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फरीदाबाद और गुरुग्राम में कूड़े के अंबार पर सरकार और स्वच्छता प्रेमी मौन क्यों : नरेश कुमार शास्त्री

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 15 October 2026 0 comments
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 चंडीगढ़, 15 अक्टूबर। 


सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने फरीदाबाद और गुरुग्राम में लगे कूड़े के अंबार तथा चरमराई सफाई व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक एवं मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में पहचान रखने वाले इन शहरों में लगभग चार से पांच हजार टन कूड़ा इकट्ठा हो गया है। नागरिक कूड़े के ढेरों और दुर्गंध के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार स्थायी समाधान नहीं कर रही है।


शास्त्री ने कहा कि फरीदाबाद में सरकार कूड़ा निस्तारण प्लांट तक स्थापित नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण एवं ऊर्जा उत्पादन संयंत्र का विरोध सत्ताधारी दल के पार्षद और विधायक ही कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि ही परियोजना के विरोध में खड़े हैं, तो सरकार शहर के कूड़े का निस्तारण कैसे सुनिश्चित करेगी? सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों को जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

शास्त्री ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की 37 दिन चली हड़ताल के दौरान सरकार और विभिन्न मंचों से शहरों में कूड़े के ढेर लगने, दुर्गंध और बीमारियां फैलने की चिंता जताई जा रही थी। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद भी फरीदाबाद और गुरुग्राम में कूड़े के अंबार क्यों लगे हैं? उस समय जनता के स्वास्थ्य की चिंता करने वाली सरकार और स्वच्छता प्रेमी आज चुप क्यों हैं?

उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान में झाड़ू उठाकर फोटो खिंचवाने और हड़ताल के दौरान सफाई के प्रति प्रेम दिखाने वालों को अब भी सामने आना चाहिए। शहरों को स्वच्छ रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारी, नियमित कूड़ा उठान, जरूरी उपकरण तथा वैज्ञानिक प्रसंस्करण और सुरक्षित निस्तारण की ठोस व्यवस्था आवश्यक है।

शास्त्री ने कहा कि कूड़ा प्रबंधन की विफलता का दोष सफाई कर्मचारियों पर डालकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। कूड़ा उठाने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक प्रभावी व्यवस्था बनाना सरकार और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने मांग की कि दोनों शहरों में जमा कूड़ा तत्काल उठवाया जाए। फरीदाबाद में प्रस्तावित संयंत्र से जुड़ी आपत्तियों का पारदर्शी एवं वैज्ञानिक समाधान करके पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के मानकों के अनुरूप कूड़ा निस्तारण की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।

शास्त्री ने नागरिकों से अपील की कि वे सरकार और स्थानीय प्रशासन से सवाल पूछें—हड़ताल समाप्त होने के बाद भी शहर कूड़े के ढेरों से मुक्त क्यों नहीं हुए और स्थायी समाधान कब होगा?

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