//# Adsense Code Here #//
फरीदाबाद। सर्वोच्च न्यायालय परिसर के निकट विरोध-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं को हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले पर अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अधिवक्ता डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि 10 अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से हस्तक्षेप का अ
नुरोध किया था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं की रिहाई का रास्ता प्रशस्त हुआ। उन्होंने इस हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार या अनावश्यक बल प्रयोग की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
अधिवक्ता मोहन.तिवारी ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके सम्मान और पेशेवर स्वतंत्रता से जुड़े विषयों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा करने और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से अपने सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के मुद्दों पर एकजुट रहने तथा संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की।

No comments :