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by : pramod goyal

 फरीदाबाद ,18 सितंबर।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की लगातार उपेक्षा से नाराज़ लाखों राज्य कर्मचारी अब निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेंगे। कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 12 दिसम्बर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय कर्मचारी रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह रैली पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, पीएफआरडीए एक्ट तथा एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करने, सभी प्रकार के ठेका, संविदा, आउटसोर्सिंग एवं दैनिक वेतन कर्म

चारियों को नियमित करने, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को शीघ्र कर्मचारी हितैषी सिफारिशें देने, सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने और खाली पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है।

लांबा ने कहा कि महासंघ द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को भेजे गए ज्ञापन को आधार बनाकर कर्मचारियों की वेतन संबंधी मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बेसिक पे का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम 5,000 रुपये अंतरिम राहत, 3.8 फिटमेंट फैक्टर, इन्क्रीमेंट की दर 5 प्रतिशत करने, दस वर्ष के बजाय प्रत्येक पांच वर्ष में वेतन पुनरीक्षण, ग्रुप-डी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये तथा आबादी के आधार पर 30 से 40 प्रतिशत एचआरए शामिल हैं।


उन्होंने कहा कि ओपीएस की बहाली और ठेका-संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांगों में हैं। इसके बावजूद केंद्र एवं राज्य सरकारें इन मुद्दों को लगातार टाल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें स्थायी भर्ती के माध्यम से भरकर बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाना चाहिए।

टीईटी की अनिवार्यता पर भी उठाए सवाल

सुभाष लांबा ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शिक्षकों के हित में टीईटी संबंधी अनिवार्यता को वापस लेने की मांग की। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा और अन्य जन सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उनका दायरा सीमित करना जनहित में नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से लगातार गैर शैक्षणिक कार्य में लगाए रखने की भी कडी़ निंदा की। 

उन्होंने 18 प्रतिशत बकाया डीए / डीआर जारी करने, चारों लेबर कोड वापस लेने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) वापस लेने तथा संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ए), (बी), (सी) और एस्मा को वापस लेने की भी मांग की।

रैली को लेकर अक्टूबर-नवंबर में देशभर में चलेगा व्यापक अभियान

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि सितंबर में सभी राज्यों में राज्य कमेटियों की बैठकें आयोजित कर रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। अक्टूबर में जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद सभी विभागों में गेट मीटिंग, कर्मचारी संपर्क अभियान और जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर तक सभी कार्यालयों एवं स्कूलों में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे तथा स्थानीय भाषाओं में प्रचार सामग्री वितरित की जाएगी। नवंबर में अभियान को और तेज करते हुए कर्मचारियों को दिल्ली रैली में बड़ी संख्या में भागीदारी के लिए लामबंद किया जाएगा।

लांबा ने कहा कि 12 दिसम्बर की राष्ट्रीय रैली कर्मचारियों की लंबित मांगों को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक मजबूती से पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच होगी। उन्होंने देशभर के राज्य सरकारी कर्मचारी संगठनों से रैली की व्यापक तैयारियों में जुटने और कर्मचारियों को संगठित करने का आह्वान किया।
by : pramod goyal

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे देश में कई सेवा कार्य शुरु किये जा रहे  हैं। शहर की प्रमुख सामाजिक संस्था मानव सेवा समिति इन सेवा कार्यों में भागीदारी करते हुए जनहित में कई सेवा कार्यक्रम आयोजित करेगी। समिति के अध्यक्ष कैलाश शर्मा व महासचिव सुरेंद्र जग्गा ने कहा है कि समिति 27 सितंबर को बच्चों व महिलाओं के लिए "निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर" आयोजित करेगी और 2 अक्टूबर को थैलेसीमिक बच्चों की मदद के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन करेगी। यह दोनों सेवा कार्य समिति के कार्यालय मानव भवन सेक्टर 10 में आयोजित किए जाएंगे।

