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लगातार सरकारी विभागों से कर्मचारियों की छंटनी करने और कर्मचारी मांगों
पर तानाशाहपूर्ण रवैया अपनाने व बातचीत न करने से खफा प्रदेश कर्मचारी
संगठनों ने राज्य की खट्टर सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है।
जिसके तहत कच्चे कर्मचारियों की मांगों को लेकर 9 अगस्त को रोहतक में
प्रदेश स्तरीय बैठक करने, 14 अगस्त को सभी सरकारी विभागों व विश्वविधालयों
के मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने के अलावा दो सितम्बर को प्रदेश में
पूरी तरह चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई है। यह चेतावनी सर्वकर्मचारी संघ
हरियाणा के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने गुरूवार को फरीदाबाद में एक
पत्रकार वार्ता के दौरान दी।
कर्मचारियों, अध्यापकों और नर्सों पर लगातार हो रहे अत्याचार और नौकरी से निकालने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा 4 अगस्त को कर्मचारी नेताओं से पूर्व सूचना के बावजूद न मिलने से गुस्साए कर्मचारी संगठनों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान कर दिया है। इसकी घोषणा करते हुए सर्वकर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने कहा कि खट्टर सरकार ने मात्र 8 माह के कार्यकाल में 15 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का रिकार्ड बनाया है। सरकार कर्मचारी मांगों पर तानाशापूर्ण रवैया अपनाये हुए है। जिस सरकार ने भी कर्मचारी आंदोलन से टकराने का प्रयास किया, उसे मुंह की खानी पड़ी। इसके बावजूद वे कर्मचारी मांगों पर मुख्यमंत्री से पूर्व सूचना के आधार पर 4 अगस्त को मिलने के लिए चंडीगढ़ गए थे। लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे न मिलकर यह दर्शा दिया है कि वे सत्ता के नशे में चूर है। सरकार के सुशासन के दावों की पोल भी खुलती जा रही है।
सर्व कर्मचारी संध के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने कहा कि अब कर्मचारी चुप्प नहीं बैठेगें। सबसे पहले कच्चे कर्मचारियों की मांगों को लेकर रोहतक में 9 अगस्त को प्रदेश स्तरीय कन्वैंशन होगी। 14 अगस्त को प्रदेश के सभी स्थानों पर कर्मचारी सरकार विरोधी प्रदर्शन करेगें। अगर इसके बावजूद सरकार ने टकराव का रास्ता नहीं छोडा और केन्द्र सरकार ने श्रम कानूनों में संशोधन के नाम पर कर्मचारी संगठनों के हित खराब करने से परहेज नही किया तो दो सितम्बर को पूरे प्रदेश का चक्का जाम कर दिया जायेगा। जिसमें रोडवेज, बिजली, पानी और तमाम सरकारी विभागों के अलावा विश्वविधालय भी शामिल होगें। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चुनावी वायदे के बिलकुल विपरीत काम कर रही है।
कर्मचारियों, अध्यापकों और नर्सों पर लगातार हो रहे अत्याचार और नौकरी से निकालने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा 4 अगस्त को कर्मचारी नेताओं से पूर्व सूचना के बावजूद न मिलने से गुस्साए कर्मचारी संगठनों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान कर दिया है। इसकी घोषणा करते हुए सर्वकर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने कहा कि खट्टर सरकार ने मात्र 8 माह के कार्यकाल में 15 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का रिकार्ड बनाया है। सरकार कर्मचारी मांगों पर तानाशापूर्ण रवैया अपनाये हुए है। जिस सरकार ने भी कर्मचारी आंदोलन से टकराने का प्रयास किया, उसे मुंह की खानी पड़ी। इसके बावजूद वे कर्मचारी मांगों पर मुख्यमंत्री से पूर्व सूचना के आधार पर 4 अगस्त को मिलने के लिए चंडीगढ़ गए थे। लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे न मिलकर यह दर्शा दिया है कि वे सत्ता के नशे में चूर है। सरकार के सुशासन के दावों की पोल भी खुलती जा रही है।
सर्व कर्मचारी संध के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने कहा कि अब कर्मचारी चुप्प नहीं बैठेगें। सबसे पहले कच्चे कर्मचारियों की मांगों को लेकर रोहतक में 9 अगस्त को प्रदेश स्तरीय कन्वैंशन होगी। 14 अगस्त को प्रदेश के सभी स्थानों पर कर्मचारी सरकार विरोधी प्रदर्शन करेगें। अगर इसके बावजूद सरकार ने टकराव का रास्ता नहीं छोडा और केन्द्र सरकार ने श्रम कानूनों में संशोधन के नाम पर कर्मचारी संगठनों के हित खराब करने से परहेज नही किया तो दो सितम्बर को पूरे प्रदेश का चक्का जाम कर दिया जायेगा। जिसमें रोडवेज, बिजली, पानी और तमाम सरकारी विभागों के अलावा विश्वविधालय भी शामिल होगें। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चुनावी वायदे के बिलकुल विपरीत काम कर रही है।

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