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CISF कैंटीन का कर्मचारी बनकर ₹2.53 लाख की साइबर ठगी, 5 गिरफ्तार

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 22 July 2026 0 comments
pramod goyal
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 फरीदाबाद: फरीदाबाद पुलिस के साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने स्वयं को CISF कैंटीन के खरीद विभाग का कथित कर्मचारी बताकर एक व्यवसायी से ₹2.53 लाख की साइबर ठगी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जिनकी पहचान परमजीत निवासी अमर भवन चौक, पानीपत, प्रदीप कुमार निवासी जयमल पाना, घरौंडा (करनाल), भारत कुमार निवासी घरौंडा (करनाल), निखिल निवासी भारत नगर, पानीपत तथा वंश कुमार निवासी भोला कॉलोनी, घरौंडा (करनाल) के रूप में हुई है। वंश और प्रदीप को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है, वहीं भारत, निखिल और परमजीत को आगे की पूछताछ एवं नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों की जानकारी जुटाने के लिए 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।


पुलिस प्रवक्ता अनुसार सेक्टर-70, आईएमटी फरीदाबाद निवासी एक व्यवसायी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 22 जून 2026 को उसके पास एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को CISF कैंटीन (GBS महिपाल) के खरीद (Purchase) विभाग का कर्मचारी बताया। आरोपी ने टैबलेट चार्जिंग कैबिनेट खरीदने की बात कहकर उसकी कंपनी MD International की जानकारी और   कोटेशन मंगवाई। इसके बाद उसने फर्जी परचेज ऑर्डर भेजकर सामान भेजने के निर्देश दिये। कुछ समय बाद दूसरे मोबाइल नंबर से एक व्यक्ति ने स्वयं को विभाग का अकाउंटेंट बताते हुए कहा कि विभाग के साथ कार्य शुरू करने से पहले कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। उसने झांसा दिया कि पहले ऑर्डर की राशि विभिन्न खातों में जमा करानी होगी, जिसे बाद में रिफंड कर दिया जाएगा। ठगों की बातों में आकर शिकायतकर्ता ने कुल ₹2,53,459 विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब शिकायतकर्ता सामान लेकर बताए गए पते पर पहुंचा तो पता चला कि CISF कैंटीन (GBS महिपाल) द्वारा कोई ऑर्डर जारी ही नहीं किया गया था। जिसकी शिकायत पर थाना साइबर बल्लभगढ़ में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ की गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सभी आरोपित लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे। भारत ने खाताधारक वंश का बैंक खाता लेकर आगे निखिल और परमजीत को उपलब्ध कराया था। जिस बैंक खाते में ठगी की ₹1,90,000 की राशि प्राप्त हुई, उस खाते से संबंधित मोबाइल SIM, प्रदीप के नाम पर पंजीकृत थी।


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