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हरियाणा को भारत के समृद्ध राज्यों में से माना जाता है। लेकिन इस राज्य में स्वास्थ्य के मामले में, विभिन्न भयानक रोग बार-बार सामने आ रहे हैं। खतरनाक रोगों की बढ़ती संख्या, हरियाणा के लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनती जा रही है। राज्य में पांच सबसे अधिक पाए जाने वाले रोगों में इन्सेफेलाइटिस, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, कैंसर व स्वाइन फ्लू शामिल हैं।
इन्सेफेलाइटिस (दिमागी बुखार): इन्सेफेलाइटिस का अर्थ है दिमाग की सूजन, जो जीवन के लिए घातक हो सकती है और किसी उम्र या लिंग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह रोग सामान्यत: एक वायरस के कारण होता है, हालांकि यह बैक्टीरिया, पैरासाइट्स (परजीवियों) या अन्य संक्रामक अभिकारकों से भी फैल सकता है। इन्सेफेलाइटिस में आमतौर पर बुखार व सिरदर्द, फ्लू जैसे लक्षण होते हैं जिनसे इस संक्रमण की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। यह अचानक रोग देश के 17 राज्यों में 171 जिलों में अनेक लोगों की जान ले चुका है और हरियाणा उनमें से एक है!
हेपेटाइटिस: वायरल हेपेटाइटिस दुनिया में 8वीं सबसे अधिक भयानक बीमारी है। हेपेटाइटिस बी वायरल संक्रमण ऐसा हेपेटाइटिस है जो भारत में 2 से 4: लोगों को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस बी वायरस में लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर हो सकता है। यह रक्त और शरीर के अन्य फ्लूड्स से संचारित होता है। यह सामान्यत: उन लोगों में फैलता है जो दूषित सूईयों या सिरिंजों का उपयोग करते हैं या जो रेजऱों व ब्लेडों का सांझा प्रयोग करते हैं। हरियाणा में 2009 और 2011 के बीच हेपेटाइटिस बी के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे आवश्यक रोकथाम कार्यवाहियों की जरूरत अनुभव की जा रही है।
हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण: पिछले कुछ वर्षों में, हरियाणा में हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण की घटनाएँ बढ़ी हैं और इस खामोश हत्यारे ने अनेक जीवन समाप्त कर दिए हैं, जिनकी उम्र अधिकांशत: 21 से 60 वर्ष के बीच थी। इस संक्रमण से ग्रस्त अनेक लोगों को यह पता नहीं होता कि वे संक्रमित हैं और हो सकता है उनमें कई वर्ष तक उसके लक्षण दिखाई न दें, यहाँ तक कि यह वायरस लिवर को भी क्षति पहुंचाता है। रोगी को बुखार, थकान, खाने में अरूचि, उल्टी व पेटदर्द जैसी समस्याएँ होसकती हैं। संक्रमित शेविंग उपकरण व सूईयाँ इसके फैलने का प्रमुख कारण हैं।
कैंसर: भारत में, कैंसर प्रतिवर्ष होने वाली 0.3 मिलियन मौतों का कारण बनता है। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित हैं। हरियाणा के रोहतक में किए गए एक अध्ययन के अनुसर, यहाँ 15,968 कैंसर रोगी हैं और इनमें सबसे अधिकसंख्या गर्भाश्य ग्रीवा (सर्विकल) कैंसर रोगियों की है। जिसके बाद, स्तन कैंसर, मुखग्रसनिक कैंसर, गेस्ट्रोइंटेस्टिनल कैंसर, व फेफड़ों के कैंसर का नम्बर आता है। हरियाणा में पुरुषों में सबसे अधिक मुखग्रसनिक कैंसर पाया जाता है जो बीड़ी या हुक्के के धूम्रपान से होता है।
स्वाइन फ्लू: हाल ही के वर्षों में, स्वाइन फ्लू नामक महामारी ने भारत को भी प्रभावित किया है। यह सामान्यत: इंफ्लुएंजा वायरस एच1एन1 स्ट्रेन के कारण होती है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गला खराब होना, जुकाम होना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना तथा थकान शामिल है। यह आमतौर पर छींकों आदि से संक्रमण के माध्यम से फैलती है। 2013 में हरियाणा इस महामारी से काफी प्रभावित हुआ था जिससे यहाँ 30 मौतें हुई थीं। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रभावी निदान व रोकथाम उपाय करने की सलाह दी गई थी।
इन रोगों ने हरियाणा की जनसंख्या पर काफी प्रभाव डाला है। इसलिए ऐसे रोगों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उपयुक्त रोकथाम व उपचार उपाय किए जाने चाहिएं।
इन्सेफेलाइटिस (दिमागी बुखार): इन्सेफेलाइटिस का अर्थ है दिमाग की सूजन, जो जीवन के लिए घातक हो सकती है और किसी उम्र या लिंग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह रोग सामान्यत: एक वायरस के कारण होता है, हालांकि यह बैक्टीरिया, पैरासाइट्स (परजीवियों) या अन्य संक्रामक अभिकारकों से भी फैल सकता है। इन्सेफेलाइटिस में आमतौर पर बुखार व सिरदर्द, फ्लू जैसे लक्षण होते हैं जिनसे इस संक्रमण की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। यह अचानक रोग देश के 17 राज्यों में 171 जिलों में अनेक लोगों की जान ले चुका है और हरियाणा उनमें से एक है!
