//# Adsense Code Here #//
ट्रैफिक जाम की समस्या भले ही राजधानी के कुछ इलाकों में हो लेकिन
इससे पूरी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है। सफर की रिपोर्ट के अनुसार जिन
इलाकों में जाम लगता है वहां हवा के साथ प्रदूषण पूरी दिल्ली में फैल जाता
है। मंगलवार को राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर मानकों से पांच
गुना तक बढ़ गया।
जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ प्रदूषण के स्तर में वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पृथ्वी मंत्रालय की ओर से राजधानी की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने के लिए चलाए जा रहे सफर प्रोजेक्ट के निदेशक डॉंक्टर गुफरान बेग ने बताया कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बढ़ा है। जिन इलाकों में जाम लगता है, वहां वाहनों से उत्सर्जन भले ही अधिक दर्ज किया जाए लेकिन प्रदूषण का स्तर आसपास के इलाकों में अधिक दर्ज किया जाता है। हवा के साथ जाम वाली जगह से आसपास के इलाकों में प्रदूषण काफी अधिक बढ़ जाता है।
उदाहरण के तौर पर आश्रम चौक और उसके आसपास जाम लगने से मथुरा रोड पर सफर के केंद्र में प्रदूषण अधिक दर्ज किया जाता है। इसी तरह शक्तिनगर में अधिक जाम होने से दिल्ली विश्वविद्यालय के इलाके में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
क्यों और जहरीली हुई हवा
दिल्ली में 70 लाख से अधिक पंजीकृत वाहन हैं। वाहन पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का सबसे अधिक उत्सर्जन करते हैं। फ्लाईओवरों के पास लगने वाला जाम और जंगलों का कटना भी इसकी प्रमुख वजह है।
सेहत पर भारी
पार्टिकुलेट मैटर के हवा में बढ़ने की वजह से यह लोगों के खून और फेफड़ों में पहुंच जाता है। वायु प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन, अस्थमा, फेफड़े में सूजन, फेफड़ों का खराब होना, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियां आदि होने का खतरा रहता है।
जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ प्रदूषण के स्तर में वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पृथ्वी मंत्रालय की ओर से राजधानी की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने के लिए चलाए जा रहे सफर प्रोजेक्ट के निदेशक डॉंक्टर गुफरान बेग ने बताया कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बढ़ा है। जिन इलाकों में जाम लगता है, वहां वाहनों से उत्सर्जन भले ही अधिक दर्ज किया जाए लेकिन प्रदूषण का स्तर आसपास के इलाकों में अधिक दर्ज किया जाता है। हवा के साथ जाम वाली जगह से आसपास के इलाकों में प्रदूषण काफी अधिक बढ़ जाता है।
उदाहरण के तौर पर आश्रम चौक और उसके आसपास जाम लगने से मथुरा रोड पर सफर के केंद्र में प्रदूषण अधिक दर्ज किया जाता है। इसी तरह शक्तिनगर में अधिक जाम होने से दिल्ली विश्वविद्यालय के इलाके में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
क्यों और जहरीली हुई हवा
दिल्ली में 70 लाख से अधिक पंजीकृत वाहन हैं। वाहन पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का सबसे अधिक उत्सर्जन करते हैं। फ्लाईओवरों के पास लगने वाला जाम और जंगलों का कटना भी इसकी प्रमुख वजह है।
सेहत पर भारी
पार्टिकुलेट मैटर के हवा में बढ़ने की वजह से यह लोगों के खून और फेफड़ों में पहुंच जाता है। वायु प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन, अस्थमा, फेफड़े में सूजन, फेफड़ों का खराब होना, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियां आदि होने का खतरा रहता है।

No comments :