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फरीदाबाद ( ) 1 अगस्त।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, फरीदाबाद द्वारा गांव खेड़ी कलां में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण का आयोजन।
आज दिनांक 01.08.2026 को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के माननीय कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कांबोज एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक के दिशा निर्देशों के अनुसार गांव खेड़ी कलां में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र फरीदाबाद के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. अशोक कुमार देशवाल ने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया तथा अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया जिससे कि रसायनों के दुष्प्रभाव से ब
चा जा सके एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके। कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डॉ. वर्षा रानी ने खट्टी लस्सी, दषपरणीं और लाभकारी जीवाणुओं के उपयोग पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को महिलाएं गृह वाटिका में प्रयोग करके अपने परिवार को जहर मुक्त थाली दे सकती हैं। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) डॉ. विनोद कुमार ने किसानों को रसायनिक खादों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से मिट्टी, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की विस्तार से जानकारी दी, इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से बिमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है और विकल्प के तौर पर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की जरूरत है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के प्रमुख उत्पाद जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत बनाने की प्रक्रिया को विस्तार से बताया तथा इसके उपयोग के तरीके भी बताए । कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के आयोजक श्री सत्यपाल नरवत महासचिव किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद ने प्रतिभागियों कृषि विभाग से आये अधिकारीयो एवं किसान प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया। इस कार्यक्रम में गांव खेड़ी कलां के 50 से अधिक किसानों व महिलाओं ने भाग लिया। प्रगतिशील किसान ब्रह्मपाल नरवत ने अधिकारियों के समक्ष बात रखी कि प्राकृतिक खेती करना अच्छी बात है लेकिन उसमें किसान की लगत भी नहीं निकलेगी। अगर सरकार किसानों को अमेरिका की तरह सब्सिडी दे तो किसान प्राकृतिक खेती करने में सक्षम होंगे। किसान रंजीत, विजेंद्र थानेदार, धर्मवीर चेयरमैन, धर्मपाल, जयचंद्र, कमल सिंह नरवत, नानकचंद, नरेंद्र नरवत आदि ने अधिकारियों से धान फसल के बारे में, मक्का की फसल के बारे में एवं सब्जियों में लगे कीड़ों के बारे में सवाल जवाब करके जानकारी हासिल करी।
चा जा सके एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके। कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डॉ. वर्षा रानी ने खट्टी लस्सी, दषपरणीं और लाभकारी जीवाणुओं के उपयोग पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को महिलाएं गृह वाटिका में प्रयोग करके अपने परिवार को जहर मुक्त थाली दे सकती हैं। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) डॉ. विनोद कुमार ने किसानों को रसायनिक खादों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से मिट्टी, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की विस्तार से जानकारी दी, इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से बिमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है और विकल्प के तौर पर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की जरूरत है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के प्रमुख उत्पाद जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत बनाने की प्रक्रिया को विस्तार से बताया तथा इसके उपयोग के तरीके भी बताए । कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के आयोजक श्री सत्यपाल नरवत महासचिव किसान संघर्ष समिति नहरपार फरीदाबाद ने प्रतिभागियों कृषि विभाग से आये अधिकारीयो एवं किसान प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया। इस कार्यक्रम में गांव खेड़ी कलां के 50 से अधिक किसानों व महिलाओं ने भाग लिया। प्रगतिशील किसान ब्रह्मपाल नरवत ने अधिकारियों के समक्ष बात रखी कि प्राकृतिक खेती करना अच्छी बात है लेकिन उसमें किसान की लगत भी नहीं निकलेगी। अगर सरकार किसानों को अमेरिका की तरह सब्सिडी दे तो किसान प्राकृतिक खेती करने में सक्षम होंगे। किसान रंजीत, विजेंद्र थानेदार, धर्मवीर चेयरमैन, धर्मपाल, जयचंद्र, कमल सिंह नरवत, नानकचंद, नरेंद्र नरवत आदि ने अधिकारियों से धान फसल के बारे में, मक्का की फसल के बारे में एवं सब्जियों में लगे कीड़ों के बारे में सवाल जवाब करके जानकारी हासिल करी।

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