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वैश्वीकरण और अस्वस्थ्य जीवन शैली से हो रहा उच्च रक्तचाप :डॉ.संजय कुमार

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 17 May 2015 0 comments
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 वैश्वीकरण और अस्वस्थ्य जीवन शैली के कारण उच्च रक्तचाप की बीमारी लगातार बढ़ रही है। उच्च रक्तचाप हमारे शरीर में कई तरह की घातक बीमारियों को जन्म देता है। जिसके चलते युवा और बुजुर्ग असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। यह जानकारी विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान फोर्टिस एस्कार्ट अस्पताल में मुख्य कंसल्टेंट एवं कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.संजय कुमार ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में दी।
उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों में से केवल 50 प्रतिशत मरीज ही इसके प्रति जागरूक हैं और कुछ क्षेत्रों में तो जागरूक मरीजों की प्रतिशत्ता महज दस प्रतिशत ही है। इस बीमारी के बारे में एक कड़वा सत्य यह है कि लोगों को इसके बारे में न तो पर्याप्त जानकारी है और न ही उनके पास उच्च रक्तचाप को मापने की सुविधा उपलब्ध है।
डॉ.संजय ने बताया कि आमतौर पर उच्च रक्तचाप की स्थिति में शरीर के सभी अंगों पर बढ़े हुए दबाव का प्रभाव पड़ता है, क्योंकि रक्त धमनियां शरीर के सभी अंगों में रक्त की आपूर्ति करती हैं। उन्होंने बताया कि इस समय देश में एक अरब से अधिक लोग उच्च रक्तचाप की बीमारी का शिकार हैं। इस बीमारी के संबंध में अगर 30 वर्ष पहले की स्थिति से तुलना की जाए तो आज यह बीमारी 66 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। एक शोध के अनुसार उच्च रक्तचाप का शिकार मरीज में हृदय रोग, किडनी रोग, स्ट्रोक, एथरोस्कालेरोसिस, आंखों की बीमारियां, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, आदि जैसी घातक बीमारियां होती हैं। डॉ.संजय ने कहा कि उच्च रक्तचाप ही कई गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बनता है। इस बीमारी में व्यायाम का लाभ 72 घंटे बाद समाप्त हो जाता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि रोजाना जिम में जाकर पसीना बहाया जाए बल्कि थोड़े-थोड़े समय पर व्यायाम किया जाना लाभदायक है।

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