हेपेटाइटिस: वायरल हेपेटाइटिस दुनिया में 8वीं सबसे अधिक भयानक बीमारी है। हेपेटाइटिस बी वायरल संक्रमण ऐसा हेपेटाइटिस है जो भारत में 2 से 4: लोगों को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस बी वायरस में लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर हो सकता है। यह रक्त और शरीर के अन्य फ्लूड्स से संचारित होता है। यह सामान्यत: उन लोगों में फैलता है जो दूषित सूईयों या सिरिंजों का उपयोग करते हैं या जो रेजऱों व ब्लेडों का सांझा प्रयोग करते हैं। हरियाणा में 2009 और 2011 के बीच हेपेटाइटिस बी के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे आवश्यक रोकथाम कार्यवाहियों की जरूरत अनुभव की जा रही है।
हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण: पिछले कुछ वर्षों में, हरियाणा में हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण की घटनाएँ बढ़ी हैं और इस खामोश हत्यारे ने अनेक जीवन समाप्त कर दिए हैं, जिनकी उम्र अधिकांशत: 21 से 60 वर्ष के बीच थी। इस संक्रमण से ग्रस्त अनेक लोगों को यह पता नहीं होता कि वे संक्रमित हैं और हो सकता है उनमें कई वर्ष तक उसके लक्षण दिखाई न दें, यहाँ तक कि यह वायरस लिवर को भी क्षति पहुंचाता है। रोगी को बुखार, थकान, खाने में अरूचि, उल्टी व पेटदर्द जैसी समस्याएँ होसकती हैं। संक्रमित शेविंग उपकरण व सूईयाँ इसके फैलने का प्रमुख कारण हैं।
कैंसर: भारत में, कैंसर प्रतिवर्ष होने वाली 0.3 मिलियन मौतों का कारण बनता है। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित हैं। हरियाणा के रोहतक में किए गए एक अध्ययन के अनुसर, यहाँ 15,968 कैंसर रोगी हैं और इनमें सबसे अधिकसंख्या गर्भाश्य ग्रीवा (सर्विकल) कैंसर रोगियों की है। जिसके बाद, स्तन कैंसर, मुखग्रसनिक कैंसर, गेस्ट्रोइंटेस्टिनल कैंसर, व फेफड़ों के कैंसर का नम्बर आता है। हरियाणा में पुरुषों में सबसे अधिक मुखग्रसनिक कैंसर पाया जाता है जो बीड़ी या हुक्के के धूम्रपान से होता है।
स्वाइन फ्लू: हाल ही के वर्षों में, स्वाइन फ्लू नामक महामारी ने भारत को भी प्रभावित किया है। यह सामान्यत: इंफ्लुएंजा वायरस एच1एन1 स्ट्रेन के कारण होती है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गला खराब होना, जुकाम होना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना तथा थकान शामिल है। यह आमतौर पर छींकों आदि से संक्रमण के माध्यम से फैलती है। 2013 में हरियाणा इस महामारी से काफी प्रभावित हुआ था जिससे यहाँ 30 मौतें हुई थीं। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रभावी निदान व रोकथाम उपाय करने की सलाह दी गई थी।
इन रोगों ने हरियाणा की जनसंख्या पर काफी प्रभाव डाला है। इसलिए ऐसे रोगों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उपयुक्त रोकथाम व उपचार उपाय किए जाने चाहिएं।

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