अरावली में बसा गांव अनंगपुर इन दिनों राजनीतिक अखाड़ा बनता जा रहा है। मकानों को टूटने से बचाने के लिए हर रोज पंचायत हो रही है। अब 13 जुलाई को इस गांव में एक महापंचायत का आयोजन किया जाएगा है। जिसमें देश के हर हिस्से से पक्ष-विपक्ष के राजनेताओं सहित दूसरी यूनियन के नेता भाग लेंगे।
बता दें कि, अरावली में पिछले 20 दिनों से सुप्रीम कोर्ट आदेश पर वन विभाग नगर निगम के साथ मिलकर अवैध निमार्ण को गिरा रहा है। 8वीं शताब्दी में जब दिल्ली में तोमर वंश का शासन आया, तब गांव अनंगपुर अपने अस्तित्व में आया था। तोमर वंश के पहले राजा अनंगपाल ने गांव अनंगपुर को अपनी राजधानी बनाया था और यहीं से अपने राज्य का विस्तार किया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग अरावली के वन क्षेत्र में बने अवैध निमार्ण को तोड़ रहा है। वन विभाग ने करीब 20 दिन पहले इस कार्रवाई को शुरू किया था। वन विभाग ने इससे पहले एक सर्वे भी किया था। इसमें 700 जगहों पर 6 हजार से ज्यादा अवैध निमार्ण चिन्हित गए हैं। इनमें अरावली में बसे गांव अनंगपुर, मेवला महाराजपुरा, अनखीर और लकड़पुर में सबसे ज्यादा अवैध निमार्ण पाए गए।
फरीदाबाद डीएफओ राजकुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है। वन विभाग को जुलाई के अंत तक सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपनी है। अरावली वन क्षेत्र से 6 हजार से अधिक छोटे-बड़े अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। वन विभाग ने अभी तक 80 के करीब बड़े फार्म हाउस को तोड़ दिया है।
गांव अनंगपुर में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही प्रशासन को यहां पर रूकना पड़ गया है। कई बार प्रशासन ने यहां पर तोड़फोड़ की कार्रवाई करने की कोशिश की, लेकिन गांव वालों के प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के चलते टीमों को पीछे हटना पड़ा। यहां तक कि बीते मंगलवार को एक मकान को तोड़े जाने के दौरान टीमों पर पथराव हुआ और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
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