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नई दिल्ली: कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेपमामले की जांच CBI से करवाने से इंकार कर दिया है. मामले की सुनवाई को ट्रांसफर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'फेयर (Fair) और फियर (Fear) एक साथ अस्तित्व में नहीं रह सकते', और फेयर ट्रायल का मतलब स्पीडी ट्रायल भी है, इसलिए ट्रायल 'डे-टू-डे', यानी रोज़ाना होगा, जिसमें सुनवाई को टाला नहीं जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, मामले का ट्रायल 'इन-कैमरा' होगा, और सर्वोच्च न्यायालय ट्रायल की निगरानी करेगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी बयानों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया जाएगा, तथा ट्रायल रणबीर पीनल कोड के आधार पर चलेगा.
कोर्ट ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार को केस के लिए स्पेशल प्रॉसीक्यूटर नियुक्त करने का भी आदेश दिया. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी, जिसके लिए राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वह गवाहों के बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें पठानकोट ले जाएगी और उनका खर्च वहन करेगी. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, आरोपियों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए.
किए जाने और उसकी हत्या कर देने के मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से बाहर पठानकोट में ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन
कोर्ट ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार को केस के लिए स्पेशल प्रॉसीक्यूटर नियुक्त करने का भी आदेश दिया. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी, जिसके लिए राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वह गवाहों के बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें पठानकोट ले जाएगी और उनका खर्च वहन करेगी. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, आरोपियों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए.
किए जाने और उसकी हत्या कर देने के मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से बाहर पठानकोट में ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन

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