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-प्रमोद गोयल-
हरियाणा की जनता ने भारी उत्साह और जोश के साथ राज्य में भाजपा को प्रचंण बहुमत दिया था कि भाजपा सरकार बनने के बाद उनके दिन बहुरेगें, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। हरियाणा में खट्टर सरकार को बने 6 माह हो चुके है, लेकिन अभी तक सरकार ने विकास और लोगों की भलाई के लिए न तो कोई ठोस नीति बनाई है और ही आम जनता की भलाई के लिए कोई कदम उठाया है। खट्टर सरकार इस कार्यकाल में केवल अधिकारियों के तबादलों में ही फस कर रह गई है। कभी किसी अधिकारी एक स्थान से बदल कर दूसरे स्थान पर लगाया जाता है तो फिर अगले ही दिन उसे पता चलता है कि उसका स्थानांतरण दूसरी जगह हो गया है।
राज्य में जो भी विकास के कार्य चल रहे है, वे भी पुरानी सरकार के समय में ही पास हुए कार्य है। सरकार में शामिल मंत्री भी अपने विवादस्पद वक्तवयों के लिए ही अधिक जाने जाते है। मुख्यमंत्री से लेकर अनेक नए मंत्रियों में अनुभव की कमी के कारण सत्ताधारी भाजपा नेताओं को पता ही नहीं कि उन्हे करना क्या है। जिसका सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। खट्टर सरकार ने अभी तक न तो कर्मचारियों के हित में और न ही जनता को अच्छे दिन दिखाने के लिए कोई कारगर कदम उठाया है। जिससे जनता का भरोसा नहीं सरकार से अभी से इस कदर उठ रहा है कि अगर एक साल के अंदर दुबारा चुनाव हो तो भाजपा दुबारा सत्ता में आने का सपना साकार नहीं कर पायेगी। जो भाजपा नेता पहले पिछली कांग्रेस व दूसरी सरकारों को जन विरोधी कार्यों के लिए कोसते रहते थे, वे अब अपनी सरकार के कारनामों पर चुप्पी साधे हुए है। फरीदाबाद जिसे हर सरकार में हिस्सा मिलता रहा है, इस सरकार ने इस महत्वपूर्ण जिले को भी नकार दिया है। यहीं कारण है कि राज्य सरकार में फरीदाबाद जिले से भाजपा के तीन विधायक होने के बावजूद एक भी मंत्री नहीं बन पाया है। विधायक भी जनता के काम कराने की बजाय इस जुगत में लगे रहते है कि वे कैसे मंत्री पद हासिल करें।
खट्टर सरकार की नाकामी का ही नतीजा है कि भ्रष्टाचार में पूरी तरह सराबोर रहीं कांग्रेस के शासनकाल को हरियाणा की जनता यह कहकर फिर से याद करने लगी है कि इससे तो पिछली सरकार ही ठीक थी, जिसमें काम तो हो जाते थे और विकास भी खूब हुआ। वर्तमान सरकार में हालात यह है कि कोई भी अधिकारी जायज काम करने तक तैयार नहीं है। जिससे लोग अपने जरूरी कामों के लिए भटक रहे है। जब काम ही नहीं होगें तो भ्रष्टाचार स्वत: समाप्त हो जायेगा। अधिकांश जिलों में ऐसे अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है, जिन्हे फिल्ड का कोई ज्ञान ही नहीं है। ऐसे अधिकारी केवल कुर्सी तोडने और मुफ्त का वेतन लेने के अलावा कोई काम नहीं कर रहे है। कानून व्यवस्था से लेकर यातायात व्यवस्था का भी पूरी जनाजा निकल चुका है। लोगों की शिकायतों का जल्द निवारण कराने के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में शुरू की गई सीएम विंडो योजना भी फ्लाप साबित हुई है।
खट्टर साहब अभी वक्त है, अगर जल्द वक्त और लोगों की नब्ज को नहीं पहचाना तो बहुत देर हो जायेगी। कहते है ना, जो लोग वक्त की कद्र नहीं करते, वक्त भी उन्हे भुला देता है।

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