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अधिवक्ता के अधिकारों को लेकर मोहन तिवारी ने उठाई आवाज, निष्पक्ष जांच की मांग

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 8 August 2026 0 comments
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 फरीदाबाद। सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा को कथित रूप से डीसीपी सेंट्रल, फरीदाबाद कार्यालय से थाना सेंट्रल ले जाकर लगभग डेढ़ घंटे तक रोके जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस आयुक्त फरीदाबाद, थाना सेंट्रल के एसएचओ, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत एवं स्वतंत्र प्रतिवेदन भेजा है।


अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा, जिला न्यायालय फरीदाबाद, अपनी शिकायत के संबंध में 5 अगस्त 2026 को लगभग 12:30 बजे डीसीपी सेंट्रल कार्यालय पहुंचे थे। पीड़ित अधिवक्ता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, उन्हें लगभग 1 बजे के बाद डीसीपी सेंट्रल कार्यालय में रोका गया तथा बाद में थाना सेंट्रल ले जाया गया, जहां उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उन्हें कथित रूप से यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उन्हें किस एफआईआर, डीडी/जीडी एंट्री अथवा अन्य वैधानिक आधार पर रोका गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद कुछ साथी अधिवक्ताओं के थाना सेंट्रल पहुंचने तथा पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

अधिवक्ता मोहन तिवारी ने कहा कि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीसीपी सेंट्रल कार्यालय एवं थाना सेंट्रल की सीसीटीवी फुटेज, संबंधित डीडी/जीडी/रोजनामचा, विजिटर रजिस्टर तथा अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो

सकते हैं। इसके अलावा घटना से संबंधित उपलब्ध फोटो एवं वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रतिवेदन किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत शिकायत की पैरवी के रूप में नहीं, बल्कि एक अधिवक्ता एवं नागरिक के रूप में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक गरिमा, अधिवक्ताओं के अधिकारों तथा विधि के शासन से जुड़े व्यापक जनहित में है।

डॉ. तिवारी ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि 5 अगस्त की घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज एवं सरकारी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित कराए जाएं। साथ ही यह निष्पक्ष रूप से निर्धारित किया जाए कि अधिवक्ता को किस अधिकारी के निर्देश पर, किस समय और किस वैधानिक आधार पर थाना सेंट्रल ले जाया गया तथा उन्हें वहां रोके जाने का वास्तविक कारण क्या था।

उन्होंने घटना के समय मौजूद पुलिस अधिकारियों एवं प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध फोटो-वीडियो को जांच में शामिल करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी द्वारा कानून, निर्धारित प्रक्रिया अथवा मानवाधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

अधिवक्ता मोहन तिवारी ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक या अधिवक्ता की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़े मामलों में पारदर्शी जांच आवश्यक है, ताकि कानून के शासन एवं संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों का विश्वास कायम रहे।

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