फरीदाबाद के थाना सदर बल्लभगढ़ पुलिस पर एक अधिवक्ता द्वारा लगाए गए अवैध हिरासत, पुलिस कस्टडी में मारपीट और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोपों को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है।
आयोग ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के आदेश देते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि जांच आईजीपी स्तर के अधिकारी से कराई जाए तथा विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश की जाए।
आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है।
बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना, उसके साथ मारपीट करना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना कानून के शासन के विपरीत है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता मोहित दलाल के अनुसार, 2 जुलाई 2026 की रात करीब 11:30 बजे चंदावली चौक पर पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए उन्हें रोका। उनका आरोप है कि बार काउंसिल का पहचान पत्र दिखाने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
शिकायत में कहा गया है कि बाद में पुलिस ने उनका पीछा कर उन्हें और उनके साथियों को जबरन थाना सदर बल्लभगढ़ ले जाकर पूरी रात हिरासत में रखा। इस दौरान कथित तौर पर मारपीट की गई और करीब 12 घंटे बाद लिखित माफीनामा लेने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

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