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फरीदाबाद। हरियाणा सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार राजेश नागर ने खरीफ सत्र 2026-27 के दौरान धान, बाजरा सहित अन्य खरीफ फसलों की मंडियों में निर्बाध खरीद और किसानों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर आज अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे वहीं प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्त और जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ फसलों की खरीद प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। मंडियों में किसानों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं खरीद शुरू होने से पहले सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि मंडियों में आने वाली फसल की समयबद्ध खरीद के साथ-साथ खरीदी गई धान सहित अन्य फसलों का नियमित रूप से उठान भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि मंडियों में अनावश्यक रूप से फसल जमा न हो और किसानों को अपनी उपज लेकर अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार भी किसानों की फसल की खरीद बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही की जाएगी। इसके लिए सभी मंडियों और खरीद केंद्रों पर आवश्यक बायोमेट्रिक एवं आइरिस उपकरणों की उपलब्धता और उनके सुचारु संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उनकी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आनी चाहिए। कृषि विभाग और जिला प्रशासन आपसी समन्वय के साथ फसल की क्षेत्र सत्यापन प्रक्रिया तथा उत्पादन से संबंधित सभी आंकड़ों को समय पर अपडेट करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में फसल की आवक को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त स्थान, आवश्यक सुविधाएं और सुचारु व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की फसल की खरीद के लिए पूरी तरह तैयार है और संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करें।
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) के आधार पर पिछले तीन वर्षों में धान की जिलेवार औसत पैदावार की समीक्षा की गई। साथ ही खरीफ सत्र 2026-27 में खरीदे जाने वाले गैर-बासमती धान और अन्य फसलों के क्षेत्र सत्यापन तथा धान की औसत पैदावार में संशोधन की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से मंडियों एवं खरीद केंद्रों में पेयजल, जल निकासी, शौचालय, हेल्प डेस्क, अटल कैंटीन तथा साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। इसके अलावा मंडियों में वे-ब्रिज की कैलिब्रेशन, आढ़तियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे वजन कांटों की लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के निरीक्षकों द्वारा जांच एवं कैलिब्रेशन, मॉइस्चर मीटर की उपलब्धता तथा विभिन्न फसलों के मंडी श्रम शुल्क की अधिसूचना की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
मंत्री ने मंडियों में पर्याप्त मैनपावर की उपलब्धता, फसल की सफाई के लिए आवश्यक छलनियों, बारिश से अनाज की सुरक्षा के लिए पॉलीथीन कवर और लकड़ी के क्रेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंडियों के प्रवेश एवं निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरों तथा मंडी स्तर पर कन्वेयर बेल्ट की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए कि मंडियों में धान की आवक के अनुरूप पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो, दैनिक उठान की व्यवस्था सुचारु रहे तथा मंडी स्तर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और बायोमेट्रिक सुविधाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध रहें। साथ ही खरीद संबंधी सभी सरकारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में भारतीय खाद्य निगम (FCI) से गेहूं एवं चावल के आउटवर्ड मूवमेंट की स्थिति की समीक्षा की गई। खरीफ सत्र 2026-27 के दौरान कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी के लिए पर्याप्त स्टोरेज स्पेस उपलब्ध कराने तथा मंडी शेड में रखे गेहूं के समय पर उठान को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिला खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से KMS 2026-27 के लिए राइस मिलर्स के पंजीकरण, KMS 2025-26 की लंबित CMR डिलीवरी, लकड़ी के क्रेट, टॉप कवर, बोरी के बंडल एवं मॉइस्चर मीटर सहित आवश्यक स्टॉक की स्थिति की जानकारी ली गई। इसके अलावा उपायुक्त एवं जिला स्तरीय समितियों के साथ समय पर बैठकें करने तथा राइस मिलर्स के विभिन्न लंबित एवं देय भुगतानों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
राजेश नागर ने अधिकारियों से कहा कि खरीफ फसल खरीद सीजन के दौरान सरकार की प्राथमिकता किसान की सुविधा और उसकी उपज का समय पर उचित व्यवस्था के साथ उठान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मंडियों में आने वाले किसानों को किसी भी स्तर पर अनावश्यक परेशानी न हो और खरीद व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी सामने आने पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।


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