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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 2.13 करोड़ रुपये की ठगी, खाताधारक सहित 2 गिरफ्तार

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 6 September 2026 0 comments
pramod goyal
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 फरीदाबाद, 31 जुलाई। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2,13,16,000 रुपये की साइबर ठगी के एक मामले में सफलता हासिल करते हुए साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने ठगी की राशि प्राप्त करने वाले खाताधारक व एक अन्य को जीरकपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गौतम(27) व मोहित(25) वासी लुधियाना पंजाब को गिरफ्तार किया है।


पुलिस प्रवक्ता अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी गौतम दुसरी लेयर का खाताधारक है, जिसके खाता में ठगी के 65,000 रुपये आये थे। उसने अपना खाता आगे मोहित को दिया था। मोहित ने यह खाता आगे ठगो को दिया था। गौतम 11वीं पास है तथा ड्राईविंग का काम करता है, वहीं मोहित बी.कॉम पास है व एक प्राईवेट कंपनी में एकाउंटेंट के पद पर है। जिनको माननीय न्यायलय में पेश किया गया जहां से गौतम को जेल व मोहित को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

बता दें कि कि 13 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता की पत्नी के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक खाते में 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। फिर कॉल को कथित मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया।

इसके बाद ठगों ने पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर रखा और उन्हें घर से बाहर जाने से मना किया। हर दो घंटे में वीडियो कॉल के माध्यम से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई ताकि वे किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न कर सकें। ठगों ने स्वयं को विभिन्न सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित परिवार पर मानसिक दबाव बनाया और गिरफ्तारी का भय पैदा किया।

पीड़ित को ED के नाम से फर्जी "Arrest Order" भेजे गए तथा सुप्रीम कोर्ट के नाम से भी फर्जी पत्र भेजा गया, जिसमें कथित सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देते हुए निर्देश दिए गए कि उनके सभी बैंक खातों की राशि जांच के लिए बताए गए खातों में स्थानांतरित कर दी जाए। साथ ही 48 से 72 घंटे के भीतर पूरी राशि वापस लौटाने का झूठा आश्वासन दिया गया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के भय से पीड़ित ने जनवरी 2026 के दौरान विभिन्न बैंक ट्रांजेक्शनों के माध्यम से कुल 2,13,16,000 रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए। जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि वापस लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया तो ठगों के मोबाइल नंबर बंद मिले और उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, सुप्रीम कोर्ट अथवा अन्य न्यायालय किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करते और न ही जांच के नाम पर किसी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं। "डिजिटल अरेस्ट" का भारतीय कानून में कोई भी प्रावधान नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की कॉल, वीडियो कॉल, व्हाट्सएप संदेश, फर्जी नोटिस या गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे मांगने का प्रयास किया जाए तो तुरंत कॉल काट दें, किसी भी प्रकार की राशि ट्रांसफर न करें और तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही निकटतम साइबर थाना या पुलिस स्टेशन में भी तुरंत सूचना दें।


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