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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने 1700 गर्भवती महिलाओं को नोटिस जारी किया

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 8 July 2025 0 comments
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 हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग ने 1700 गर्भवती महिलाओं को नोटिस जारी किया है। इन महिलाओं ने गर्भावस्था के नियमों के अनुसार अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। विभाग ने महिलाओं से पूछा है कि उन्होंने अपनी गर्भावस्था की जानकारी क्यों छिपाई।

नियमों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के 10 सप्ताह के भीतर ANM कार्यकर्ताओं के पास अपना नाम दर्ज कराना होता है। विभाग को शक है कि कहीं महिलाओं ने गर्भ में लड़की का पता चलने पर गर्भपात तो नहीं कराया।

राज्य के 481 गांव ऐसे हैं जहां लिंगानुपात 700 से भी कम है। नोटिस जारी करने का एक बड़ा कारण यह भी है कि अबॉर्शन होने की सूरत में लिंगानुपात पर सीधा असर पड़ सकता है।

विभाग ने स्थानीय कर्मियों को इन महिलाओं पर नजर रखने के लिए कहा है और क्षेत्र की महिला स्वास्थ्य कर्मियों को भी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया था। STF गठन के बाद ऐसे गांवों की रिपोर्ट बनाई गई, जहां लिंगानुपात कम है। चंडीगढ़ में हाल ही में सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में रिव्यू मीटिंग हुई थी। तब STF के सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह की तरफ से बताया गया कि लिंगानुपात पर (2019 से मार्च 2025 तक) डेटा तैयार किया गया है।

STF के संयोजक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) पोर्टल के अनुसार 22 अप्रैल, 2025 तक राज्य का लिंगानुपात 911 है। यानी एक हजार बेटियों पर 911 बेटियां है। दिसंबर 2022 में 1000 बेटों पर बेटियों की संख्या 917 थी, जो जून 2023 में घटकर 906 पर आ गई थी। 2019 तक लिंगानुपात बढ़कर 923 पर पहुंच गया था।

मगर, इसके बाद से लगातार गिर रहा है। 2024 में, 1000 लड़कों पर 910 लड़कियों का जन्म हुआ था। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 481 गांवों की पहचान की है, जिनका लिंगानुपात 700 से कम है। खास बात यह है कि इनमें अकेले अंबाला और यमुनानगर के 107 गांव शामिल हैं।


स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि हर गर्भवती महिला को गर्भधारण के 10 सप्ताह के भीतर अपना नाम एएनएम कार्यकर्ताओं के पास पंजीकृत करवाना होता है। विभाग की ओर से हाल ही में की गई समीक्षा में पता चला है कि कई मामलों की सूचना देरी से दी गई। इस मामले में ACS सुधीर राजपाल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए ANC रजिस्ट्रेशन बेहद जरूरी है। इस रजिस्ट्रेशन से गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं का समय पर पता लगाया जा सकता है और मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है।


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