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सरकार भले ही गऊ
रक्षा के लिए कितने ही कड़े कानून क्यों न बना ले, लेकिन फरीदाबाद पुलिस
सरकार की इस मुहीम को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है । ताजा
मामला है फरीदाबाद के छांयसा थाने का जहा देर रात यमुना नदी के रास्ते
गायों को पैदल ले जा रहे चार लोगों को ग्रामीणों ने पकडक़र पुलिस के हवाले
कर दिया, जबकि तीन लोग भागने में कामयाब हो गए। देर रात पकड़ी गई इन गायों
की जांच का हवाला देकर पुलिस आज दोपहर तक बचती रही। ग्रामीणों का तो कहना
था कि इन गायों को काटने के लिए ले जाया जा रहा था, जबकि पुलिस इस तरह की
किसी भी बात से इंकार कर रही है। फिलहाल सभी 75 गाय गऊशाला में भिजवा दी गई
हैं। ये सभी गाय फरीदाबाद के छायंसा गांव की गऊशाला में बंधी हुई हैं। आंखों में से आंसू बहते इन गायों के साफतौर पर नजर आ रहे हैं। दरअसल इन गायों को यमुना के रास्ते पैदल-पैदल सात लोग मारते हुए ले जा रहे थे। ग्रामीणों की मानें तो इन गायों को यमुना के रास्ते उत्तर प्रदेश में ले जाया जा रहा था तथा गाय ले जाने वाले लोग राजस्थानी वेशभूषा में थे। जब ग्रामीणों ने गायों को मारे जाने और इन लोगों से गायों के बारे में पूछा तो इन लोगों ने लाठी-डंडों से उन्हें न केवल पीटा, बल्कि वहां से भागने का भी प्रयास किया। गायों को छोडक़र भाग रहे इनमें से चार लोग ग्रामीणों ने काबू कर लिए तथा इसकी सूचना पुलिस को दे दी। ग्रामीणों का आरोप यहां तक है कि पुलिस इन लोगों को बचाने की कोशिश में लगी हुई है।
पुलिस
इस मामले में आरोपियों का बचाव करती जरूर दिखाई दे रही है क्योकि पुलिस
खुद अपनी जुबानी यह कह रही है की ग्रामीणो ने 5 लोगो को हमें पकड़ कर दिया
है जो गायों को ले जा रहे थे । वह सभी पांचो लोग फरीदाबाद सराय ख़्वाजा नवीन
नगर चौकी के रहने वाले है और गुजर समाज से है ,,,अब यह उठता है की यदि वह
फरीदाबाद के है तो वह राजस्थानी वेषभूसा में क्यों थे ,,,,,और पुलिस खुद
बता रही है की वह आरोपी उन 75 गायों को केवल दो लाख दस हजार रूपये में
खरीद कर लाये है,,,तो आप खुद अन्दाजा लगाइये की एक गाय की कीमत 2800 रूपये
हुई क्या इतने में गाय आ सकती है इतने में तो बकरी का बच्चा भी नहीं आता
,,,,,,,,,,,,इससे साफ अंदाजा लगता है की फरीदाबाद पुलिस या तो अनपढ़ है या
फिर सरेआम उन आरोपियों को बचाने में लगी है
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