समिति के संस्थापक अरुण बजाज,चेयरमैन प्रोजेक्ट आरके सिंगला व संयोजक महिला मंडल राज राठी ने  सभी से इन कार्यक्रमों को सफल बनाने में सहयोग देने की अपील की है। कैलाश शर्मा ने कहा है कि समिति की ओर से मोदी जी को उनके अधिकृत मेल pmo@gov.nic.in पर जन्मदिन की बधाई व शुभकामना देते हुए उनसे अपील की गई है कि वे अपने जन्मदिन पर कोरोना काल से पहले सीनियर सिटीजन को रेल टिकट में मिलने वाली छूट,जो अब बंद है को पुनः बहाल करके सीनियर सिटीजन भाई बहनों को तोहफा प्रदान करें जिससे वे रेल द्वारा भारत भ्रमण व धार्मिक स्थानों का देखने का पुनः अवसर प्रदान कर सकें।


by : pramod goyal

 *चंडीगढ़,24 अगस्त।*


अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने सरकार द्वारा नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के साथ 13 मई को हुए समझौते को लागू न करने और हड़ताली कर्मियों की जगह-जगह गिरफ्तारियां करने की घोर निन्दा की है। महासंघ से सरकार की वादाखिलाफी और गिरफ्तारियों के खिलाफ तथा हड़ताल के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए 26 अगस्त को सभी राज्यों में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव ए.श्री कुमार ने बताया कि 26 अगस्त को आयोजित प्रदर्शनों में समाजिक दृष्टि से समाज में सबसे नीचले पायदान पर खड़े सफाई कर्मियों के प्रति हरियाणा सरकार के घोर उपेक्षापूर्ण एवं शत्रुतापूर्ण रवैया को देशभर में एक्सपोज़ किया किया जाएगा। 

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया है कि 13 मई के समझौते को लागू कर शहरी स्थानीय निकाय व अग्निशमन विभाग के कर्मियों की हड़ताल को समाप्त करवाने की बजाय सरकार पुलिस दमन और गिरफ्तारियों से हड़ताल को समाप्त करवाने के प्रयासों में जुट गई है। सरकार के निर्देश पर अलग-अलग जिलों में सैकड़ों की संख्या में हड़ताली कर्मचारियों की गिरफ्तारियां की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने

इसकी निंदा करते हुए कहा कि सरकार को दमनात्मक कार्यवाही से हड़ताल समाप्त करवाने में सफलता नहीं मिलेगी और इन हथकंडों से स्थिति ओर बिगड़ेगी। जिसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी। महासचिव ए.श्री कुमार ने मुख्यमंत्री से 6 अगस्त से चल रही हड़ताल पर चुप्पी तोड़ अविलंब हस्तक्षेप करने और 13 मई के समझौते को लागू कर हड़ताल को समाप्त करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा हरियाणा कौशल रोजगार निगम की अधिसूचना में बिल्कुल साफ है कि इसके मातहत काम करने वाले ठेका कर्मचारी कभी भी रेगुलर होने और समान काम समान वेतन का दावा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जॉब सिक्योरिटी ठेका कर्मचारियों को 58 साल तक कच्चा रखने की पक्की गारंटी है। 

सुभाष लांबा ने बताया कि सरकार हड़ताल को लेकर शुरू से ही गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। हड़ताली कर्मियों के नेताओं के साथ हुई पिछली दो बैठकों में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री विपुल गोयल मौजूद ही नहीं थे। वह मंत्री मीटिंग कर रहे हैं,जिसका विभाग ही नहीं है। उन्होंने कहा कि 10-15 सालों से ठेके पर काम कर रहे कर्मियों को रेगुलर करने और भ्रष्टाचार और शोषण पर आधारित ठेका प्रथा को समाप्त करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है, अगर कोई कमी है तो सरकार की इच्छा शक्ति की है। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ठेका कर्मचारियों तथा गेस्ट टीचर को रेगुलर करने के अलग-अलग मामलों में आदेश दे चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार को लगता है कि अगर स्थानीय निकाय व अग्निशमन विभाग के ठेका कर्मचारी पक्के किए तो अन्य विभागों के ठेका कर्मियों को भी पक्का करना पड़ेगा। इसलिए सरकार मामला लटका के रखना चाहती है। जो सरकार की यह बडी़ भूल साबित होगी।

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 2027 तक भारत में खाने-पीने की चीजों के दाम काफी बढ़ सकते हैं। यह


अलर्ट मल्टीनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म जेपी मॉर्गन ने जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार पर 3 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।

फर्म ने दावा किया है कि महंगाई का असर पूरी दुनिया पर होगा। फर्टिलाइजर की कमी, जियोपॉलिटिकल तनाव के साथ एक अल नीनो तूफान के आने से यह संकट गहराएगा।

साल 2027 की पहली छिमाही में ग्लोबल स्तर पर खाने-पीने की चीजों के दाम 5% तक बढ़ सकते हैं। 2026 की पहली छिमाही में यह आंकड़ा 2.8% पर था। भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए अधिक मायने रखती है, क्योंकि देश में पहले से ही फर्टिलाइजर काफी महंगी है।

