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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी हालिया बैठक में ये संकेत दिए हैं
कि कांग्रेस में अब तक चले आ रहे 'वन मैन शो' या 'वन फैमिली शो' को खत्म
किया जाएगा। साथ ही, राज्य के नेताओं को उभरने का मौका दिया जाएगा। वैसे अब
तक 'वन मैन शो' ही कांग्रेस की परंपरा रही है।
बैठक में आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाई एस राजशेखर रेड्डी का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा, 'आंध्र में हमारे पास बहुत अच्छा नेता था, लेकिन एक हेलिकॉप्टर हादसे ने आंध्र प्रदेश से कांग्रेस को खत्म कर दिया।' सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश के हादसे का जिक्र करते समय राहुल ने ये भी कहा था कि वो दोबारा किसी राज्य में कांग्रेस का वजूद खत्म नहीं होने देंगे।
लंबे समय से एक ही ढर्रे पर चली आ रही कांग्रेस को एक बड़े बदलाव की जरूरत है और सभी की नजरें राहुल गांधी पर टिकी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि राहुल लंबी राजनीति के लिए पार्टी को नई दिशा देंगे।
वर्तमान में कांग्रेस को देश के अलग-अलग राज्यों में लोकप्रियता के आधार पर कई चेहरों को प्रमोट करने की जरूरत है। अभी तक लगभग हर राज्य में कोई एक ही परिवार या चेहरा कांग्रेस के नाम पर सत्ता का आनंद ले रहा है।
यूपीए के शासनकाल में भी राहुल ने अपने इस आइडिया पर चर्चा की थी। पार्टी के उत्तराधिकारी के तौर पर जयपुर की 'चिंतन बैठक' में शामिल हुए राहुल ने कहा था, 'हर राज्य में कांग्रेस के पास 4-5 ऐसे नेता होने चाहिए जो सीएम बनने के योग्य हों।' हालांकि, कांग्रेसियों को इस बात पर आश्चर्य जरूर हुआ था कि कांग्रेस की समस्याओं और उनके निदान के बारे में राहुल के पास कुछ भी नया नहीं था।
नेतृत्व के इस सिद्धांत को सबसे पहले पंजाब, हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों में परखा जाएगा, जहां अब तक कोई एक परिवार ही कांग्रेस का झंडा उठाए था। वैसे कुछ कांग्रेसी ये चेतावनी भी दे रहे हैं कि पार्टी में बड़ा बदलाव करने से असहयोग और गुटबाजी जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं।
दिल्ली में अजय माकन को पीसीसी चीफ बनाते हुए कांग्रेस ने खुद को दीक्षित परिवार की छाया से अलग कर लिया है। पंजाब में भी पार्टी अपनी इस योजना को अमल में लाना चाहती है, लेकिन पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह बादल इस राह में रोड़ा बने हुए हैं। हिमाचल भी उस समय कांग्रेस के गले की हड्डी बन गया था, जब 2012 चुनाव के दौरान वीरभद्र सिंह खुद को सीएम कैंडिडेट बनाने पर अड़ गए थे। कांग्रेस को जीत दिलाने के साथ ही वे शीर्ष पर पहुंच गए थे।
हरियाणा में पीसीसी चीफ अशोक तंवर को भी दूसरे गुटों और पूर्व सीएम भूपिंदर हुडा से चुनौती मिल रही है। पार्टी द्वारा दिल्ली में आयोजित किसान रैली के दौरान उन्हें किनारे कर दिया गया था। राज्यों में नेतृत्व का मुद्दा इसलिए भी जटिल है, क्योंकि सीएम बनने वाला नेता पार्टी पर अधिकार जमाने का प्रयास करता है। ऐसे में दूसरे नेता हाशिए पर चले जाते हैं।
बैठक में आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाई एस राजशेखर रेड्डी का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा, 'आंध्र में हमारे पास बहुत अच्छा नेता था, लेकिन एक हेलिकॉप्टर हादसे ने आंध्र प्रदेश से कांग्रेस को खत्म कर दिया।' सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश के हादसे का जिक्र करते समय राहुल ने ये भी कहा था कि वो दोबारा किसी राज्य में कांग्रेस का वजूद खत्म नहीं होने देंगे।
लंबे समय से एक ही ढर्रे पर चली आ रही कांग्रेस को एक बड़े बदलाव की जरूरत है और सभी की नजरें राहुल गांधी पर टिकी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि राहुल लंबी राजनीति के लिए पार्टी को नई दिशा देंगे।
वर्तमान में कांग्रेस को देश के अलग-अलग राज्यों में लोकप्रियता के आधार पर कई चेहरों को प्रमोट करने की जरूरत है। अभी तक लगभग हर राज्य में कोई एक ही परिवार या चेहरा कांग्रेस के नाम पर सत्ता का आनंद ले रहा है।
यूपीए के शासनकाल में भी राहुल ने अपने इस आइडिया पर चर्चा की थी। पार्टी के उत्तराधिकारी के तौर पर जयपुर की 'चिंतन बैठक' में शामिल हुए राहुल ने कहा था, 'हर राज्य में कांग्रेस के पास 4-5 ऐसे नेता होने चाहिए जो सीएम बनने के योग्य हों।' हालांकि, कांग्रेसियों को इस बात पर आश्चर्य जरूर हुआ था कि कांग्रेस की समस्याओं और उनके निदान के बारे में राहुल के पास कुछ भी नया नहीं था।
नेतृत्व के इस सिद्धांत को सबसे पहले पंजाब, हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों में परखा जाएगा, जहां अब तक कोई एक परिवार ही कांग्रेस का झंडा उठाए था। वैसे कुछ कांग्रेसी ये चेतावनी भी दे रहे हैं कि पार्टी में बड़ा बदलाव करने से असहयोग और गुटबाजी जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं।
दिल्ली में अजय माकन को पीसीसी चीफ बनाते हुए कांग्रेस ने खुद को दीक्षित परिवार की छाया से अलग कर लिया है। पंजाब में भी पार्टी अपनी इस योजना को अमल में लाना चाहती है, लेकिन पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह बादल इस राह में रोड़ा बने हुए हैं। हिमाचल भी उस समय कांग्रेस के गले की हड्डी बन गया था, जब 2012 चुनाव के दौरान वीरभद्र सिंह खुद को सीएम कैंडिडेट बनाने पर अड़ गए थे। कांग्रेस को जीत दिलाने के साथ ही वे शीर्ष पर पहुंच गए थे।
हरियाणा में पीसीसी चीफ अशोक तंवर को भी दूसरे गुटों और पूर्व सीएम भूपिंदर हुडा से चुनौती मिल रही है। पार्टी द्वारा दिल्ली में आयोजित किसान रैली के दौरान उन्हें किनारे कर दिया गया था। राज्यों में नेतृत्व का मुद्दा इसलिए भी जटिल है, क्योंकि सीएम बनने वाला नेता पार्टी पर अधिकार जमाने का प्रयास करता है। ऐसे में दूसरे नेता हाशिए पर चले जाते हैं।

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