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जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए जर्मनी में रोजगार के अवसर

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 28 October 2026 0 comments
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 फरीदाबाद, 28 अक्टूबर। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के विद्यार्थियों के लिए जर्मनी में रोजगार के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। जर्मनी की कंपनी कोटिंग कॉन्सेप्ट्स ने विश्वविद्यालय से लगभग 180 कुशल तकनीशियनों एवं औद्योगिक कोटिंग विशेषज्ञों की भर्ती करने की इच्छा व्यक्त की है। इस संबंध में जर्मनी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और कौशल प्रशिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2027 में शुरू होगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को जर्मनी जाने से पहले ए2 स्तर का जर्मन भाषा प्रशिक्षण दिया जाएगा।


प्रतिनिधिमंडल में कोटिंग कॉन्सेप्ट्स की प्रबंध निदेशक जनीना राडोविक, लॉजिस्टिक्स एवं वर्क प्रिपरेशन विभाग के प्रमुख एंड्रियास फालर, प्रोडक्शन मैनेजर डेविड फ्रैंक तथा प्रोडक्शन मैनेजर सर्जियस स्टीनमार्क शामिल रहे। इस दौरे का समन्वय इंटरनेशनल टैलेंट सॉल्यूशंस के सीईओ अल्बर्ट बाकर, और  इंडो यूरो सिंक्रोनाइजेशन ग्रुप के अध्यक्ष राज वंगापांडु तथा निदेशक राजीव गुलाटी ने किया।

विश्वविद्यालय में आयोजित बैठक का समन्वय डीन, इंस्टीट्यूशंस प्रो. मुनीष वशिष्ठ तथा प्रिंसिपल, कम्युनिटी कॉलेज ऑफ स्किल डेवलपमेंट प्रो. संजीव गोयल ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नरेश चौहान ने की।

बोर्ड रूम में आयोजित औपचारिक सत्र का शुभारंभ फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. राजेश आहूजा के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और जर्मनी के संस्थानों के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गयी।

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक क्षमताओं एवं अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी देते हुए डॉ. रश्मि पोपली ने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में उभरती प्रौद्योगिकियों एवं सतत विकास से जुड़े सात क्षेत्रों में 23 स्टार्टअप कार्यरत हैं। डॉ. विमलेश ओझा ने कम्युनिटी कॉलेज ऑफ स्किल डेवलपमेंट की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि कॉलेज के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकार के कौशल मिशन तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क  के अनुरूप संचालित किए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर तकनीकी कुशल कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

बैठक के दौरान राज वंगापांडु और राजीव गुलाटी ने जर्मनी में कुशल तकनीकी कर्मियों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। श्री वंगापांडु ने बताया कि कोटिंग  कॉन्सेप्ट्स  के लिए ऑटोमोटिव एवं औद्योगिक कोटिंग क्षेत्र में प्रोसेस मैकेनिक के पदों पर योग्य तकनीकी कर्मियों की भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2027 में आयोजित होगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को जर्मनी में कार्यभार संभालने से पहले आवश्यक ए2 स्तर का जर्मन भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

कोटिंग  कॉन्सेप्ट्स  की प्रबंध निदेशक जनीना राडोविक और एंड्रियास फालर ने जर्मनी के ऑटोमोटिव एवं औद्योगिक कोटिंग क्षेत्र में करियर की संभावनाओं, कार्यस्थल के मानकों और आवश्यक तकनीकी दक्षताओं की जानकारी दी। उ

न्होंने चयनित अभ्यर्थियों को भाषा प्रमाणन तथा जर्मनी में कार्य शुरू करने की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक ने अंतराष्ट्रीय सहभागिता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि कोटिंग  कॉन्सेप्ट्स  और जर्मनी के औद्योगिक भागीदारों के साथ यह सहयोग विद्यार्थियों के लिए वैश्विक स्तर पर करियर के अवसर उपलब्ध कराने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेष रूप से कौशल आधारित कम्युनिटी कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय का व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और यह साझेदारी युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के नए मार्ग खोलेगी।

कुलसचिव प्रो. अजय रँगा ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए जर्मन प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करना गर्व का विषय है। विद्यार्थियों को वैश्विक नियोक्ताओं से सीधे जोड़ना तथा उन्हें तकनीकी और भाषाई रूप से तैयार करना विश्वविद्यालय की व्यापक कौशल सशक्तीकरण एवं विद्यार्थी प्लेसमेंट संबंधी प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक एवं ऑटोमोटिव कोटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कम्युनिटी कॉलेज के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल, कार्यस्थल के अनुभव तथा जर्मनी में रोजगार के लिए उनकी तैयारी का आकलन किया गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया तथा केंद्रीय कार्यशाला और प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर तकनीकी प्रशिक्षण सुविधाओं का जायजा लिया।

कार्यक्रम के अंत में डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नरेश चौहान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न शिक्षण विभागों के अध्यक्ष एवं संकाय सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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