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जिले में कृषि विभाग द्वारा करीब 2000 एकड़ भूमि में धान की सीधी
बिजाई करने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शन प्लांट
लगाकार इस विधि के बारे में जागरूक किया गया जिसके चलते किसानों का रूझान
धान की सीधी बिजाई की ओर बढने लगा है। इस विधि द्वारा धान की बिजाई करने पर
पानी की बचत होती है वहीं फसल की पैदावार अधिक होने से किसानों को लाभ
होता है।
कृषि विशेषज्ञ महाबीर मलिक ने बताया कि किसान
रोपाई कर धान की फसल की पैदावार करता था जिसके चलते पानी की अधिक खपत होती
थी। एक किलों धान की पैदावार करने में साढे चार हजार लीटर पानी की खपत होती
है। धान की पैदावार के कारण पानी की कमी होती जा रही है। लेकिन धान की
पैदावार करनी भी जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की एक नई विधि इजाद की
है। यह धान की सीधी बिजाई विधि है। जिला कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान
की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। धान की सीधी बिजाई करने से
फसल के उत्पादन में बढोत्तरी होती है साथ ही फसल में बीमारियां कम लगती है।
उन्होंने कहा कि धान की सीधी बिजाई के लिए लेजर लेविंग से खेत को समतल
करवाये। ताकि खेत में पानी समान रूप से फैले। जिले के किसान जून के दूसरे व
तीसरे पखवाडे में बासमती धान की विभिन्न किस्मों जिनमें बासमती 370,
तरावड़ी बासमती, सीएसआर 30,पूसा बासमती 1509,पूसा 1121, की सीधी बिजाई कर
सकते है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान की बिजाई
करने के लिये धान का बीज,खरपतवार नाशक व कीटनाशक दवाईयां भी प्रदान की जा
रही है। किसानों का रूझान भी धान की सीधी बिजाई करने के प्रति बढ रहा है।
इस विधि द्वारा पानी की बचत होती है और जिस क्षेत्र में पानी की कमी है उस
क्षेत्र में यह विधि अधिक कारगर साबित होगी क्यों कि इस विधि द्वारा बिजाई
करने पर फसल को कम पानी की जरूरत पडती है। धान की सीधी बिजाई मशीन से की
जाती है ऐसे में लेबर की जरूरत नहीं पड़ती जिसके चलते किसानों को पांच से
छ: हजार रूपये प्रति एकड के हिसाब से बचत होती है। धान की सीधी बिजाई करने
पर पैदावार भी अधिक होती है।

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