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 झारखंड के रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में धांधली के खिलाफ हजारों की संख्या में छात्र विधानसभा के करीब पहुंच गए हैं। वहीं पर धरना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। छात्रों ने पानी की बोतल और चप्पलें फेंकीं।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कंटीले तार की बैरिकेडिंग और वाटर कैनन से रोकने की कोशिश की तो छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़कर डांस करते नजर आए। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे।

इधर, CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को गिरफ्तार कर लिया है। 21 जुलाई को JPSC ऑफिस में रेड के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। CID उनसे लगातार पूछताछ कर रही थी।

विधानसभा को चारों तरफ से 6 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है। CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। वहीं, 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में शामिल हुए।

भाजपा विधायक भी छात्रों के समर्थन में CM हाउस के सामने धरने पर बैठे, जिन्हें बाद में पुलिस ने वहां से हटा दिया। छात्र झारखंड PSC-SSC की परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर 17 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। 6 छात्र भूख हड़ताल पर हैं।


by : pramod goyal

 *पटना,31 जुलाई।*

बिहार अराजपत्रित राज्य कर्मचारी महासंघ के बेनर तले बृहस्पतिवार को पीएमसीएच थिएटर, पटना में राज्य स्तरीय कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन की अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष नीलम कुमारी ने की। राज्य महामंत्री सुबेश सिंह द्वारा संचालित इस कन्वेंशन में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, कोषाध्यक्ष शशिकांत राय, एनईसी सदस्य शैलेन्द्र सिंह, रेखा कुमारी और सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता, पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह आदि पहुंचे और संबोधित किया। कन्वेंशन में सभी जिलों से सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव में 12 दिसम्बर की रामलीला मैदान दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय रैली में बढ़-चढ़कर शामिल होने का फैसला लिया गया। रैली के मांग मुद्दों को लेकर सभी जिलों व सब डिवीजन और ब्लाकों में कर्मचारी सभाएं आयोजित की जाएगी और कर्मचारियों से रैली में बढ़-चढ़कर शामिल होने का आह्वान किया जाएगा।

कन्वेंशन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पीएफआरडीए एक्ट रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली करने की बजाय युनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को एकतरफा लागू कर जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज सभी राज्यों एवं केंद्र सरकार के विभागों में लगभग पचास प्रतिशत ठेका संविदा कर्मचारी 10 से 15 सालों से काम कर रहे। जिनको न तो रेगुलर किया जा रहा है और न ही उनका समान काम समान वेतन दिया जा रहा है। संविदा कर्मियों का भारी शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के विभागों और पीएसयू में एक करोड़ से ज्यादा पद खाली है, लेकिन उसको रेगुलर बहाली से नहीं भरा जा रहा है। सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों को मजबूत करने की बजाय उनका निजीकरण किया जा रहा है और सरकारी विभागों को सिकोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आठवें पे कमीशन को भेजें ज्ञापन में 3.8 फिटमेंट फेक्टर, पांच प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, सबसे उच्च व निम्न पद का अनुपात 1:10 से ज्यादा नहीं करने और दस की बजाय पांच साल में पे रिवीजन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दो से पांच लाख की आबादी वाले शहरों एवं कस्बों में 30, पांच से पचास साल की आबादी वाले शहरों में 35 प्रतिशत और पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले महानगरों में 40 प्रतिशत एचआरए देन,दस हजार रूपए शिशु शिक्षा भत्ता देने और एक करोड़ रूपए हाऊस बिल्डिंग एडवांस,दस लाख रुपए मेरिज एडवांस और चार पहिया वाहन खरीद के लिए दस लाख रुपए एडवांस देने की मांग की है।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के कोषाध्यक्ष शशिकांत राय, बिहार अराजपत्रित राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष नीलम कुमारी व महामंत्री सुबेश सिंह व कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि कहा कि बिहार सरकार कर्मचारियों की अत्यंत जायज़ मांगों की अनदेखी कर रही है। जिसके कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि 27-28-29 सितंबर को राज्य सम्मेलन भोजपुर आरा में आयोजित किया जाएगा। जिसमें राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की योजना बनाई जाएगी।


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 सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च में बैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कराया जाए।

वहीं कोर्ट ने केंद्र से कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF के हथियारों और गोला-बारूद के इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस विशेष स्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकती है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की परमिशन देने वाले पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस पर रोक लगाने का आदेश देना मुश्किल है। कोर्ट ने इसके इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी (दोनों पीड़ित) ने याचिका में पैलेट गन पर बैन लगाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि संसद मार्च में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर पैलेट गन चलाई थी।