि सामाजिक सुरक्षा की गारंटी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूर या कर्मचारी की परिभाषा को सीमित करके यह संहितायें मजदूरों के एक बड़े हिस्से खास कर महिला मजदूरों घरेलू कामगारों, गिग वर्करों और प्लेटफार्म मजदूरों सहायक नर्सो, अप्रेंटिस, घर से काम करने वाले मजदूरों ,योजना मजदूरों, आशा, आंगनवाड़ी, मिड डे मील, मनरेगा मजदूरों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा कि इस हड़ताल में संयुक्त किसान मोर्चा और खेत मजदूर यूनियन के अलावा छात्र, नौजवान, मनरेगा मजदूर भी भाग लेंगे।

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