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फरीदाबाद/गुड़गांव: आशा वर्कर्स का अपनी मांगो को लेकर ज़ोरदार प्रदर्शन। अखिल भारतीय फेडरेशन के आह्वान पर हरियाणा में आज सभी जिलों में प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भारत सरकार के नाम मांग पत्र भेजा गया। 21 जुलाई को पंचकुला में होगा राज्य स्तरीय प्रदर्शन। 10 अगस्त को भरेंगे जेल। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा के नेतृत्व में प्रदर्शन की कार्यवाही को गई।
प्रदर्शनकारियों को प्रमुख रूप से यूनियन राज्य उपाध्यक्ष सुधा, जिला प्रधान हेमलता गोयल, सीटू प्रदेश महासचिव जयभगवान, जिला सचिव वीरेंद्र डंगवाल, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री, जिला प्रधान करतार सिंह, कर्मचारियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा आदि ने प्रमुख रूप से संबोधित किया।
भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र व राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बेटी पढ़ाओ , बेटी बचाओ का नारा लगाने वाली यह सरकार व्यवहार में महिलाओं का शोषण कर रही है। देश की आशा वर्कर लाखों की संख्या में देश की जनता की सेवा कर रही है। करोना महामारी के समय जान हथेली पर रखकर देश की सेवा की और जिसकी प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की। लेकिन सरकार आशा वर्कर्स का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रही है। 24 घंटे कभी भी आशा वर्कर्स अपनी सेवाएं देने के लिए तत्पर रहती है दिन हो या रात। लेकिन उनको उनके काम के आधार पर वेतन देने की बजाय मानदेय के नाम पर आर्थिक शोषण जारी है।
आज पूरे देश के अंदर आशा वर्कर्स ने लाखों की संख्या में प्रदर्शन कर देश के स्वास्थ्य मंत्री के नाम लिखित मांग पत्र भेजा है। आशा वर्कर्स का शोषण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा मजदूर संगठन सीटू आशाओं के आंदोलन में सक्रिय रूप से सहयोग करता रहेगा।
*मुख्य मांगे
1. भारत सरकार द्वारा सन 2025 में आशा वर्कर्स की ₹1500 की घोषणा तुरंत लागू की जाए।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को एक स्थाई स्वास्थ्य कार्यक्रम बनाकर आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
3. देश में एक समान कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित किया जाए।
4. सभी आशा वर्कर्स को वेतन सहित मातृत्व अवकाश 6 महीने का दिया जाए। इसके अलावा वार्षिक 20 दिन की आवश्यक अवकाश दिए जाएं और सभी आशा वर्कर्स को फ्री चिकित्सा सुविधा दी जाए।
5. पेंशन तक कोई सेवा निवृत्ति नहीं की जाए, रिटायरमेंट आर यू 65 वर्ष की जाए।
6. आशा कार्यकर्ताओं की वरिष्ठ के आधार पर अन्य पदों पर पदोउन्नति सुनिश्चित की जाए।
7. सभी पीएचसी, सीएचसी और अस्पतालों में आशा विश्राम कक्ष बनवाए जाएं।
8. आशा कार्यकर्ताओं को स्कूटर दिया जाए और स्कूटर के साथ ड्यूटी के दौरान यात्रा भता दिया जाए।
9. आशाओं पर सभी तरह के ऑनलाइन काम का दबाव बनाया जाना बंद किया जाए।
10. सरकारी स्वास्थ्य विभाग के ढांचे और अस्पतालों सहित सभी बुनियादी सुविधाओं के निजीकरण के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए और सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए।।
11. मजदूर विरोधी चार लेबर को रद्द किए जाएं, आशा और फैसिलिटेटर को श्रम कानून के दायरे में शामिल किया जाए।

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