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दबाव में बार बार झुकना साबित करता है कि सरकार के फैसले बिना सोचे समझे होते हैं - हरीश चन्द्र आज़ाद

Posted by : pramod goyal on : Monday, 27 July 2026 0 comments
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 फरीदाबाद! समाजसेवी हरीश चन्द्र आज़ाद ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देश को इतने बड़े आंदोलन में धकेलने के बाद लेना ये दर्शाता हैं कि केंद्र सरकार बिना सड़को पर उतरे देश की जनता या विपक्ष की बात नहीँ मानती. किसान आंदोलन में भी सरकार ने हज़ारो किसानो को मरवाकर अपना फैसला वापिस लिया था.


आज़ाद ने कहा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार यदि लोगों के विशाल आंदोलन द्वारा सड़को पर उतरने के दबाव के बाद अपने फैसले वापिस लेती हैं तो इसका एक सन्देश तो ये जाता हैं कि सरकार बिना सोचे समझें फैसले लेती हैं और दूसरा नुक्सान ये हैं कि सरकार देश और दुनिया को ये सन्देश देना चाहती हैं कि भारत की सरकार इतनी कमज़ोर हैं की आंदोलन के सामने झुक जाती हैं या उसकी खुफिया एजेंसिया कमज़ोर हैं जो इस्तिथि को नहीँ भांप सकती या सरकार खुफिया एजेंसियों पर भरोसा नहीँ जताती या मोदी सरकार सिर्फ तानाशाही से काम करती हैं. इनमे से कोई भी बात विश्व स्तर पर भारत की साख को गिराती हैं.

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तिफे पर सरकार ने कहा कि हम जनता को सर्वप्रिय मानते हैं जनता के सामने हम मंत्री की कुर्सी त्याग सकते हैं उसी सरकार के कई मंत्री कुछ दिन ये यही कह रहें थे कि आंदोलनकारी छात्र नहीँ हैं अंतकवादी हैं, देश द्रोही हैं, पाकिस्तानी हैं, चाइना के हैं तो क्या अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इन देश द्रोहियो, आंतकवादियों, पाकिस्तानियों के दबाव में दिया हैं इस बात को अब सरकार के वो मंत्री साफ करें कि आंदोलनकारी छात्र थे या देशद्रोही पाकिस्तानी.

हरीश आज़ाद ने कहा कि जिस सरकार के खिलाफ देश के किसान हैं और अब देश के युवा भी खिलाफ हैं वो सरकार बिना ईवीएम में गड़बड़ी करें बार बार नहीँ जीत सकती.


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