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चंडीगढ़, 16 अगस्त।*
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने शहरी स्थानीय निकाय एवं अग्निशमन विभाग के करीब 40 हजार कर्मचारियों की 6 अगस्त से चल रही हड़ताल का पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि वह कर्मचारियों के आंदोलन को हल्के में लेने की भूल न करे। उन्होंने कहा कि सरकार की हठधर्मिता और समझौते को लागू न करने की नीति के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। यदि सरकार ने शीघ्र समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन व्यापक जनांदोलन का रूप ले सकता है।
लांबा ने कहा कि सरकार नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के साथ केवल बातचीत के नाम पर बातचीत कर रही है। वार्ता में हड़ताल समाप्त करवाने और कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने की कोई गंभीर पहल दिखाई नहीं दे रही। इसका सबसे बड़ा प्रमाण 14 अगस्त को हुई वार्ता है, जिसमें शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री स्वयं बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे साफ है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है।
उन्होंने कहा कि 6 अगस्त से 40 हजार कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिसके कारण प्रदेश के शहरों और कस्बों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं। लगातार बारिश के कारण गंदगी से दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसके बावजूद सरकार समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय कुछ निजी एजेंसियों के माध्यम से सफाई करवाकर केवल फोटो खिंचवाने और दिखावे की राजनीति कर रही है।
सुभाष लांबा ने कहा कि यह हड़ताल अचानक नहीं हुई है। 13 मई को लंबे आंदोलन के बाद सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच लिखित समझौता हुआ था। कर्मचारियों ने सरकार पर भरोसा करते हुए आंदोलन समाप्त किया था, लेकिन सरकार ने तीन महीने बीत जाने के बावजूद समझौते को लागू नहीं किया। इतना ही नहीं, सरकार अब मानी हुई मांगों से भी पीछे हटती न
जर आ रही है। यही कारण है कि कर्मचारियों को दोबारा हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जर आ रही है। यही कारण है कि कर्मचारियों को दोबारा हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि 13 मई के समझौते में 17 मांगों पर सहमति बनी थी, जिनमें पालिका रोल पर कार्यरत अनुबंध एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करना, ठेका प्रथा समाप्त करना, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करना, सफाई एवं सीवर कर्मचारियों की पक्की भर्ती करना, अग्निशमन विभाग के अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करना तथा अग्निशमन विभाग के शहीद कर्मचारी भविष्य चंद्र और रणवीर के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल था। इसके अलावा वर्दी भत्ता, जोखिम भत्ता सहित कर्मचारियों की अन्य मांगों पर भी सहमति बनी थी।
लांबा ने कहा कि 17 मांगों पर सहमति के बावजूद सरकार ने आज तक उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक पत्र तक जारी नहीं किए हैं। यह कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते और भरोसे का खुला उल्लंघन है। सरकार को आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने के बजाय अपने किए हुए समझौते को लागू करना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे स्वयं हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारी संगठनों के साथ तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता करें और 13 मई के समझौते को समयबद्ध तरीके से लागू करने की घोषणा करें।
सुभाष लांबा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र समझौते को लागू कर हड़ताल समाप्त नहीं करवाई तो कर्मचारी संगठनों को आंदोलन को और व्यापक करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी संगठनों और महासंघ का पूरा समर्थन हड़ताली कर्मचारियों के साथ है और सरकार को इसका खामियाजा एक बड़े आंदोलन के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

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