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हरियाणा कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जा रही है या केवल औपचारिकता निभाई जा रही है ?

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 28 July 2026 0 comments
pramod goyal
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 हरियाणा कांग्रेस में इन दिनों प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष का जिला-दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं के मन की बात सुनी जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में जमीनी कार्यकर्ता वहाँ तक पहुँच भी पा रहा है?

जब बैठकें सार्व

जनिक स्थानों के बजाय निजी परिसरों या निजी कार्यालयों में आयोजित हों, तो एक साधारण कार्यकर्ता कैसे निडर होकर अपनी बात रखेगा? क्या वह उन लोगों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकता है, जिनके खिलाफ उसे शिकायत हो? यदि नहीं, तो ऐसे संवाद का उद्देश्य क्या रह जाता है?
हरियाणा में कांग्रेस के अपने संगठनात्मक कार्यालय आज भी लगभग नहीं के बराबर हैं। ऐसे में जिला अध्यक्ष के निजी स्थानों पर होने वाले संवाद कार्यकर्ताओं के मन में निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न खड़े करते हैं। लोकतांत्रिक दल की पहचान खुली चर्चा से होती है, बंद कमरों से नहीं।
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष, संवाद और जनसंपर्क की नई राजनीति का संदेश दिया है। लेकिन यदि हरियाणा में वही पुरानी गुटबाज़ी, खेमेबाज़ी और बंद व्यवस्था जारी रही, तो संगठन मजबूत होने के बजाय और कमजोर होगा।
हरियाणा कांग्रेस के रणनीतिकारों को अब यह तय करना होगा कि पार्टी की असली ताकत समर्पित कार्यकर्ता हैं या केवल पदों पर बैठे चेहरे। यदि जमीनी कार्यकर्ता को सम्मान, निष्पक्ष मंच और निर्भय वातावरण नहीं मिलेगा, तो संगठन विस्तार का हर दावा केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा।
आज आवश्यकता दिखावे की नहीं, बल्कि संगठन में विश्वास बहाल करने की है। यदि कांग्रेस वास्तव में बदलाव चाहती है, तो कार्यकर्ताओं से संवाद किसी सार्वजनिक, निष्पक्ष और सभी के लिए समान रूप से सुलभ स्थान पर होना चाहिए ना कि थोपे गए अध्यक्षों के निजी कार्यालय में तभी कार्यकर्ता खुलकर अपनी बात कह पाएगा और तभी संगठन वास्तविक अर्थों में मजबूत होगा।

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