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ओपीएस,पे कमीशन, रेगुलराइजेशन, निजीकरण पर रोक आदि मांगों को लेकर कर्मचारी 12 दिसम्बर को दिल्ली में करेंगे राष्ट्रीय रैली : सुभाष लांबा

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 5 September 2026 0 comments
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 नागपुर,5 सितंबर।


अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा है कि कर्मचारियों, पेंशनरों और मजदूरों की ज्वलंत मांगों तथा सरकार की कर्मचारी-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 दिसम्बर, 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल राष्ट्रीय रैली आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों से लाखों की संख्या में कर्मचारियों को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सभी राज्यों के लिए कर्मचारियों का कोटा निर्धारित कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि रैली ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व होगी। उन्होंने यह घोषणा शनिवार को तिलक पत्रकार भवन, नागपुर (महाराष्ट्र) में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते किया। प्रेस कांफ्रेंस में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा के साथ महाराष्ट्र राज्य कर्मचारी मध्यवर्ती संधटना,महाराष्ट्र  के राज्य अध्यक्ष 
अशोक दगड़े और ज्ञानेश्वर महल्ले,कु मेघा करारे, मिलिंद धोंगडे ,जिल्हा परिषद कर्मचारी महासंघ से गोपिचंद कातुरे,उत्तम झेंलगुदे, उदय चांदुरकर तथा सेवानिवृत्त संघटना से पुरुषोत्तम मिलमिले, वासुदेव वाकोडीकर आदि मौजूद थे। इससे पहले जिला स्तरीय कर्मचारी परिषद का आयोजन किया गया। जिसको संबोधित करते हुए राज्य अध्यक्ष अशोक दगड़े व गोपीचंद कातूरे ने कहा कि *12 दिसम्बर की दिल्ली रैली में महाराष्ट्र से बडी़ संख्या में कर्मचारी शामिल होंगे।*

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि *महासंघ ने 8 वें केंद्रीय वेतन आयोग को भेजें ज्ञापन में 3.8 फिटमेंट फेक्टर, इन्क्रीमेंट की दर पांच प्रतिशत करने और 30,35 व 40 प्रतिशत की दर से एचआरए देने तथा ग्रुप डी के लिए 40 हजार न्यूनतम वेतन  देने की मांग की।* उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रैली  की प्रमुख मांगों में पीएफआरडीए एक्ट व एनपीएस / यूपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना बहाल करना, सभी प्रकार के ठेका, संविदा, आऊटसोर्सिंग व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करना तथा सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरना शामिल है।
उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें कर्मचारी हित में लागू की जाएं, वेतन संशोधन दस की बजाय प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाए और कर्मचारियों को मूल वेतन का बीस प्रतिशत और कम से कम पांच हजार रुपए अंतरिम राहत दी जाए। समान काम के लिए समान वेतन लागू करने तथा लंबित 18 महीने के डीए / डीआर और अन्य बकायों का भुगतान करने की भी मांग की गई है। उन्होंने पूंजीपतियों के हक में बनाए गए मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी विभागों के निजीकरण एवं निगमीकरण पर रोक लगाने तथा सभी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कैशलेस उपचार वाली व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग की। 
उन्होंने कहा कि 12 दिसम्बर की राष्ट्रीय रैली को ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व बनाने के लिए सभी राज्यों में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। राज्य, जिला और क्षेत्र स्तर पर सम्मेलन, गेट मीटिंगें और प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं। रैली की तैयारियों के अभियान को तेज करने के लिए 12-13 सितंबर को श्रीनगर में होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति में व्याप्त योजना तैयार की जाएगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा की एक तरफ देश में भयंकर बेरोजगारी है और दूसरी तरफ केन्द्र व राज्य सरकार के विभागों और पीएसयू में लगभग एक करोड़ पद खाली पड़े हुए हैं। इन रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ ओपीएस बहाली से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का दुष्प्रचार कर रही है और दूसरी तरफ कारपोरेट घरानों के लाखों करोड़ों कर्जों और टैक्सों को माफ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है कि सरकारी विभागों का विस्तार करने की बजाय उनके आकार को सिकोड़ा जा रहा है। उन्होंने जीडीपी ग्रोथ पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का दावा किया जा रहा है। अगर यह सच है तो बढ़े लिखों में बेरोज़गारी की दर 40 प्रतिशत से अधिक क्यों है और 80 करोड़ नागरिकों को 5 किलो अनाज क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने " वन नेशनल,वन इलेक्शन" के पैरोकारों से सवाल किया की "वन नेशन,वन पेंशन (ओपीएस) क्यों नहीं है ?

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने देशभर के कर्मचारियों, पेंशनरों और ठेका-संविदा कर्मियों से आह्वान किया कि वे 12 दिसम्बर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रीय रैली को ऐतिहासिक सफलता प्रदान करें और अपनी मांगों के लिए संघर्ष को मजबूत बनाएं।

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